Short Hindi Story. रात के 11 बज रहे थे. ट्रेन कानपुर स्टेशन पर आ कर रुकी. सभी मुसाफिर अपनीअपनी बर्थ पर अलसाए हुए से पड़े थे. मैं एक किताब में दिलचस्प कहानी पढ़ रहा था और इच्छा थी कि उसे खत्म कर के ही सोऊं.
तभी एक लड़की हमारी बोगी में आई. वह मेरी बर्थ के पास आ कर कुछ देर खड़ी रही, फिर उस के रोने की हलकी सी आवाज आई. मैं ने उसे हैरानी से देखा. वह अपने रूमाल से आंसू पोंछ रही थी.
मैं न चाहते हुए भी उसे देखता रहा. वह मुझ से बोली, ‘‘क्या मैं यहां बैठ जाऊं?’’ मैं सोच में पड़ गया और कुछ देर बाद बोला, ‘‘हां, बैठ जाओ.’’
मैं ने अपने पैरों को समेट लिया. मैं ने पूछा, ‘‘कहां जाना है आप को?’’ ‘‘पटना.’’
वह लड़की तकरीबन 20 साल की होगी. कुछ देर बाद मैं आप से तुम पर आ गया था.
‘‘तुम रो क्यों रही हो?’’ मैं ने पूछा. ‘‘मां की तबीयत ठीक नहीं है.’’
‘‘क्या हुआ उन्हें?’’ मैं ने पूछा. ‘‘पता नहीं.’’
उस लड़की की आंखों से फिर आंसू गिरने लगे थे. वह बताने लगी, ‘‘कल शाम को पापा का फोन आया था. उन्होंने कहा था, ‘तुम्हारी मां की तबीयत बहुत खराब है’.’’
‘‘तुम ने पूछा नहीं कि उन्हें क्या हुआ है?’’ मैं ने पूछा. वह बोली, ‘‘पापा ने मुझ से कहा था कि तुम्हारी मां की इच्छा है कि तुम जल्दी से उन के पास चली आओ.
‘‘मैं ने उसी समय अपना थोड़ाबहुत सामान समेटा और चली आई.’’ ‘‘तुम यहां क्या करती हो?’’
‘‘मैं यहां एमए कर रही हूं.’’ ‘‘किस सबजैक्ट में?’’ ‘‘अंगरेजी में.’’
मैं कुछ देर तक सोचता रहा. रात के तकरीबन डेढ़ बज रहे थे. पूरी बोगी में हम दोनों ही ऐसे थे, जो जाग रहे थे.
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