Crime Story in Hindi. दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी. सौम्या उस समय घर में अकेली थी. उस का पति करन दफ्तर जा चुका था.
सौम्या ने जब दरवाजा खोला, तो बाहर खड़े शख्स को देख कर वह चौंक पड़ी, ‘‘अरे, आप...’’ ‘‘अंदर आने के लिए नहीं कहेंगी,’’ बाहर खड़े नौजवान ने मुसकरा कर कहा. ‘‘मैं तो भूल ही गई. आइए, अंदर आइए,’’ वह झेपते हुए बोली.
वह नौजवान, जिस के बदन पर कीमती सूट था और बाएं हाथ की 2 उंगलियों में हीरे की अंगूठियां थीं, अंदर आ कर एक कुरसी पर बैठ गया.
‘‘आप कितने दिनों बाद आए हैं. लगता है, आप को हमारी याद ही नहीं आती,’’ सौम्या शिकायत करने लगी.
‘‘ऐसी बात नहीं है भाभीजी...’’ वह नौजवान बोला, ‘‘दरअसल, आप को तो मालूम है कि बाबूजी की मौत के बाद घर और कारोबार की सारी जिम्मेदारी मुझे ही संभालनी पड़ती है.’’ ‘‘मैं आप के लिए चाय बना कर लाती हूं,’’ सौम्या ने कहा.
कुछ देर बाद सौम्या नमकीन और चाय ले कर आ गई.
‘‘करन तो ड्यूटी पर गया होगा?’’ उस नौजवान ने पूछा. ‘‘हां,’’ सौम्या ने उसे चाय का कप पकड़ाते हुए कहा.
‘‘उस से तो मुलाकात हो ही नहीं पाती. काम में मसरूफ रहता हूं. आज दफ्तर मेें ज्यादा काम नहीं था, इसलिए उसे जल्दी निबटा कर यहां आ गया.’’ ‘‘आप रविवार को आइए, करन घर में ही मिलेंगे.’’
इधरउधर की बातें कर के उस नौजवान ने अपने कोट की जेब से एक अंगूठी निकाली और सौम्या की तरफ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘मेरी तरफ से यह अंगूठी आप के लिए...’’
सौम्या ने खूब मना किया, पर वह नौजवान अंगूठी दे कर ही माना.
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