Special Story. लव मैरिज करने वालों को एक लाइन बहुत पसंद आती है कि ‘प्यार किया तो डरना क्या’. बात सही है, पर जब यह प्यार शादी में बदलता है तो यही लाइन कुछ इस तरह बदल जाती है कि प्यार किया है तो कमाना है.
होता यह है कि बहुत से जोड़े जब प्यार में होते हैं, तो अपने परिवार वालों से अलग, किसी अलग जगह पर रहने की ठान कर शादी कर लेते हैं, पर जब पेट भरने की बात आती है, तो उन के पास प्लान नाम की कोई चीज नहीं होती है.
समस्तीपुर के मनोज और प्रिया ने भी लवमैरिज की थी. मनोज की उम्र 23 साल थी और प्रिया की 21. चूंकि दोनों के घर वाले इस शादी के खिलाफ थे, तो उन्होंने दिल्ली आ कर अपनी जिंदगी की शुरुआत की.
शादी के पहले 6 महीने तो मनोज और प्रिया ने दिल्ली के उत्तम नगर में वन बैडरूम फ्लैट में जैसेतैसे गुजार दिए, फिर मनोज को अक्ल आई कि वह प्रिया को अपने भरोसे दिल्ली लाया था, तो अब उस के लिए ऐसी कमाई भी तो होनी चाहिए, जिस में महीने के महीने पैसा आता रहे, पर एक कड़वा सच यह भी था कि समाज की तरह प्रिया भी मनोज से ‘सैटल्ड’ होने की उम्मीद करने लगी थी.
वैसे भी हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 24 कहती है कि पति को पत्नी और बच्चों का भरणपोषण करना है. कमाई नहीं है तो कोर्ट भी तुम से ही सवाल करेगा.
पर जब पत्नी ही पति को उस की आमदनी के लिए कठघरे में खड़ा करने लगे, तो हालात और बुरे हो जाते हैं. ऐसा ही मनोज के साथ हुआ. प्रिया ने घर संभालने की बात कह कर रोजगार से पल्ला झाड़ लिया.
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