Emotional Hindi Story. रात के 11 बजे थे. शहर की चमकती सड़कों पर नियौन लाइटें ऐसे झिलमिला रही थीं मानो अंधेरे की देह पर किसी ने रंगीन कांच टांक दिए हों. रेलवे स्टेशन के सामने बने छोटे से होटल ‘सिल्वर पाम’ की तीसरी मंजिल पर बैठा राघव खिड़की से बाहर झांक रहा था. नीचे टैक्सियों की कतार थी, ऊपर आसमान में धुंध और भीतर उस के मन में एक अजीब खालीपन.
राघव राजस्थान के छोटे कसबे से पहली बार महानगर आया था. गांव के लोगों ने कहा था कि ‘मुंबई आदमी को या तो सोना बना देती है या धुआं’.
राघव पर्यटन कंपनी में नौकरी करता था. उस का काम बाहर से आने वाले पर्यटकों को शहर घुमाना था. दिनभर वह विदेशी सैलानियों को समुद्र, गेटवे औफ इंडिया, फिल्मी सितारों के बंगले और चमचमाते बाजार दिखाता, मगर रात होते ही शहर का दूसरा चेहरा सामने आ जाता.
उस रात कंपनी के मालिक ने कहा, ‘‘कुछ विदेशी मेहमान हैं, उन्हें नाइट लाइफ भी दिखानी पड़ेगी.’’
https://youtube.com/shorts/HIz11wLYCJE?si=Z9PZa0hR_uHiz9-p
राघव झिझका. वह संस्कारों में पला लड़का था पर नौकरी की मजबूरी लोहे की बेड़ी होती है, चलना पड़ता है. वे लोग एक बार में पहुंचे. बाहर बड़े अक्षरों में लिखा था ‘मूनलाइट क्लब’. भीतर धुएं, शराब और तेज संगीत का ऐसा घालमेल था कि आदमी अपने विचार तक सुन न सके. मंच पर लड़कियां नाच रही थीं. चमकते कपड़े, बनावटी मुसकान और आंखों में थकान का गहरा समंदर.
राघव की नजर एक लड़की पर जा कर ठहर गई. उस का चेहरा बाकी लड़कियों से अलग था. नाचते हुए भी उस में एक उदासी थी, जैसे किसी ने चिडि़या के पंखों पर ग्लिटर तो लगा दिया हो, मगर उड़ान छीन ली हो.
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