Bhojpuri Interview : मैं रेप और गालीगलौज के सीन नहीं करना चाहूंगा – देव सिंह

Bhojpuri Interview : भोजपुरी सिनेमा में अपनी संवाद अदायगी और बेहतरीन अदाकारी से अलग पहचान बनाने वाले कलाकार देव सिंह की तुलना हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पंकज त्रिपाठी से की जाती है. भोजपुरिया दर्शकों का मानना है कि देव सिंह की ऐक्टिंग हूबहू पंकज त्रिपाठी जैसी है.

देव सिंह का शुरुआती संघर्ष और छोटेछोटे रोल, फिर विलेन के किरदार और फिर बतौर लीड हीरो के रोल में भोजपुरी सिनेमा देखने वालों को उन का मुरीद बना लेते हैं. देव सिंह ने बीते साल फिल्म ‘सिंह साहब : द राइजिंग’ के जरीए एक बायोपिक में सिंह साहब के रोल में जान फूंक दी थी, जिस के लिए उन्हें 5वें ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ में बैस्ट ऐक्टर अवार्ड से सम्मानित किया गया था.

देव सिंह से एक फिल्म के सैट पर हुई मुलाकात में उन के फिल्म कैरियर पर ढेर सारी बातें हुईं. पेश हैं, उसी के खास अंश :

जिस भोजपुरिया समाज से आप को पहचान मिली, उस सामाजिक कर्ज को चुकाने की दिशा में क्या आप कोई काम कर रहे हैं?

मेरी कोशिश रहेगी कि जिस भोजपुरी समाज ने मु झे इतना प्यार और इज्जत दी है, उस की उम्मीदों पर खरा उतरूं. मैं अपने भोजपुरी समाज के लोगों के काम आ सकूं, ऐसी मेरी पूरी कोशिश रहती है.
किसी भी काम का क्रैडिट लेना अब आप के लिए कितना जरूरी हो गया है?

अगर आप ने अच्छा काम किया है, तो उस का क्रैडिट मिलना भी जरूरी है. अगर आप के अच्छे काम की तारीफ नहीं होती है, तो आप पीछे छूट जाएंगे. मेरा मानना है कि जब भी कोई अच्छा काम करे, तो उस की तारीफ होनी ही चाहिए.

मेरे लिए मेरी अच्छी ऐक्टिंग का क्रैडिट मिलना माने रखता है, इसलिए मैं चाहता हूं कि जब भी मैं किसी फिल्म में अच्छी ऐक्टिंग करूं, मेरी संवाद अदायगी अच्छी हो, मेरे रोल के चलते फिल्में हिट हों, तो उस का क्रैडिट मुझे भी मिले.

बायोपिक फिल्म के कमर्शियल पहलू को देखते हुए क्या आगे भी आप इस तरह की फिल्मों को चुनेंगे?

मैं हमेशा चाहता हूं कि हर बार कुछ नया करूं. लेकिन पिछले कुछ सालों से भोजपुरी सिनेमा में महिला प्रधान फिल्में ज्यादा बन रही हैं. ऐसे में बायोपिक फिल्मों के बनने की उम्मीद कम होती जा रही है.

मैं तो यह भी चाहता हूं कि भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और राजगुरु जैसे देश के ऊपर मरमिटने वाले शूरवीरों की बायोपिक करूं.

विलेन के तौर पर आप का काम काफी पसंद किया गया है. क्या आगे भी इस तरह का कोई काम करने की उम्मीद है?

बतौर विलेन मेरी आने वाली फिल्म ‘बहू की बिदाई’ है. इस के अलावा मैं फिल्म ‘भूत मंडली’ में भी विलेन के रूप में नजर आऊंगा.

न तो सिनेमाघर और न ही डिजिटल प्लेटफार्म, जब आप को फिल्म सीधे टैलीविजन पर रिलीज होने के बारे में पता चलता है, तो आप का क्या रिऐक्शन होता है?

मेरी फिल्मों की ज्यादातर रिलीजिंग सिनेमाघरों में होती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से थिएटर में भोजपुरी फिल्मों का प्रदर्शन ठप सा हो गया है. लिहाजा, टैलीविजन पर फिल्मों के रिलीज होने की बात पता चलने पर कोई हैरानी नहीं होती है.

