Story in Hindi. बात उन दिनों की है, जब मैं डाक्टरी के पेशे में नयानया आया था. शाम के 5 बजे एक खूबसूरत लड़की एक अधेड़ उम्र की औरत के साथ मेरे क्लिनिक में आई. उस औरत की गोद में एक छोटा बच्चा भी था.

बातचीत के दौरान उस अधेड़ औरत से पता चला कि वह हमारे महल्ले में रहने वाली किसी औरत की बहिन है, जिसे मैं जानता था, पर उस से मेरी बातें नहीं होती थीं.

लड़की का रंग बहुत गोरा तो नहीं था, लेकिन चेहरे की बनावट, नाक में छोटी सी नथ, बांह पर चांदी का कड़ा, कपड़े और लिपस्टिक तो उस पर ऐसे फब रहे थे, मानो उसे किसी फिल्म के मेकअप आर्टिस्ट ने सजाया हो. उसे देख कर किसी भी नौजवान का दिल फिसल सकता था. मैं ने उसे देखा तो देखता ही रह गया.

वह लड़की झेंपते हुए बोली, ‘‘डाक्टर साहब, आप इस तरह क्या देख रहे हैं?’’

उस की सवालिया नजरों से मैं सहम गया और हड़बड़ाहट में कहा, ‘‘कुछ… कुछ नहीं… हां, आप की नथ आप पर खूब जंच रही है.’’

यह सुन कर वह लड़की मुसकराने लगी. मैं ने डाक्टरी अंदाज में पूछा, ‘‘कहिए, क्या हुआ है आप को?’’

अभी वह लड़की कुछ कह पाती, इस से पहले ही मैं ने उसे अपने पास वाली कुरसी पर बैठने का इशारा किया.

मैं ने उस की परेशानी सुनी और कुछ देर तक उस का चैकअप किया. इस के बाद कुछ दवाएं लिख दीं, साथ में कुछ परहेज भी बता कर 5 दिन बाद आने को कहा.

वह लड़की 5 दिन बाद आई. उस के चेहरे से गुलाब जैसी ताजगी झलक रही थी. आज उस के साथ वह अधेड़ औरत नहीं आई थी. लेकिन यह क्या, उस की गोद में वही बच्चा खेल रहा था.

मैं ने पूछा, ‘‘आप का नाम क्या है? क्या यह आप का बच्चा है?’’

उस लड़की ने कहा, ‘‘मेरा नाम नाहिदा है. अभी मेरी शादी को कुछ दिन ही हुए हैं. यह मेरा पहला बच्चा है.’’

यह सुन कर मुझे ऐसा लगा, मानो किसी ने मेरे अरमानों पर पानी फेर दिया हो. मैं थोड़ा संभला और कहा, ‘‘आइए, आप का चैकअप कर लूं.’’

मैं ने चैकअप करने के बाद कहा, ‘‘अब आप बिलकुल ठीक हैं. थोड़ा परहेज करना, तलीभुनी चीजें व मिर्चमसाले का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना और जब कभी आप को कोई तकलीफ हो, तो आ जाना.’’

‘जी अच्छा’ कह कर नाहिदा उठी और मैं दूसरे मरीजों को देखने लगा.

एक महीना गुजर जाने के बाद अचानक नाहिदा मेरे पास आई और बोली, ‘‘सलाम डाक्टर भैया.’’

यह सुन कर मैं सकते में रह गया. फिर मैं ने कहा, ‘‘कहो नाहिदा, कैसे आना हुआ? सब खैरियत तो है न?’’

उस ने मुसकरा कर कहा, ‘‘वैसे तो सब ठीक ही है, पर देखिए न भैया, ये हमें भद्दी और बदसूरत कहते हैं. क्या हमारा फिगर बोल्ड और खूबसूरत नहीं हो सकता?’’

नाहिदा की बातें सुन कर मैं मुसकराने लगा और दिलासा देते हुए बोला, ‘‘घबराओ नहीं. तुम्हारी परेशानी का हल है मेरे पास.’’

मेरा इतना कहना था कि नाहिदा को मानो दुनिया की सब से बेशकीमती चीज मिल गई हो.

देखते ही देखते कुछ महीनों में ही नाहिदा और भी खूबसूरत लगने लगी. इस दौरान वह मेरे दिल के और भी करीब आ गई.

वह जब भी मेरे सामने आती, मैं उसे ललचाई नजरों से देखता. मन कहता, ‘काश, यह मेरी दुलहन बन कर हमारे घर आती, तो कितना अच्छा होता.’

लेकिन मैं कैसे अपनी मुहब्बत का इजहार करता, अब तो हमारा रिश्ता भी भाईबहिन का था.

नाहिदा का शौहर भी कई बार मुझ  से मिल चुका था. मैं उस के घर भी जा चुका था.

