Superstition: भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में काफी तरक्की की है. जहां देश ने चांद पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में कामयाबी पाई है, वहीं एआई, रोबोट तकनीकी और पेट से न होने की समस्या से जूझ रही औरतों के लिए संतान पाने के इलाज के नए और सफल तरीके भी ईजाद हुए हैं.
आज मैडिकल के क्षेत्र में इलाज के कई नए तरीके मौजूद हैं, जिन की मदद से सालों से बच्चे का इंतजार कर रहे दंपतियों को भी मातापिता बनने में मदद मिल रही है.
इस सब के बावजूद भारत के हजारों गांवों, कसबों और छोटे शहरों में आज भी बच्चा न होने पर सब से पहले औरत को ही दोष दिया जाता है. डाक्टर से इलाज कराने के बजाय उसे ओझा, तांत्रिक या झाड़फूंक करने वाले बाबा के पास ले जाया जाता है. यहीं से उस की परेशानी शुरू होती है. कई बार इस के नाम पर पैसे ठग लिए जाते हैं, औरत के साथ गलत हरकत होती है, उस की बदनामी होती है और कभीकभी तो उस की जान तक चली जाती है.
दुख की बात यह है कि ऐसी घटनाओं को अकसर सिर्फ अंधविश्वास कह कर छोड़ दिया जाता है. औरतों के साथ होने वाला यह अपराध केवल झाड़फूंक और शोषण से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह उस दकियानूसी सोच की कहानी है, जिस ने आज भी औरत की पहचान को उसकी कोख से जोड़ रखा है. शादी के कुछ साल बाद अगर संतान न हो तो परिवार, रिश्तेदार और समाज की उंगलियां सब से पहले औरत की ओर उठती हैं. उस के दर्द से पहले उस के चालचलन, नसीब और जिस्म का फैसला सुना दिया जाता है. यही सामाजिक दबाव उसे उन लोगों के सामने असहाय बना देता है जो धर्म, आस्था और चमत्कार के नाम पर अपराध का कारोबार चलाते हैं.
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