आप अपनी फिटनैस के लिए जाने जाते हैं. उम्र को खुद पर हावी न होने देने का क्या कोई फार्मूला है?

मेरी फिटनैस का मूलमंत्र मौर्निंग वाक और हैल्दी खाना है. मैं जिम जाना पसंद नहीं करता, क्योंकि जिम के लिए हैवी स्टेरौयड, प्रोटीन पाउडर समेत कई आर्टिफिशियल चीजों को अपने खाने में शामिल करना पड़ता है, जो असमय बीमारियों को न्योता देता है.

हम अकसर जिम के दौरान हार्ट अटैक आने की घटनाओं के बारे में सुनते रहते हैं, इसीलिए अगर फिट रहना है तो कसरत कीजिए, अच्छा खाइए और अच्छा सोचिए.

आप की और अवधेश मिश्रा की दोस्ती की मिसाल दी जाती है. फिल्म इंडस्ट्री में दोस्ती बरकरार रखना कितना आसान होता है?

अवधेश मिश्रा को मैं अपना दोस्त नहीं, बल्कि बड़ा भाई मानता हूं. उन्होंने बतौर मैंटर मेरा साथ दिया है. फिल्म इंडस्ट्री में अकसर टांग खींचने वाले ज्यादा होते हैं, लेकिन अवधेशजी ने मु झे हमेशा बड़े भाई की तरह ही सपोर्ट किया है.

आप ने कई भोजपुरी फिल्मों में कई मुश्किल किरदार निभाए हैं. आप की नजर में सब से मुश्किल किरदार कौन सा था?

फिल्म ‘सिंह साहब : द राइजिंग’ में मु झे सिंह साहब के जीवन को परदे पर हूबहू उतारना था. इस के लिए मैं ने उन के परिवार वालों के साथ सिंह साहब के जीवन से जुड़े हर छोटेबड़े पहलू को बड़ी ही बारीकी से सम झा था. यह मेरे लिए काफी चैलेंजिंग रहा था.

जिंदगी में सुखी रहने का आप का फार्मूला क्या है?

जब तक अच्छा काम करने की मन में बेचैनी रहेगी, तब तक संतुष्टि हासिल नहीं हो सकती. इसीलिए मेरी कोशिश रहती है कि मैं हमेशा अच्छे काम करूं. मेरे बरताव से किसी को ठेस न पहुंचे. हम जितना संतुष्ट रहेंगे, उतनी खुशी बनी रहेगी.

कई कलाकार हैं, जो औन स्क्रीन कई चीजें करना पसंद नहीं करते हैं. आप की भी क्या कोई लिस्ट है कि कौन सा काम नहीं करना है?

बिलकुल, मेरी भी सूची है, जिसे मैं औन स्क्रीन नहीं करना चाहता हूं. इस में रेप और गालीगलौज जैसे सीन करने से मैं बचता हूं.

आज की नौजवान पीढ़ी सोशल मीडिया पर रील बनाने से ले कर ऐक्टर बनने तक का सपना देखती है. इस को ले कर आप का क्या नजरिया है?

सोशल मीडिया से ऐक्टर नहीं बना जा सकता है. अगर ऐसा होता, तो घरघर में ऐक्टर ही पैदा होने लगेंगे. ऐक्टर बनने के लिए कड़ी मेहनत और ऐक्टिंग की बारीकियां सीखने की जरूरत होती है.

आप अपने फैंस से क्या कहना चाहेंगे?

मेरा यही मानना है कि कभी झूठ न बोलें, कर्जदार न बनें और किसी की शिकायत या चुगली न करें. ये चीजें आप की कामयाबी में मील का पत्थर साबित होती हैं.

भोजपुरी फिल्म ‘सिंह साहब द राइजिंग’ में दमदार दिख रहे हैं देव सिंह

कुछ साल पहले भोजपुरी सिनेमा में एक सह कलाकार के रूप में कदम रखने वाले देव सिंह ने अपनी उम्दा अदाकारी से न केवल भोजपुरी फिल्मों, बल्कि छोटे परदे के साथसाथ हिंदी फिल्मों में भी अपने हुनर का जौहर दिखाया है.

