News Story: होली आने वाली थी. अनामिका अपने घर जाना चाहती थी, पर विजय को उसी के साथ होली खेलनी थी. एक दिन जब अनामिका विजय के घर आई, तो विजय ने कहा, ‘‘यार, होली पर घर मत जाओ न. अब तो ठंड भी कम हो गई है. मुझे लगता है कि इस बार की होली हम दोनों मस्ती और मजे से मनाएंगे.’’
‘‘पर मैं पिछले 2 साल से अपने घर नहीं गई हूं. मम्मीपापा चाहते हैं कि मैं घर जाऊं उन के पास. अगर तुम्हें मेरे साथ होली खेलनी है, तो साथ चलो. बड़ा मजा आएगा,’’ अनामिका बोली.
‘‘तुम बात को कहां ले जा रही हो… मम्मी, आप कुछ बोलो न…’’ विजय ने अपनी मम्मी को इस मामले में शामिल करते हुए कहा.
‘‘यह तुम दोनों का मामला है. मुझे तो होली वैसे भी ज्यादा पसंद नहीं है. पर एकदूसरे को रंग मलो, फिर उतारते फिरो. इस से तो अच्छा है कि घर पर बैठो और दहीभल्ले, गुजिया, चाय पार्टी करो. पर नहीं, लोगों को तो रंग के साथ भांग का नशा चाहिए. और नहीं तो दारू पार्टी कर के पूरे त्योहार का मजा बिगाड़ देते हैं.
‘‘मुझे तो रंगों से वैसे भी एलर्जी है. मैं इस पचड़े में नहीं फंसना चाहती.
यह तुम दोनों की समस्या है, खुद ही सुलझाओ,’’ मम्मी ने दो टूक अपनी
बात रखी.
‘‘वाह, बेटे ने मां का साथ मांगा, पर मां ने उसे ही लपेट दिया. अरे यार, हर त्योहार का अपना मजा होता है. तुम्हें रंग पसंद नहीं तो क्या लोग होली खेलना छोड़ दें,’’ इसी बीच पापा ने विजय का साथ दिया.
‘‘वही तो पापा. मम्मी को होली खेलना पसंद नहीं और ये अनामिकाजी अपने घर जा रही हैं. वैसे, जहां तक मम्मी की रंगों से एलर्जी से समस्या है, तो एआई कब काम आएगा,’’ विजय बोला.
‘‘एआई और रंग का क्या तालमेल बना?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘किस दुनिया में जी रही हो. क्या तुम नहीं जानती कि एआई होली की तैयारी में मदद करता है, जैसे कि रंगों की डिजाइनिंग, गानों की रिकमैंडेशन और होली के लिए खास औफर्स.
‘‘इतना ही नहीं, एआई होली के दौरान सुरक्षा को सुनिश्चित करने में मदद करता है, जैसे कि रंगों की पहचान और अवैध गतिविधियों की निगरानी,’’ विजय बोला.
तुम होली मेरे साथ खेलोगे या फिर ‘ओरियन’ रोबोटिक डौग के साथ?’’ अनामिका ने ताना कसा.
‘‘मतलब? यह तुम ने क्यों कहा?’’ विजय ने पूछा.
‘‘तुम ने दिल्ली में फरवरी महीने में हुए एआई समिट में हुए गलगोटियास यूनिवर्सिटी के विवाद का नहीं पढ़ा था क्या खबरों में?’’
‘‘गलगोटियास यूनिवर्सिटी का क्या मामला है?’’ विजय ने पूछा.
‘‘मैं ने खबर में पढ़ा था कि इस समिट में गलगोटियास यूनिवर्सिटी की एक प्रोफैसर नेहा सिंह ने एक रोबोट डौग को दिखाते हुए कहा कि इस का नाम ‘ओरियन’ है. उन्होंने यह भी कहा कि यह रोबोट उन की यूनिवर्सिटी के सैंटर औफ एक्सीलैंस में बनाया गया है.’’
‘‘तो इस पर विवाद कैसे हुआ?’’ विजय बोला.
