Hindi Story: बच्चे जन्म से हिंसक नहीं होते. उन का मन एक कोरे कागज की तरह होता है, जिस पर समाज, परिवार और माहौल अपनेअपने रंग भरते हैं. यह हम हैं, बड़े लोग, जो अनजाने में या जानबू?ा कर बच्चों के मन में प्रेम, करुणा और भाईचारे के बीज बो सकते हैं या फिर नफरत, डर और शक के जहरीले अंकुर उगा सकते हैं.
आज सब से बड़ा और सब से चिंताजनक सवाल यही है कि हमारे बच्चों के भीतर दूसरे धर्म, जाति और समुदाय के प्रति नफरत और अविश्वास का बीज आखिर बो कौन रहा है? बचपन सीखने की उम्र है. बच्चे अपने आसपास जो देखते हैं, सुनते हैं और महसूस करते हैं, वही उन की पर्सनैलिटी की बुनियाद बनता है. घरपरिवार की बातचीत, बड़ों की सोच, महल्ले की चर्चाएं, धार्मिक और सामाजिक आयोजनों की भाषा और यहां तक कि चुटकुलों व अफवाहों का असर भी उन के कोमल मन पर गहराई से पड़ता है. वह वही सच मान लेता है, जो उस के भरोसेमंद बड़े उसे बताते हैं.
पर आज हालत यह है कि बहुत छोटेछोटे बच्चे ऐसे राजनीतिक और धार्मिक जहर से लैस कर दिए जा रहे हैं, जिसे वे सम?ा भी नहीं सकते. एक 11 साल के बच्चे को महात्मा गांधी की जन्मतिथि या पुण्यतिथि की जानकारी नहीं है, लेकिन उसे यह ‘ज्ञान’ जरूर दे दिया गया है कि मुसलिमों को पाकिस्तान चले जाना चाहिए था और जो भारत में रह गए, वे गांधी की ‘गलती’ की वजह से रह गए.
वह बच्चा यह भी मानता है कि देश की सारी समस्याओं की जड़ मुसलिम हैं. सवाल यह नहीं है कि यह बच्चा ऐसा क्यों सोचता है, बल्कि सवाल यह है कि उसे यह सोच सिखाई किस ने? दूसरी ओर, एक मुसलिम बच्चे को यह बताया जाता है कि हिंदुओं के घरों में शादीब्याह के मौके पर दाल में जो घी डाला जाता है, वह सूअर की चरबी का होता है. जब उस परिवार से पूछा जाता है कि यह बात उसे कैसे पता चली, तो उस का जवाब होता है कि ‘हमारी बिरादरी के हमारे साथी यही कहते हैं...’
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरस सलिल सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरस सलिल मैगजीन का सारा कंटेंट
- 1000 से ज्यादा सेक्सुअल हेल्थ टिप्स
- 5000 से ज्यादा अतरंगी कहानियां
- चटपटी फिल्मी और भोजपुरी गॉसिप
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरस सलिल सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरस सलिल मैगजीन का सारा कंटेंट
- 1000 से ज्यादा सेक्सुअल हेल्थ टिप्स
- 5000 से ज्यादा अतरंगी कहानियां
- चटपटी फिल्मी और भोजपुरी गॉसिप
- 24 प्रिंट मैगजीन