उन्होंने जब भोजपुरी की दर्जनों फिल्मों में विलेन का रोल किया तो भोजपुरी के दूसरे विलेन उन के आगे बौने लगने लगे. पर उन के अभिनय का सफर और ऐक्टिंग की भूख सिर्फ फिल्मों में विलेन बन कर रहने तक सीमित नहीं थी, इसलिए वे कई फिल्मों में पौजिटिव रोल में भी अपनी छाप छोड़ते आए हैं. इसी के साथसाथ वे छोटे परदे के कई हिट सीरियलों में भी खूब नजर आए हैं.

इस बायोपिक फिल्म से बड़े अभिनेताओं को पछाड़ा

अभिनेता देव सिंह को उन की अलहदा भूमिकाओं के लिए ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ सहित कई दूसरे अवार्डों भी से नवाजा जा चुका है. लेकिन इन दिनों वे अपनी एक खास फिल्म की वजह से काफी सुर्खियों में हैं.

वे भोजपुरी की बायोपिक फिल्म ‘सिंह साहब : द राइजिंग में खूबसूरत ऐक्ट्रैस अंजना सिंह के साथ नजर आने वाले हैं. यह फिल्म उत्तर प्रदेश के मूल निवासी समाजसेवक और बिजनेसमैन आरएन सिंह के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने पहले खुद को मुंबई में स्थापित किया और फिर लाखों लोगों को रोजीरोटी देने का काम किया.

इस फिल्म का ट्रेलर ‘इंटर10 रंगीला’ पर रिलीज हो चुका है और जो लोग भी ट्रेलर को देख रहे हैं, उन का मानना है कि इस फिल्म में देव सिंह ने आरएन सिंह के रूप में अभिनय कर उन के किरदार को फिर से जिंदा कर दिया है. इस फिल्म में अंजना सिंह ने देव सिंह की पत्नी का किरदार निभा कर फिल्म में जान डाल दी है.

हर एंगल से फिट है यह फिल्म

फिल्म समीक्षकों का मानना है कि भोजपुरी सिनेमा में जिस तरह की फिल्मों के निर्माण की जरूरत थी उस पर बायोपिक फिल्म ‘सिंह साहब द राइजिंग’ खरी उतरती है. अभी तक भोजपुरी में बन रही फिल्में एक ही ढर्रे की कहानियों, गानों और फिल्मांकन के रास्ते पर चल रही थीं, लेकिन इस फिल्म में आरएन सिंह की उस वास्तविक जिंदगी और उस से जुड़े संघर्ष को फिल्माया गया है, जिसबसे बहुत कम लोग वाकिफ हैं.

इस फिल्म को इस की कहानी के हिसाब से ही फिल्माया गया है. फिल्म की लोकेशन, ड्रैस, बैकग्राउंड इत्यादि को समय के अनुसार फिल्माने की कोशिश की गई है. इस फिल्म के संवाद भी काफी असरदार हैं.

इस फिल्म में जहां एक तरफ इमोशन का जबरदस्त तड़का लगा है, वहीं दूसरी तरफ फिल्म के ऐक्शन सीन भी दर्शकों में रोमांच पैदा करने वाले दिख हैं. इस फिल्म के कर्णप्रिय गाने लिखे हैं मुसाफिर जौनपुरी ने तो गानों को अपने संगीत से सजाया है अरविंद लाल यादव ने.

इन कलाकारों की मौजूदगी भी असरदार

भोजपुरी सिनेमा में चुनिंदा कहानियों पर फिल्में करने वाले अभिनेता सुशील सिंह ने इस फिल्म में सिंह साहब के बड़े भाई अवध नारायण सिंह की भूमिका निभाई है, जो अपने किरदार में पूरी तरह फिट बैठते नजर आते हैं. इस के अलावा इस फिल्म मे जेपी सिंह, रिंकू भारती, वीना पांडेय, मनोज नारायण, दिवाकर श्रीवास्तव, संतोष पहलवान, अरुण सिंह (भोजपुरिया काका), राज मौर्या सहित दूसरे कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं को जीवंत कर दिया है.