वक्त गुजरता गया. हमारी मुलाकात को 4 साल हो चुके थे. इस बीच उस ने अपनी और अपने शौहर की बहुत सी अच्छीबुरी बातें मुझे  बताईं, जो आज भी मेरे सीने में दफन हैं.

मैं सोचता हूं कि पढ़ीलिखी होने के बावजूद नाहिदा ने लफंगे मंसूर मियां से कैसे शादी कर ली? लेकिन यह बात भी मुझ से छिपी नहीं थी. शायद जवानी के जोश में हर लड़केलड़की को कहीं न कहीं एक बार ठोकर खानी ही पड़ती है.

नाहिदा भी उसी ठोकर की मारी थी. लेकिन उस का शौहर औरों के लिए जैसा भी हो, नाहिदा और अपने बच्चे को अपनी जान से भी ज्यादा चाहता था.

समय के साथ सबकुछ ठीकठाक चल रहा था. नाहिदा को जब मेरी जरूरत होती, एक बार फोन की घंटी घनघना देती थी. मैं फोन पर ही दवा लिखवा देता था.

नाहिदा जब भी मुझ  से मिलने आती, काफी सजधज कर आती. बाहर निकलते समय सजनासंवरना उस की आदतों में शुमार था. बाली, चूडि़यां, बिंदी और चप्पलों के रंग देख कर तो मैं दंग ही रह जाता था.

आज सुबह से ही मेरे मन में अजीब सी बेचैनी थी. मैं ने आखिरकार यह फैसला ले लिया कि आज नाहिदा से अपने मन की बातें कह दूंगा. फिर चाहे रिश्ता रहे या न रहे, परवाह नहीं.

दोपहर की तेज धूप में मैं जिस्म को तपाता, पसीने से तरबतर अचानक उस के घर जा पहुंचा और अपनी आदत के मुताबिक बिना संकोच किए जैसे ही दरवाजे को धक्का दिया, वह खुल गया और मैं नाहिदा के बैडरूम में जा कर खड़ा हो गया.

पर यह क्या? वहां जो नजारा मुझे  देखने को मिला, शायद मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था.

नाहिदा एक जालीदार नाइटी पहने हुए बैठी थी. उस के साथ चिपक कर एक नौजवान ठीक ऐसे बैठा था, मानो मंसूर मियां हो.

मेरे अचानक वहां पहुंच जाने पर नाहिदा के होश उड़ गए. उस ने हकलाते हुए कहा, ‘‘भैया आप? अचानक? क्या दरवाजा खुला था?’’

मैं ने कहा, ‘‘हां, तभी तो मैं अंदर आया.’’

यह सुनते ही नाहिदा की जबान से निकल पड़ा, ‘‘लगता है कि मैं कुंडी लगाना भूल गई थी.’’

मुझे देख कर वह नौजवान दूसरे कमरे में चला गया, जो ठीक नाहिदा के बैडरूम के सामने था.

मैं ने नाहिदा से पूछा, ‘‘क्या मंसूर मियां यहां नहीं हैं?’’

वह बोली, ‘‘नहीं, वे किसी काम से कोलकाता गए हुए हैं.’’

अब मुझे यह साफ समझ आ रहा था कि नाहिदा कितनी गिरी हुई औरत है, जो अपने शौहर की गैरमौजूदगी में जम कर फायदा उठाना जानती है.

मैं ने पलंग पर पड़ी चादर उस के ऊपर फेंकते हुए जिस्म को ढकने का इशारा किया और उस के बैडरूम से बाहर निकल आया.

वह कहने लगी, ‘‘बैठिए न भैया, अभी तो आप आए हैं.’’

यह सुन कर मानो मेरे खून में उबाल आ गया. मैं ने उसे एक तमाचा जड़ दिया. वह खड़ी मेरा मुंह देखती रह गई.

नाहिदा अपनी सफाई में कुछ कह पाती, उस से पहले ही मैं उस पर बरस पड़ा, ‘‘नाहिदा, तुम इतना गिर सकती हो, यह मैं सोच भी नहीं सकता था. जो औरत अपने शौहर के साथ इतना बड़ा धोखा कर सकती है, वह दूसरे के चलतेफिरते जमीनी रिश्ते को क्या समझेगी? मैं तो फिर भी तुम्हारा मुंहबोला भाई ठहरा. खैर, आइंदा तुम मुझ  से मिलने की कोशिश मत करना,’’ ऐसा कह कर मैं वहां से निकल पड़ा.

अब मुझे  एहसास हो रहा था कि मैं रंगरंगीली दुनिया के पीछे भाग रहा था. नाहिदा के बारे में सोचतेसोचते मैं कब सो गया, पता ही नहीं चला.

अगले दिन जब मेरी आंख खुली, तो सुबह के 6 बज चुके थे. सूरज की किरणें रोशनी बिखेर चुकी थीं. मेरी जिंदगी का ‘नया सवेरा’ हो चुका था. Story in Hindi

-डा. एसएम अजहर हुसैन

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