Bhojpuri Star: कबड्डी की स्टेट चैंपियन रह चुकी अपर्णा मलिक ने अपने कैरियर की शुरुआत साउथ फिल्म इंडस्ट्री से की, जहां उन्होंने तेलुगु फिल्मों में काम कर अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. इस के बाद उन्होंने भोजपुरी सिनेमा की ओर रुख किया और यहां भी अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों के दिलों में जगह बना ली.
पटना में आयोजित 7वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स शो के दौरान अपर्णा मलिक से हुई खास मुलाकात में उन्होंने खुल कर बात की. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश :
कबड्डी की स्टेट चैंपियन से एक्ट्रेस बनने तक, यह ट्रांजिशन कितना फिल्मी रहा?
स्पोर्ट्स बैकग्राउंड होने का बहुत फायदा मिला है. इस से मेरे अंदर हमेशा स्पोर्ट्स स्पिरिट बनी रहती है, जिस से हैल्दी कंपीटिशन की भावना आती है.
क्या आप किसी फिल्म में स्पोर्ट्स गर्ल का रोल करना चाहेंगी?
मैं आप को बताना चाहूंगी कि मेरी एक फिल्म आने वाली है, जिस का नाम है ‘धाकड़ सास’ जिस में स्पोर्ट्स गर्ल न होते हुए गांव की सीधीसादी लड़की कैसे एक बौक्सिंग चैंपियन बनती है, यह देखने को मिलेगी. मेरी एक तेलुगु फिल्म जो अभी जल्दी ही थिएटर में रिलीज हुई है, ‘वन/4’ जिस में मैं स्विमर बनी हूं, इसलिए मेरी यह हसरत बहुत कम समय में ही पूरी हो चुकी है.
अररिया से सिनेमा तक का सफर, सब से टफ मोमैंट कौन सा था?
अररिया से सिनेमा तक आने का सफर की अगर बात करूं तो मेरा सब से टफ मोमैंट लोगों को सम?ाना रहा क्योंकि अररिया एक छोटी सिटी है. वहां पर लोगों की सोच अभी उतनी विकसित नहीं है कि वे इस चीज को एक्सैप्ट करें कि लड़कियां यहां से निकल के बाहर जा कर या विदेश में जा कर पढ़ाई भी करें, तो फिर सिनेमा जगत में आना तो उन के लिए बहुत बड़ी बात हो जाती है.
आप का पहला आडिशन कैसा गया था?
पहला आडिशन मेरी जिंदगी का बेहद खास अनुभव था. मैं ने उस आडिशन को बहुत ही ध्यान से तैयार किया, 3-4 बार रिकौर्ड किया, अलगअलग स्टेट्स में शूट किया और जब लगा कि यह बिलकुल नैचुरल
और संतोषजनक है, तभी फाइनल वीडियो भेजा. मेरा वह आडिशन बहुत पसंद किया गया. इस के बाद मेरा लुक टैस्ट हुआ, फिर फोटोशूट हुआ और आखिर में मु?ो तेलुगु फिल्म ‘डैडलाइन’ औफर हुई.
क्या ग्लैमरस दिखना इंडस्ट्री की जरूरत है या पर्सनल चौइस?
हर किसी के लिए ग्लैमर की परिभाषा अलग होती है. कई बार लोगों के चेहरे पर ही एक नैचुरल ग्लैमरस लुक होता है, जो उन्हें सब से अलग बनाता है. मेरे हिसाब से ग्लैमरस दिखने के लिए सबसे जरूरी चीज है, आप का कौन्फिडैंस और आप का एटीट्यूड. अगर आप के अंदर खुद को कैरी करने का आत्मविश्वास है, तो वही असली ग्लैमर है.
क्या आप को लगता है कि आज की हीरोइन को ज्यादा बोल्ड होना पड़ता है?