निर्देशन की कसावट

युवा फिल्म निर्देशक धीरज पंडित भोजपुरी सिनेमा में अलग प्रयोगों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने निर्देशन में दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ के साथ हाल ही में ‘पूर्वांचल’ वैब सीरीज को पूरा किया है. निर्देशक ने समाजसेवक और बिजनेसमैन आरएन सिंह के जीवन पर आधारित फिल्म को परदे पर उतार यह साबित कर दिया की वे आने वाले दिनों में भोजपुरी सिनेमा को अलगअलग मिजाज की और भी फिल्में देने वाले हैं.

फिल्म निर्माण की जिम्मेदारी

इस फिल्म के निर्माण की जिम्मेदारी गीता सिंह, चंदा सिंह और नीतू सिंह ने संभाली है, जबकि सहनिर्माता संजू सिंह और उदय भगत हैं. कहानी लिखी है शुभम सिंह ने जबकि पटकथा शुभम सिंह और धीरज पंडित ने लिखी है. फिल्म में संवाद भी धीरज पंडित ने दिए हैं. फिल्म का छायांकन सनी और रणविजय सिंह ने संभाला है, जबकि कला निर्देशक महेंद्र सिंह, संकलन रंजीत प्रसाद और प्रोडक्शन मैनेजर की जिम्मेदारी राजेश भगत ने निभाई है. फिल्म का निर्माण रामसखी रामनिवास फिल्म्स प्रा. लिमिटेड के बैनर तले किया गया है.

जानें इस Lockdown में क्या कर रहें हैं भोजपुरी फिल्मों के स्टार विलेन देव सिंह

भोजपुरी फिल्मों में अपनें दमदार अभिनय की बदौलत निगेटिव किरदार निभा कर चर्चित स्टार अभिनेता देव सिंह (Dev Singh) ने अलग ही छवि बनाई है. इस साल उनकी कई फ़िल्में प्रदर्शित होनें वाली हैं और कई फिल्मों का शेड्यूल भी लगा हुआ था. लेकिन कोरोना के चलते लगाये गये Lockdown के चलते चल रही शूटिंग बीच में ही कैंसिल करनी पड़ी तो फिल्मों के शूटिंग के लिए पहले से तय तारीखें भी आगे बढ़ानी पड़ी. इस दशा में अभिनेता देव सिंह भी दूसरे एक्टर्स की तरह घर में अपने पत्नी और बच्चे के बीच इज्वाय कर रहें हैं.

इस Lockdown के बीच उपजी बोरियत को भगाने के लिए देव सिंह बहुत ही फनी तरीकें अपना रहें हैं जिससे जुडी तस्वीरें और वीडियोज वह अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर शेयर करते रहतें हैं.

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Lockdown के बीच हाल ही में उन्होंने अपने इन्स्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वह अपने एक साल के बच्चे की तेल मालिश कर रहें हैं. इन्स्टाग्राम पर शेयर इस वीडियो के कैप्सन में उन्होंने लिखा है “अपना लॉक डाउन चालू है,,आंनद है इसमें. सोनम जी ने चोरी से वीडीयो बना दिया”. सोनम उनके पत्नीं का नाम हैं.

 

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तंदूरी चाय ☕ गुड़ वाली, ख़ुद के द्वारा निर्मित

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वहीं इन्स्टाग्राम पर ही शेयर किये गए एक दूसरे वीडियो में वह किचन में कुछ बनाते हुए नजर आ रहें अब क्या बना रहें हैं इसके बारे में उन्होंने खुद ही वीडियो के कैप्सन लिखा है “तंदूरी चाय गुड़ वाली, ख़ुद के द्वारा निर्मित” वैसे इस वीडियो को देख कर भी आप जान जायेंगे की देव क्या कर रहें है क्यों की इस वीडियो मेंवह छलनी से कप में चाय छानते हुए नजर आ रहें हैं.

 

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देवांश बाबू अपना सहयोग करते हुए।।

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शेयर किये गए एक वीडियो में अपने बेटे देवांश को पीठ पर बैठा कर वर्कआउट करते नजर आ रहें है तो एक दूसरे वीडियो में वह बेटे को पैरों पर बैठा कर वर्कआउट कर रहें हैं. इस वर्कआउट वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा है “लॉकडाउन का मज़ा लेते हुए,परिवार के साथ टाइम स्पेंड कर रहा हूं. फोन खराब होने की वजह से दूर था, अब फोन आ गया, लेकिन बिना फोन के ज्यादा सुकून था. वक़्त है एन्जॉय करिए परिवार के साथ, सतर्क रहिये सुरक्षित रहिये.”एक वीडियो में उन्होंने नें किसी का चैलेन्ज भी एक्सेप्ट किया है जिसे भी उन्होंने शेयर किया है.

