News Story. "हां, रमाकांतजी. मैं ने मगध को रेलवे स्टेशन से रिसीव कर लिया है. यह सहीसलामत मेरे पास आ गया है. आप चिंता मत करें. मैं इसे कोई कामधाम दिलवा दूंगी. अब हम अपने फ्लैट पर जा रहे हैं," अनामिका ने इतना कहा और फोन काट दिया.

अब अनामिका और मगध कैब में बैठे थे. वे दोनों अनामिका के फ्लैट पर जा रहे थे.

मगध एक 16 साल का दलित लड़का था, जो अनामिका के जिले वैशाली का ही रहने वाला था. रमाकांत अनामिका के पिता के गहरे दोस्त थे और समाजसेवा भी करते थे.

मगध एक अनाथ लड़का था. उस की मां आज से 6 साल पहले गैंग्रीन की वजह से मर गई थीं. पैर में हलका सा जख्म डाक्टरों की लापरवाही से कब जानलेवा नासूर बन गया, पता ही नहीं चला. मगध की गरीबी उस की मां को लील गई.

इस से बड़ी गाज तो मगध पर 2 साल पहले गिरी जब उस के बापू को सिर्फ इसलिए मार डाला, क्योंकि उस ने बड़े किसान जमींदार से अपनी मजदूरी बढ़ाने को कह दिया था. जमींदार ने गांव वालों के सामने ही उस गरीब खेतिहर मजदूर को पिटवाया. बाद में मौत ने ही उस के सारे दुखदर्द खत्म किए.

मगध पर इस कांड का बड़ा गहरा असर पड़ा था. वह चुप रहने लगा था, जैसे कोई गुस्सा मन ही मन पाल रहा हो.

रमाकांत की नजर मगध पर पड़ी तो उन्होंने इस नरक से उसे निकालने की ठानी और आज मगध अनामिका के साथ इस बड़े शहर में था.

इतने में विजय का फोन आ गया. जब अनामिका ने उसे मगध के बारे में बताया तो वह बोला, "इसे अपने पास रखने की क्या जरूरत है... हमारी प्राइवेसी का क्या होगा?"

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