‘‘दरअसल, सोशल मीडिया यूजर्स और फैक्ट चैकर्स ने तुरंत पकड़ लिया कि यह ‘यूनिट्री जीओ2’ नाम का चाइनीज रोबोट है. चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का ऐसा रेडीमेड प्रोडक्ट जो औनलाइन 2 से 3 लाख रुपए में आसानी से मिल जाता है.
‘‘इस का खुलासा होते ही सोशल मीडिया पर बवाल मच गया. लोग बोले कि यूनिवर्सिटी ने विदेशी प्रोडक्ट को अपना बता दिया,’’ अनामिका ने अपनी बात सम?ाई.
‘‘फिर यूनिवर्सिटी ने क्या कहा?’’ यह सवाल विजय के पापा का था.
‘‘यूनिवर्सिटी ने एक्स (ट्विटर) हैंडल पर बयान जारी किया, जिस में यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया कि गलगोटियास ने यह रोबोट डौग नहीं बनाया है, न ही हम ने कभी ऐसा दावा किया है. हम दुनियाभर से (चीन, सिंगापुर, अमेरिका) सब से अच्छी टैक्नोलौजी ला कर छात्रों को एक्सपोजर देते हैं.
‘‘यूनिट्री से लिया गया रोबोट
सिर्फ दिखाने के लिए नहीं है, यह एक चलताफिरता क्लासरूम है. हमारे छात्र इसे इस्तेमाल करते हैं, इस की लिमिट्स टैस्ट करते हैं और अपनी नौलेज बढ़ाते हैं. इनोवेशन की कोई सीमा नहीं होती. लर्निंग की भी नहीं. हमारा मकसद छात्रों को आगे की टैक्नोलौजी से जोड़ना है, ताकि वे भारत में ही ऐसी चीजें डिजाइन, इंजीनियर और मैन्युफैक्चर कर सकें.
‘‘लेकिन यूनिवर्सिटी की इस बात पर भी मामला नहीं सुल?ा और कहा गया कि यूनिवर्सिटी का दावा गलत और भ्रामक है. वीडियो में प्रोफैसर (नेहा सिंह) ने साफ कहा था कि रोबोट हमारे सैंटर औफ एक्सीलैंस में बना है और नाम ‘ओरियन’ दिया है. कई यूजर्स ने कहा कि पहले तो अपना बता दिया, अब क्लैरिफिकेशन में मुकर रहे हैं.’’
‘‘पर यह यूनिट्री रोबोट डौग आखिर बला क्या है?’’ इस बारे में विजय की मम्मी को अच्छी तरह जानना था.
‘‘आंटीजी, जितना मैं ने सम?ा है, यूनिट्री रोबोटिक्स एक चाइनीज कंपनी है. यह 4 पैरों वाले (क्वाड्रुपैड) रोबोट बनाती है. ये रोबोट असली जानवरों की तरह चलते हैं. ये औब्स्टेकल्स पार करते हैं. इंडस्ट्रियल इंस्पैक्शन करते हैं और मनोरंजन के काम भी आते हैं. यूनिट्री के रोबोट बौस्टन डायनामिक्स के स्पौट से सस्ते और आसानी से मिल जाते हैं,’’ अनामिका बोली.
‘‘मु?ो लगता है कि गलत या अधूरी जानकारी देने से अच्छा है कि अपना होमवर्क सही से किया जाए. गलगोटियास यूनिवर्सिटी की प्रोफैसर बिना सटीक जानकारी के कैमरे के सामने जोशजोश में ज्यादा बोल गईं,’’ विजय ने कहा.
‘‘गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है. यूनिवर्सिटी ने इस पूरी घटना को ‘गलतफहमी’ करार दिया है. यूनिवर्सिटी ने कहा कि पवेलियन पर तैनात प्रतिनिधि को प्रोडक्ट की तकनीकी उत्पत्ति की सही जानकारी नहीं थी. कैमरे के सामने आने के उत्साह में प्रतिनिधि ने उत्पाद के स्रोत को ले कर गलत और भ्रामक दावे कर दिए.