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वह अपने पोस्ट में लोगों को कोरोना से बचाव को लेकर जागरूक करनें वाले पोस्ट भी कर रहें हैं. जिसके जरिये वह लोगों से वह सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखनें की अपील करते नजर आ रहें हैं.

 

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Stay home ,stay safe🙏

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देव सिंह नें भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री मे कई यादगार रोल किये हैं जिसमें मैं सेहरा बांध के आऊंगा, भाई जी, बजरंग, इंडियन मदर, मोकामा जीरो किलोमीटर, जिगर, लागी नहीं छूटे रामा, रब्बा इश्क न होवे, डमरू, पवन राजा , राजा जानी, संघर्ष,  निरहुआ चलल ससुराल 2, पत्थर के सनम, राज तिलक, लल्लू की लैला, स्पेशल इनकाउंटर, कुली नंबर, जिद्दी, के रोल को दर्शकों ने खूब पसंद किया था. इन दिनों वह भोजपुरी इंडस्ट्री के सबसे व्यस्त अभिनेता हैं वह हर साल दर्जन भर से अधिक फ़िल्में करते हैं. यही कारण विलेन के रूप में भोजपुरी बेल्ट में दर्शकों के बीच वह काफी पॉपुलर हैं.

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Saras Salil Bhojpuri Cine Award: भोजपुरी एक्टर देव सिंह बनें ‘बेस्ट पौपुलर विलेन औफ द ईयर’

भोजपुरी सिनेमा में अपने दमदार रोल और संवाद अदायगी से अलग पहचान बनाने वाले देव सिंह को सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड-2020 में बेस्ट पॉपुलर विलेन ऑफ़ द ईयर से नवाजा गया. यह अवॉर्ड उन्हें बॉलीवुड भोजपुरी और छोटे पर्दे के जानेमाने अभिनेता राजप्रेमी के हाथों मिला.

इन फिल्मों के लिए मिला अवॉर्ड…

अवॉर्ड की ज्यूरी नें देव सिंह की फिल्म स्पेशल एनकाउंटर, राजतिलक, छलिया और कुली फिल्मों में उनके द्वारा किये गए यादगार रोल के लिए इस अवॉर्ड के लिए चुना. ज्यूरी वर्ष 2020 में प्रदर्शित 40 फिल्मों में भोजपुरी के लीड विलेन की फिल्मों को शामिल किया गया था लेकिन ज्यूरी द्वारा इस कैटेगरी के लिए देव सिंह को सबसे ज्यादा अंक मिले.

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जिन फिल्मों के आधार पर देव सिंह को यह अवॉर्ड मिला उसमें फिल्म स्पेशल एनकाउंटर में देव सिंह नें बाबा राघवेंद्र का कैरेक्टर निभाया है. फिल्म में देव सिंह का कैरेक्टर “बाबा राघवेंद्र” हर समय पुजारी के भेष में रहता है जिसका बहुत आतंक है. बाबा राघवेंद्र अपने इलाके के थाने में आने वाले हर ईमानदार पुलिस वाले की हत्या करवा देता है. इसलिए उससे निपटने वहां स्पेशल टास्क फोर्स जाती है. जिसे राकेश मिश्र भी जॉइन करते हैं. राकेश इस फिल्म में अपने परिवार और प्यार को खो देने के बाद दोषियों से बदला लेने की कहानी दिखाया गया है.

