Interesting Fact. आज हर घर में शैंपू का इस्तेमाल होता है, लेकिन शायद ही किसी को पता हो कि शैंपू शब्द की जड़ें बिहार के पटना से जुड़ी हैं. यह कहानी है शेख दीन मोहम्मद की जो दुनिया का पहला शैंपू मैन तो था ही साथ ही वह भारत का पहला अंगरेजी लेखक भी था जिस ने ब्रिटेन का पहला भारतीय रैस्टोरैंट भी खोला था.

साल 1759 में पटना में जनमे दीन मोहम्मद का बचपन आसान नहीं था. यह वह दौर था जब बिहार, बंगाल रैजिडैंसी का एक सूबा था, जिस पर ईस्ट इंडिया कंपनी राज करती थी. कम उम्र में ही दीन मोहम्मद के पिता की मौत हो गई. अब्बा की मौत के बाद दीन मोहम्मद ने ईस्ट इंडिया कंपनी की बंगाल सेना में काम किया और सेना में रह कर उन्होंने भारत के कई हिस्सों की यात्रा की. इन्हीं यात्राओं ने दीन मोहम्मद के भीतर दुनिया को देखने और कुछ नया करने की इच्छा पैदा की.

1780 में दीन मोहम्मद आयरलैंड पहुंचे. इस वक्त तक वे कुछकुछ अंगरेजी सीख चुके थे. आयरलैंड में उन की मुलाकात एक आयरिश लड़की जेन डेली से हुई. दोनों एकदूसरे से प्यार करने लगे, लेकिन यह प्यार आसान नहीं था. उस समय का आयरलैंड आज के भारत से अलग नहीं था. प्यार या पसंद तो दूर की बात थी, लड़की अपनी मरजी के कपड़े तक नहीं पहन सकती थी. एक भारतीय मुसलिम लड़के और एक आयरिश प्रोटैस्टैंट लड़की की शादी मुश्किल थी. जेनी का परिवार और समाज दोनों इस रिश्ते के खिलाफ थे, फिर भी दोनों ने परवाह नहीं की और शादी कर ली.

आयरलैंड में रहते हुए दीन मोहम्मद ने अंगरेजी पर पकड़ और मजबूत की. फिर 1794 में उन्होंने अपनी किताब ‘द ट्रैवल्स औफ दीन महोमैट’ प्रकाशित की. यह किसी भारतीय द्वारा अंगरेजी में लिखी और पब्लिश की गई पहली किताब थी. इस में उन्होंने भारत, भारतीय समाज, शहरों और अपने अनुभवों का जिक्र किया. उस समय यूरोप के लोगों ने पहली बार भारत को एक भारतीय की नजर से पढ़ा.

1810 में लंदन पहुंच कर दीन मोहम्मद ने दूसरा इतिहास रचा. उन्होंने ‘हिंदोस्तानी कौफी हाउस’ नाम से ब्रिटेन का पहला भारतीय रैस्टोरैंट खोला और इस तरह दीन मोहम्मद ने ब्रिटेन के आम लोगों को पहली बार भारतीय भोजन से परिचित कराया. हालांकि यह बिजनैस ज्यादा समय तक नहीं चल पाया और बंद हो गया.

लेकिन दीन मोहम्मद हार मानने वालों में से नहीं थे. यहीं से उन की जिंदगी का सब से बड़ा और नया चैप्टर शुरू हुआ. भारत में सिर के तेल मालिश को चंपी कहा जाता था. यह उस दौर में अमीरों का शौक हुआ करता था. दीन मोहम्मद ने इसी भारतीय परंपरा को ब्रिटेन में नए रूप में पेश किया. उन्होंने भाप और सिर की मालिश को मिला कर एक नई थैरेपी शुरू की जिसे उन्होंने शैंपूइंग नाम दिया. यही शब्द आगे चल कर शैंपू बन गया.

अपनी शौप को दीन मोहम्मद ने  ‘मोहम्मद बाथ’ नाम दिया जो जल्द ही पूरे ब्रिटेन में ‘महामेड्स बाथ्स’ के नाम से मशहूर हो गया. अमीर लोग, बड़े अफसर और यहां तक कि ब्रिटेन के राजा भी उन के ग्राहक बन गए.

जल्द ही दीन मोहम्मद को राजा जौर्ज चतुर्थ और विलियम चतुर्थ का आधिकारिक ‘शैंपूइंग सर्जन’ नियुक्त किया गया.

साल 2019 में गूगल ने दीन मोहम्मद के सम्मान में विशेष डूडल बनाया और दुनिया को याद दिलाया कि शैंपू की इस अनोखी कहानी के पीछे एक बिहारी का नाम है. Interesting Fact

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