Emotional Hindi Story. दरवाजा खुला था. कविता अंदर आई, पंखा चालू किया और कुरसी पर बैठ गई. उस के बदन को पंखे की ठंडी हवा से राहत महसूस हुई. तभी मां ने करीब आ कर पूछा, ‘‘अरे कविता, तू कब आई?’’
‘‘अभी आई हूं,’’ कविता की आवाज भी थकीथकी सी थी. ‘‘तुम मुंहहाथ धो लो, मैं चाय बनाती हूं,’’ यह कहती हुई मां अंदर चली गईं.
चाय पीने से कविता की थकान और सुस्ती भागती हुई नजर आई. बिस्तर पर लेट कर उस ने बदन को ढीला छोड़ दिया और आंखें मूंद लीं.
अचानक कविता की यादों में माधव का चेहरा उभर आया. उसे वह पल याद आया, जब माधव ने उसे बांहों में जकड़ लिया था. एक पल के लिए उसे अनोखे सुख का एहसास हुआ, लेकिन तभी उस ने वह खयाल दिमाग से झटक दिया.
कविता अपनेआप को कोसने लगी. उसे ऐसा लग रहा था, मानो कोई बहुत गलत काम किया हो. अपनी खुदगर्जी के लिए घर वालों को दुख देना उसे कतई मंजूर नहीं था, क्योंकि वह घर की एकलौती कमाने वाली थी.
कविता एक अस्पताल में नर्स थी. पिछले साल उस की शादी हुई थी, लेकिन शायद कुदरत को उस का सुख रास नहीं आया. शादी को अभी 15 दिन भी नहीं हुए थे कि एक हादसे में उस के पति की मौत हो गई.
‘अशुभ’ मान कर ससुराल वालों ने कविता को निकाल दिया. रोतीपीटती वह मायके लौट आई.
कविता के पिता दिल के मरीज थे. कविता की शादी के लिए उन्होंने बहुत पैसा खर्च किया था. अपनी औलाद के साथ हुए हादसे को वे सह न सके और एक रात चल बसे.
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