स्पेशल एनकाउंटर का निर्माण अमन फ़िल्म सिने विजन के बैनर तले किया गया है. फिल्म का निर्देशन अरुण राज नें किया है निर्माता गणेश गुप्ता और नंदलाल यादव हैं. फिल्म का छायांकन आर आर प्रिंस का है. फिल्म की मुख्य भूमिका में राकेश मिश्रा, देव सिंह गणेश गुप्ता, ऋतु सिंह, अनूप अरोरा सीमा सिंह है

वहीं ज्यूरी ने फिल्म राजतिलक में भी देव सिंह ने विलेन के रूप में सबसे ज्यादा नम्बर दिए. ज्यूरी ने उनकी फिल्म छलिया में निभाये गए भ्रष्ट पुलिस अफसर के रोल को भी सराहा. इन फिल्मों में विलेन के रूप में उनकी दमदार एक्टिंग के आधार पर बेस्ट पॉपुलर विलेन ऑफ़ द ईयर-2020 की कैटेगरी के लिए उनके नाम को चुना गया. अवॉर्ड मिलने के बाद देव सिंह नें सरस सलिल को धन्यवाद देते हुए इस पहल की सराहना की.

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देव सिंह नें जिन फिल्मों में निगेटिव रोल में यादगार फिल्में की हैं उनमें मैं सेहरा बांध के आऊंगा में बबुआ जी का रोल, डमरू में विधायक जी, राजतिलक के कॉट्रेक्टर, रब्बा इश्क ना होवे का शंकर सिंह, राजा जानी का विक्रम, स्पेशल एनकाउंटर का राघवेन्द्र का रोल यादगार रहा है जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया है. रिलीज हो चुकी फिल्मों में मैं सेहरा बांध के आऊंगा, भाई जी, बजरंग, इंडियन मदर, मोकामा जीरो किलोमीटर, जिगर, लागी नहीं छूटे रामा,  रब्बा इश्क न होवे,  डमरू, पवन राजा , राजा जानी, संघर्ष,  निरहुआ चलल ससुराल 2,  पत्थर के सनम,  राज तिलक,  लल्लू की लैला,  स्पेशल इनकाउंटर,  कुली नंबर, जिद्दी, है. जब की जो अभी रिलीज होने वाली हैं उनमें प्रतिबन्ध, यारा तेरी यारी, जय शम्भू, नाम बदनाम, हीरो हैंडसम, विजेता, मजनुआ, पगलू, छलिया प्रमुख हैं.

“कसम पैदा करने वाले की-2” में  खतरनाक लुक में नजर आएंगे ये भोजपुरी सुपरस्टार

अभिनेता देव सिंह अपने बेहतरीन अभिनय लिए जाने जाते हैं. लेकिन इस बार वह जिस फिल्म में काम कर रहें हैं उसमें उनका डरावना लुक अब तक की आई सभी फिल्मों से अलग हट कर है. देव सिंह संजय श्रीवास्तव के निर्देशन में बन रही फिल्म कसम पैदा करने वाली की 2 में निगेटिव किरदार में नजर आने वाले हैं. जो यश कुमार इन्टरटेन्मेन्ट” के बैनर तले बन रही है.

इस फिल्म की शूटिंग गुजरात के संजन मे जोर शोर से चल रही है. इस फिल्म में लीड रोल सुपरस्टार अभिनेता यश कुमार मिश्रा एवं अंजना सिंह निभा रहीं हैं. उनके साथ ही आकांक्षा दुबे, देव सिंह, राधे कुमार मिश्रा का किरदार भी अहम् होगा.

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भोजपुरी के हरफनमौला अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बना चुके देव सिंह कसम पैदा करने वाली की 2 में निभाये जा रहे अपने इस किरदार को लेकर काफी खुश हैं. उन्होंने फिल्म में इस दमदार रोल के लिए चुनने के लिए निर्देशक संजय श्रीवास्तव व अभिनेता यश कुमार को धन्यवाद भी दिया. उन्होंने बात-चीत में बताया की फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों ने जो विश्वास मुझ पर किया है जिससे मै चुनौतीपूर्ण किरदार को बहुत ही आसानी से निभा पाने में सफल हो रहा हूं.

देव सिंह नें बताया की वह पहली बार इतने चुनौतीपूर्ण रोल को निभा रहें हैं जिसमें दर्शक उनके अभिनय के दीवाने हो जायेंगे.  देव सिंह भोजपुरी के ऐसे अभिनेता हैं जिन्होंने भोजपुरी सिनेमा में अपनी अलग ही पहचना बनाई है उनकी बेहतरीन फिल्मों में राजतिलक, मैं सेहरा बांध के आउंगा व डमरू, राजा जानी, छलिया, स्पेशल एनकाउंटर, विजेता,लोहा पहलवान प्रमुख रही हैं.