‘‘लेकिन यह मामला इतना ज्यादा बड़ा हो गया था कि बात बिगड़ती चली गई. सरकार ने इसे नैशनल एम्बैरसमैंट (राष्ट्रीय शर्म की बात) बताया. इस पूरे मामले पर आईटी सैक्रेटरी एस. कृष्णन ने साफ कहा, ‘एग्जिबिटर्स को ऐसे आइटम्स नहीं दिखाने चाहिए जो उन के नहीं हैं.’
‘‘18 फरवरी को गलगोटियास के स्टौल की बिजली काट दी गई और यूनिवर्सिटी को तुरंत एक्सपो खाली करने का आदेश दिया गया.’’
‘‘फिर तो विपक्ष ने केंद्र सरकार को खूब घेरा होगा?’’
‘‘बिलकुल. मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के राज्यसभा सदस्य जौन ब्रिटास ने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि ग्रेटर नोएडा में बनी गलगोटियास यूनिवर्सिटी को ‘प्रमुख भाजपा नेताओं का संरक्षण और समर्थन’ हासिल है.
‘‘शिव सेना (उद्धव ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस घटना को ‘शर्मनाक’ बताया और कहा कि इस से देश और इस शिखर सम्मेलन की साख को भारी नुकसान हुआ है.
‘‘तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने कहा, ‘गलगोटियास नामक एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी ने इंडिया एआई समिट में गो2 नामक चीनी रोबोट को अपना आविष्कार बताने की कोशिश की, लेकिन असली शर्मनाक बात यह है कि सरकारी चैनल डीडी न्यूज ने उन का पूरा प्रचार किया. आज डीडी न्यूज और भाजपा एकजैसे हैं. यह चैनल भाजपा का प्रचार माध्यम बन गया है.’
‘‘सही कहूं तो यह मुद्दा बहुत ज्यादा बड़ा बन गया था, जिस से इस एआई समिट की साख को बहुत बड़ा धक्का लगा है,’’ अनामिका बोली.
‘‘पर एक विवाद तो कांग्रेस ने भी खड़ा किया. सुना है कि समिट में कांग्रेस के लोगों ने खूब हंगामा किया था? क्या था पूरा मामला?’’ विजय ने पूछा.
अनामिका ने बताया,
‘‘शुक्रवार, 20 फरवरी को समिट में उस समय अफरातफरी मच गई थी, जब यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने वहां जम कर विरोध प्रदर्शन किया. जानकारी के मुताबिक, कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा घेरे को तोड़ कर अंदर प्रवेश किया और नारेबाजी की.
‘‘विरोध प्रदर्शन का जो वीडियो सामने आया, उस में साफ देखा गया कि प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टीशर्ट उतार कर विरोध जता रहे थे. इन लोगों ने इस समिट, 2026 की आलोचना भी की और पीएम मोदी पर अमेरिका से ट्रेड डील पर ‘सम?ाता’ करने का आरोप भी लगाया.
‘‘एक बयान में इंडियन यूथ कांग्रेस ने कहा कि उस के कार्यकर्ता एआई समिट में देश की पहचान से सम?ाता करने वाले प्रधानमंत्री के खिलाफ विरोध कर रहे थे. बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया.’’
‘‘अमेरिका की ट्रेड डील से इस एआई समिट का क्या लेनादेना?’’ ‘‘इंडियन यूथ कांग्रेस के एक औफिशियल पोस्ट में कहा गया कि इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एआई समिट में देश की पहचान से सम?ाता करने वाले प्रधानमंत्री के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और प्रोटैस्ट किया.
‘‘यह विरोध कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस बयान के बाद हुआ, जिस में उन्होंने समिट के और्गैनाइजेशन को ले कर सरकार पर हमला किया था. उन्होंने कहा था कि भारत के टैलेंट और डाटा का फायदा उठाने के बजाय, एआई समिट एक बेतरतीब तमाशा है… भारतीय डाटा बिक्री के लिए है, चीनी प्रोडक्ट दिखाए जा रहे हैं.
