8 साल की आरती, जो पिछले 2 महीनों से एक घर में बच्चा संभालने वाली आया की नौकरी कर रही थी, आज सवेरे से ही बहुत खुश थी. आज महीने की पहली तारीख थी और उस की मां उस से मिलने के लिए आने वाली थीं.
दोपहर को काफी इंतजार के बाद मां आईं. उसी समय मालकिन को किसी जरूरी काम से बाहर जाना था. अब तो आरती की खुशी का कोई ठिकाना न था.
मां के आने के बाद तेजतर्रार मालकिन ने घर से निकलते समय कठोर आवाज में उसे कई हिदायतें दीं और दरवाजे से बाहर निकलने से पहले आरती की मां को कोई ऐसी जरूरी चीज दी, जिस को मां ने फौरन अपने ब्लाउज में रख लिया.
बच्चे को आरती ने झूले में सुला दिया. मां आरती को गौर से देखने लगीं. उस के बदन पर अब अच्छे कपड़े थे. वह साफसुथरी दिख रही थी. बालों में तेल लगा था और उस की सलीके से चोटी बनी हुई थी.
मां ने आरती के सिर पर हाथ फेरा और बोलीं, ‘‘लगता है, तू यहां बड़े मजे में है आरती?’’ ‘‘अम्मां, मुझे यहां से ले चलो,’’ कहते हुए वह अपनी मां से लिपट गई.
‘‘अरे, यह तू क्या कह रही है?’’ ‘‘अम्मां, मैं यहां काम नहीं करूंगी. तुम मुझे अभी अपने साथ ले चलो.’’
‘‘अरे छोरी, पागल हो गई है क्या? यहां कितने सुख में है तू... उस गंदी झोंपड़ी में क्या रखा है तेरे लिए?
‘‘मैं महीनेभर दूसरों के घरों में बरतन मांजती हूं, झाड़ूपोंछा करती हूं, तब कहीं जा कर दो वक्त की रोटी जुटा पाती हूं. 4 भाईबहिनों के बीच फटे कपड़ों और रूखीसूखी रोटियों के अलावा तुझे उस झोंपड़ी में और क्या मिलेगा?
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