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देव सिंह ने बताया की इस फिल्म की कहानी लव, रोमांस और एक्शन पर आधारित है. फिल्म की कहानी साफ – सुथरी है और इसमें किसी तरह की अश्लीलता नहीं होगी. ऐसे में फिल्म को पूरे परिवार के साथ बैठ कर देखा जा सकेगा. उन्होंने बताया की फिल्म में एक्शन का जबरदस्त तड़का देखने को मिलेगा वहीं फिल्म के तकनीकी पक्ष पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसलिए फिल्म के किसी भी सीन में बनावटीपन नजर नहीं आयेगा. उन्होंने बताया की फिल्म के सभी गाने कर्णप्रिय होंगे.

उनके अनुसार इस फिल्म का अभिनेता होने के साथ ही फिल्म के निर्माता भी यश कुमार ही हैं. यश कुमार नें निर्माता के रूप में नई पारी शुरू करने पर अपने फेसबुक पर पोस्ट कर खुशी भी जाहिर की है. उन्होंने लिखा है की एक निर्माता के रूप में ये मेरी नई शुरुआत है. उम्मीद करता हूं आप सभी के विश्वास पे खरा उतरूंगा. माना जा रहा है की “कसम पैदा करने वाले की” की तरह इसका सीक्वेल कसम पैदा करने वाले की -2 भी हिट रहेगा.

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सोशल मीडिया एक्टर नहीं बनाता- देव सिंह

भोजपुरी फिल्मों में नैगेटिव रोल निभा कर कुछ गिनेचुने चेहरों ने ही पहचान बनाने में कामयाबी पाई है. इन्हीं ऐक्टरों में एक नाम है देव सिंह का. मिमिक्री से अपने ऐक्टिंग कैरियर की शुरुआत करने वाले देव सिंह के फिल्मों में आने के पीछे की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है, जितनी किसी मसाला फिल्म की कहानी होती है.

एक मुलाकात में उन के फिल्मी सफर को ले कर लंबी बातचीत हुई. पेश हैं, उसी के खास अंश:

आप के फिल्मों में आने की कहानी बहुत दिलचस्प रही है. क्या अपने चाहने वालों से इसे सा झा करना चाहेंगे?

मैं उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का रहने वाला हूं, लेकिन मेरा पालनपोषण पश्चिम बंगाल के आसनसोल में हुआ है. मेरे पिताजी वहां कोयले की खान में काम करते थे. बचपन में मेरा ऐक्टिंग की तरफ कोई रुझान नहीं था, लेकिन ग्रेजुएशन के दौरान अचानक मुझे ऐक्टिंग का शौक लग गया था.

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दरअसल, एक बार मैं आरकैस्ट्रा देखने गया था. मैं वहां सब से पीछे खड़ा था. लेकिन तभी मेरे मन से आवाज आई कि मैं यहां नहीं वहां स्टेज पर रहूं और लोग मुझे देखें. बस, उसी रात से नाम कमाने की भूख ने जन्म ले लिया और ऐक्टिंग की तरफ मेरा रुझान होता गया.

दरअसल, बाद में टेलीविजन पर एक शो देख कर मिमिक्री करने लगा, जो मेरे दोस्तों को बहुत पसंद आई. स्टेज पर आने के शौक को पूरा करने के लिए मैं एक आरकैस्ट्रा टीम में गया. वहां मुझे अमिताभ बच्चन के 38 डायलौग याद कर के बोलने के लिए कहा गया, जिन्हें मैं ने 2 घंटे में ही याद कर लिया था.

एक दोस्त की सलाह पर मैं दिल्ली आ गया. यहां से शुरू हुई जद्दोजेहद कर के एक एक्टर बनने की कहानी. दिल्ली में एक थिएटर ज्वौइन किया, जहां 3 महीने तक पोस्टकार्ड लिखने व चाय पिलाने और ब्रोशर बांटने का काम किया.