मेरे हिसाब से बोल्ड होने का मतलब है कि आप अपने लिए खड़े हो सकें, अपनी बात खुल कर रख सकें और गलत के खिलाफ आवाज उठा सकें. अगर आप के साथ या किसी और के साथ कुछ गलत हो रहा है और आप उस के खिलाफ बोल पा रहे हैं, तो वही असली बोल्डनैस है, इसलिए मु?ो लगता है कि सिर्फ हीरोइन को ही नहीं, बल्कि हर महिला को बोल्ड होना चाहिए. हर किसी को अपने हक के लिए खड़ा होना आना चाहिए.
आप का दिल जीतने के लिए किसी में क्या क्वालिटी होनी चाहिए?
हमेशा से सादगी बहुत पसंद है. मेरे लिए सब से जरूरी है कि इनसान दिल का सच्चा हो, अच्छा हो और सम्मान देना जानता हो. अगर किसी में ये गुण हैं, तो मेरे दिल को जीतने के लिए इतना ही काफी है.
इंस्टाग्राम पर फेमस होना कितना चैलेंजिंग है?
आज के समय में इंस्टाग्राम पर फेमस होना काफी चैलेंजिंग हो गया है. कई बार ऐसा लगता है कि वहां
फेमस होने के लिए लोगों को बहुत ‘ओवर द टौप’ जा कर काम करना पड़ता है... ज्यादा एक्सप्रैसिव होना, कभीकभी जरूरत से ज्यादा ओवर एक्टिंग करना. मैं ने कई ऐसे कलाकारों को देखा है, जो सिर्फ फेमस होने के लिए इस तरह के तरीके अपनाते हैं. लेकिन मेरे हिसाब से ये चीजें ज्यादा समय तक टिकती नहीं हैं. जो चीजें जल्दी वायरल होती हैं, उन का असर भी उतनी ही जल्दी खत्म हो जाता है, जैसे वायरल फीवर कुछ दिनों में उतर जाता है.
फैंस के कमैंट्स आप को मोटिवेट करते हैं या प्रैशर देते हैं?
मेरे इंस्टाग्राम और बाकी सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर हमेशा फैंस का बहुत प्यार और सपोर्ट मिलता है. उन के कमैंट्स प्रैशर नहीं देते, बल्कि और ज्यादा मोटिवेट करते हैं. उन का यही प्यार और सपोर्टो हर दिन बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है.
क्या कभी भोजपुरी के किसी कोस्टार ने आप को सरप्राइज किया?
मेरा पहला काम जब पवन सिंह के साथ आया, तो मैं ने उन के बारे में पहले काफीकुछ सुन रखा था, इसलिए थोड़ा सा संशय था. लेकिन जब मैं ने उन के साथ काम किया, तो मेरा अनुभव बिलकुल अलग और बेहद पौजिटिव रहा. वे बहुत ही स्वीट, डीसैंट और सहयोगी इनसान हैं. इसी तरह, खेसारीलाल यादव के बारे में भी लोगों से कई तरह की बातें सुनने को मिली थीं, लेकिन जब मैं ने उनके साथ काम किया, तो लगा ही नहीं कि वे वैसे हैं जैसा अकसर कहा जाता है. वे बहुत ही सरल, विनम्र और सहयोगी हैं.
आप को साउथ और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में सब से बड़ा फर्क क्या लगा?
साउथ फिल्म इंडस्ट्री आज के समय में बहुत बड़ी हो चुकी है और कई मामलों में इंटरनैशनल लैवल तक पहुंच चुकी है. वहीं भोजपुरी इंडस्ट्री में अभी बहुत संभावनाएं हैं और आगे बढ़ने की काफी गुंजाइश है. हालांकि, एक चीज जो दोनों इंडस्ट्री में समान लगी, वह है अपनापन. दोनों ही जगह लोगों का बरताव बहुत ही सहयोगी और आत्मीय होता है. मेरा एक सपना यह भी है कि मैं मलयालम फिल्मों में काम करूं. अभी तक वहां काम करने का मौका नहीं मिला है, लेकिन अगर सबकुछ अच्छा रहा, तो मैं जरूर मलयालम इंडस्ट्री का हिस्सा बनना चाहूंगी.
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