Inspirational Story in Hindi. कमलेश चाय पीती जा रही थीं और एकटक सामने बैठी गिरिजा देवी की ओर देखती जा रही थीं. वे सोचने लगीं कि ऐसी बात उन से कैसे पूछी जाए. किसी लड़की के चरित्र की बात पूछने पर रिश्तों में कड़वाहट भी आ सकती है और रिश्ता टूट भी सकता है.

अगर वे लड़की के बारे में नहीं पूछतीं, तो जो उन्होंने सुना है, वह गलत नहीं माना जा सकता.

यह बात अगर महल्ले में फैल गई कि उन की होने वाली बहू पेट गिरा कर आई है, तो चुल्लूभर पानी में डूब मरने वाली बात होगी. कोई उन्हें बोलने तक नहीं देगा. आखिर वे क्या करें?

चाय पी कर कमलेश ने कप ट्रे में रख दिया. गिरिजा देवी ट्रे को ले कर अंदर चली गईं. वे होने वाली समधिन के लिए रसोई में नाश्ते का इंतजाम करने लगीं.

कमलेश ने यह बात अपने बेटे उमेश को भी बताई थी, पर उमेश ने कहा था, ‘मां, मैं रजनी को अच्छी तरह से जानता हूं. वह सुशील और अच्छे संस्कारों वाली लड़की है. हमारा संबंध तोड़ने के लिए आप से किसी ने चुगली की है.’

उमेश की बात सुन कर कमलेश को तब चुप रह जाना पड़ा था.

उमेश और रजनी एक ही कालेज में पढ़ते थे. दोनों पक्के दोस्त थे. दोनों बहुत अच्छी पेंटिंग बनाते थे. पेंटिंग की वजह से ही दोनों में दोस्ती हुई थी. फिर दोनों एकदूसरे के घर आनेजाने लगे थे. इस दौरान उमेश ने रजनी को अच्छी तरह जांचापरखा था. उस के चरित्र पर शक की तो कोई गुंजाइश ही नहीं थी.

यही वजह थी कि रजनी से शादी करने की बात भी अपने घर वालों से खुद उमेश ने ही चलाई थी. किसी मौडर्न मातापिता की तरह उमेश के मातापिता ने भी बिना किसी विरोध के यह रिश्ता स्वीकार कर लिया था, इसीलिए मां के मुंह से यह बात सुन कर कि रजनी पेट गिरा कर आई है, उमेश को यकीन नहीं हुआ था.

गिरिजा देवी हलवा और बिसकुट ले आई थीं. वे बोलीं, ‘‘लो समधिनजी, नाश्ता करो.’’

‘‘मुझे भूख नहीं है, आप खाओ.’’ ‘‘यह तो हलका भोजन है. बिना भूख के भी चल जाएगा.’’

कमलेश खाने लगीं. गिरिजा देवी सामने रखी कुरसी पर बैठ गईं.

‘‘इस तरह मत बैठो, आप भी तो खाओ समधिनजी,’’ कमलेश ने प्यार से कहा, तो गिरिजा देवी भी खाने लगीं.

कमलेश एक स्कूल में टीचर थीं. उन के पति का देहांत हो गया था, इसलिए उमेश की शादी में पिता की भूमिका वही निभा रही थीं. रजनी के बारे में शक भरी बातें उन की एक सहेली ने बताई थीं, इसलिए सचाई जानने के लिए वे यहां चली आई थीं.

गिरिजा देवी के पति आगरा में बैंक में नौकरी करते थे, इसलिए उन का सामना सीधा समधिन से हुआ था, पर डर रही थीं कि बात कैसे शुरू करें. कहीं बात झूठी निकली तो.

फिर भी कमलेश ने हिम्मत बांध कर कह डाला, ‘‘समधिनजी, मुझे आप से कुछ बातें करनी हैं.’’

गिरिजा देवी ने हंस कर कहा, ‘‘किस बारे में?’’

कमलेश मन को मजबूत करते हुए बोलीं, ‘‘रजनी के बारे में.’’

गिरिजा देवी के चेहरे पर तुरंत हैरानी के भाव छा गए. वे बोलीं, ‘‘हां बोलो, क्या बातें करनी हैं?’’

‘‘मैं ने सुना है कि रजनी पेट गिरा कर…’’ कहतेकहते कमलेश के शब्द गले में ही अटक गए.

मगर गिरिजा देवी साफसाफ बोलीं, ‘‘समधिनजी, आप ने ठीक ही सुना है.’’

कमलेश ने समझा कि गिरिजा देवी नाराज हो गईं, इसलिए वे बोलीं, ‘‘इस में बुरा मानने वाली कोई बात नहीं है. हम ने तो किसी से यह सुना था. अब आंखों देखी मक्खी तो निगली नहीं जा सकती. इसीलिए आप के पास आई हूं कि यह तो पता चले कि इस बात में कितनी सचाई है.’’

‘‘मैं भी सच कह रही हूं समधिनजी कि यह बात पूरी तरह सच है,’’ गिरिजा देवी ने मजबूती से कहा.