‘‘कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी एआई समिट में अव्यवस्था का आरोप लगाया था और दावा किया था कि जो भारत के लिए एक ‘शोपीस’ इवैंट हो सकता था, वह ‘पूरी तरह से अव्यवस्था’ में बदल गया.
‘‘मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह भी दावा किया कि खाने और पानी जैसी बेसिक सुविधाओं की कमी के कारण विजिटर्स और एग्जिबिटर्स दोनों को ‘बहुत ज्यादा परेशानी’ का सामना करना पड़ रहा है.
‘‘समिट में जिस समय कांग्रेस यूथ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया उस समय एआई समिट में तमाम दिग्गज और प्रतिनिधि मौजूद थे. यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता पोस्टरबैनर ले कर अंदर पहुंच गए थे.’’
‘‘पर सरकार तो इसे कामयाब समिट बता रही है. ऐसा क्यों? कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर सरकार का क्या कहना है?’’ विजय के पापा ने पूछा.
‘‘अंकल, वे लोग तो भड़के हुए थे. भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के इस प्रदर्शन को ‘स्टुपिडिटी टू न्यूडिटी’ (मूर्खता से नग्नता) तक का सफर बताया. उन्होंने कहा कि यह देश की उपलब्धियों का अपमान है. वहीं, शहजाद पूनावाला ने इस प्रदर्शन को ‘एंटी इंडिया’ और ‘चरित्रहीन’ करार दिया. भाजपाई समर्थित कई संगठनों ने कांग्रेस के विरोध में खूब प्रदर्शन किए.
‘‘और जहां तक इस समिट के कामयाब होने की बात है, तो भारत सरकार के मुताबिक, ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ अब तक का सब से बड़ा एआई समिट था. ब्रिटेन, साउथ कोरिया और फ्रांस में यह समिट होने के बाद, पहली बार ‘ग्लोबल साउथ’ के किसी देश में यह समिट हुआ.
‘‘21 फरवरी को 88 देशों और अंतराष्ट्रीय संगठनों ने नई दिल्ली एआई इम्पैक्ट समिट डिक्लेरेशन का समर्थन किया. इन में अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, जरमनी और यूरोपियन यूनियन शामिल हैं.
‘‘समिट के दौरान भारत के 3 एआई मौडल को भी लौंच किया गया. इन 3 मौडल के नाम हैं– सर्वम, ज्ञानी और भारतजेन. इन मौडल्स का फोकस भारत की भाषाओं के इस्तेमाल पर था.
‘‘साथ ही, समिट के दौरान कई कंपनियों ने भारत में आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस में निवेश करने के वादे भी किए. इस में रिलायंस, माइक्रोसौफ्ट, गूगल जैसी कई कंपनियां शामिल हैं.’’ ‘‘मुझे लगता है कि जब कोई इतना बड़ा समिट होता है, तो वहां विवाद भी होते हैं. पर इस तरह के समिट के होते ही किसी तरह के फैसले पर नहीं पहुंचना चाहिए. कुछ समय देना चाहिए कि समिट में जोकुछ हुआ, उस का नतीजा क्या रंग लाएगा.
‘‘तकनीक से फायदा नुकसान दोनों होता है. यह तो उस को इस्तेमाल करने वाले पर निर्भर करता है कि वह आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस जैसी तकनीक को किस तरह से अपनी जिंदगी में उतारता है,’’ विजय ने कहा. ‘‘एकदम सही कहा. तकनीक दोधारी तलवार की तरह होती है. इस का इस्तेमाल सोचसम?ा कर करना चाहिए,’’ अनामिका ने हां में हां मिलाई, ‘‘चलो, हम ने खूब बहस कर ली अब तुम मु?ो कौफी पिलाओ. बाद में होली पर भी डिस्कस कर लेंगे.’’
‘‘क्यों नहीं. अब कोई रोबोट डौग तो हमारे लिए यहां कौफी लाएगा नहीं,’’ विजय का इतना कहते ही अनामिका खिलखिला कर हंस पड़ी. ‘‘तुम दोनों बैठो, आज कौफी मैं बनाता हूं,’’ विजय के पापा ने कहा तो मम्मी हैरान थीं यह सुन कर.