यह सुन कर कमलेश के चेहरे पर कठोरता छा गई. उन्होंने नाश्ते की प्लेट एक ओर सरका दी और गुस्से में बोलीं, ‘‘तो फिर यह बात तुम ने सगाई से पहले हमें क्यों नहीं बताई? हमारे साथ इतना बड़ा धोखा क्यों किया?

‘‘आप ने कैसे सोच लिया कि रजनी हमारे घर की बहू हो जाएगी? बात कैसी भी हो, एक न एक दिन सभी को पता लग जाती है.’’

‘‘वह तो ठीक है समधिनजी. आप ने जो सुना है, वह सच है और केवल उसे सुन कर कोई भी सास किसी लड़की को अपने बेटे की बहू नहीं बना सकती, मगर आप ने अधूरा सच सुना है.’’

‘‘अब पूरा सच सुनने की मुझे जरूरत भी नहीं है. जब मैं ने यह बात सुनी थी, तो मैं ने इस पर यकीन नहीं किया था. लेकिन जब तुम ही इसे सच बता रही हो, तो यह रिश्ता तोड़ना पड़ रहा है,’’ कहते हुए कमलेश कुरसी से उठ कर खड़ी हो गईं.

गिरिजा देवी ने उन का हाथ पकड़ लिया और बोलीं, ‘‘आप यह रिश्ता तोड़ दें, मुझे कोई दुख नहीं है, पर क्या अब यह नहीं जानना चाहोगी कि रजनी मां कैसे बनी?’’

‘‘लाई होगी किसी का पाप, हमें इस से क्या?’’

‘‘उमेश को यह रिश्ता तोड़ने की ठोस वजह भी तो बतानी होगी.’’

‘‘हां, बताइए…’’ कमलेश फिर से बैठ गईं.

गिरिजा देवी ने कहना शुरू किया, ‘‘आज से 3 साल पहले रजनी 12वीं में पढ़ रही थी. वह अपने गांव जा रही थी. वह मेरे साथ थी. रात का समय था. बस अपनी पूरी रफ्तार से चल रही थी. अचानक रास्ते में बस को रुकती देख हम चौंक गए. कुछ बंदूकधारी लोग

बस में चढ़ आए थे. उन्होंने सब सवारियों को बंदूक का निशाना बना कर नीचे उतार लिया.

‘‘सभी से रुपए और गहने लूट लिए. औरतों से जबरन बलात्कार किया गया, जिस का शिकार हम दोनों को होना पड़ा. तकरीबन आधा घंटा उन्होंने यह खौफनाक खेल खेला.

‘‘रजनी तो इस हादसे से बेहोश हो चुकी थी. कई महीनों बाद रजनी ने महसूस किया कि उस के पेट में उन दरिंदों का पाप पल रहा है.

‘‘पर शर्म और झिझक की वजह से उस ने यह बात किसी को नहीं बताई. जब 4-5 महीने का पेट हो गया, तब एक दिन मुझे बताया. एक नर्सिंग होम में जा कर तब इस का पेट गिरवाया.’’

यह सुनतेसुनते कमलेश के चेहरे की कठोरता न जाने कहां गायब हो गई.

गिरिजा देवी बोलीं, ‘‘समधिनजी, आप यह रिश्ता भले ही तोड़ दें, हमें कोई एतराज नहीं है, पर यह बात किसी और को मत बताना. इस घटना की वजह से रजनी की कई सगाई टूट चुकी हैं. उमेश और रजनी की दोस्ती की बात सुन कर हमें उम्मीद बंधी थी कि अब सगाई नहीं टूटेगी.

‘‘आप समझदार हैं, टीचर हैं, अब आप ही बताइए कि इस में रजनी का क्या कुसूर है?

‘‘गहराई से सोचें कि यह हादसा आप के साथ हुआ होता, तब आप पर क्या बीतती? आप अपने दिल पर हाथ रख कर सोचें कि क्या यह रिश्ता तोड़ कर आप रजनी के साथ इंसाफ कर रही हैं? अगर आप की सोच से यह ठीक है, तो आप यह रिश्ता तोड़ सकती हैं.’’

गिरिजा देवी की बात सुन कर कमलेश हैरान रह गईं. उन्होंने गिरिजा देवी का कंधा थपथपा कर कहा, ‘‘समधिनजी, इस बात के लिए माफी चाहती हूं कि मैं ने आप का दिल दुखाया. मैं सच से वाकिफ नहीं थी, इसलिए गुस्से में न जाने क्याक्या कह गई.

‘‘अब आप कोई चिंता नहीं करें. मैं सब संभाल लूंगी. आप शादी की तैयारियां कीजिए.’’

कमलेश की बात सुन कर गिरिजा देवी का दिल एकदम हलका हो गया. उन की निगाह दीवार पर टंगी रजनी द्वारा बनाई गई उस पेंटिंग पर चली गई, जिस में ऊपर लिखा था, ‘औरत ही औरत को मुक्ति दिला सकती है.’

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