अचानक मेरे एक दोस्त ने कहा कि मुंबई जा कर जीरो लैवल से शुरुआत करो. इस के बाद मैं एक्टर बनने की चाहत ले कर सीधा मुंबई पहुंच गया, जहां लोगों ने मेरे भोलेपन का जम कर फायदा उठाया. लोग मेरे ही पैसे खा कर मुझे गलत बोलते थे, जिस की वजह से मैं धीरेधीरे डिप्रैशन में चला गया.

उस डिप्रैशन से निकलने के लिए मैं ने 3,000 रुपए की तनख्वाह पर सेल्समैन की नौकरी भी की. अभी नौकरी किए महीनाभर भी नहीं हुआ था कि मेरी मां की मौत हो गई. मैं निराश हो कर अपने गांव सहतवार आ गया और यहां मैं ने एक कपड़े की दुकान खोल ली.

लेकिन मेरा मन एक्टिंग में लगा रहता था, इसलिए मैं फिर से मुंबई आ गया. इस बार मुझे छोटेमोटे काम मिलने शुरू हो गए थे. फिर मेरी जद्दोजेहद रंग लाई और मुझे भोजपुरी की पहली फिल्म ‘दीवाना’ में काम मिला.

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इस फिल्म में मेरा बस एक ही सीन था, लेकिन उस एक सीन ने यह बताया कि कोई भी काम छोटा नहीं होता, बस सच्ची लगन होनी चाहिए. यही वह समय था, जहां से मेरे लिए फिल्मों के दरवाजे खुल गए.

भोजपुरी के दूसरे कई कामयाब कलाकारों की तरह क्या आप ने भी छोटे परदे पर काम किया है?

छोटा परदा किसी को भी कलाकार बनाने के लिए पहली क्लास है. कलर्स चैनल के सीरियल ‘भाग्य विधाता’ में मेरे किरदार को खूब पसंद किया गया था.

इस के अलावा ‘सीआईडी’, ‘अदालत’, ‘महाराणा प्रताप’, ‘जयजय बजरंग बली’, ‘शपथ’, ‘महिमा शनि देव की’, ‘इम्तिहान’, ‘सावधान इंडिया’ के कई ऐपिसोड में भी मैं ने काम किया है.

कोई नैगेटिव रोल निभाने के दौरान क्या कभी आप के मन में नैगेटिव खयाल भी आते हैं?

मैं फिल्मों में नैगेटिव किरदार में जितना दबंग और खतरनाक नजर आता हूं, असल जिंदगी में उतना ही सहज और मिलनसार हूं. ऐसे में किरदार से बाहर निकलने के बाद कभी भी नैगेटिव खयाल नहीं आते हैं.

आजकल नैगेटिव किरदार से निकल कर कई कलाकार कौमेडी और सीरियस किरदार करते हुए भी नजर आ रहे हैं. इस की क्या वजह है?

कोई भी कलाकार तभी पूरा होता है, जब वह सभी तरह के रोल में खुद को ढाल ले. जहां तक मेरा सवाल है, तो मैं भी वही कर रहा हूं.

आप की हिंदी फिल्म ‘किरकेट’ रिलीज होने वाली है. इस की कहानी कैसी है?

यह फिल्म बिहार में क्रिकेट पर हावी राजनीति पर बनी है. बिहार में क्रिकेट को ‘किरकेट’ कहा जाता है. इस फिल्म में मेरे साथ क्रिकेटर व सांसद रहे कीर्ति आजाद लीड रोल में हैं. फिल्म ‘किरकेट’ में मेरा किरदार एक विकेटकीपर का है. इस रोल के लिए मुझे काफी मेहनत करनी पड़ी थी.

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आप के इस ऊंचाई तक पहुंचने में किस साथी कलाकार का अहम रोल रहा है?

मेरे फिल्मी करियर को आगे बढ़ाने में विशाल तिवारी और अवधेश मिश्र का प्रमुख योगदान रहा है. उन्होंने हर कदम पर मेरी मदद की है. इस के अलावा मैं ने जिन लोगों के साथ काम किया है, मैं उन का भी शुक्रगुजार हूं.

आप अपने किरदार में दम लाने के लिए कितनी मेहनत करते हैं?

मेरी कोशिश रहती है कि मैं जिस किरदार को कर रहा हूं, उसे पूरी तरह से जी लूं. मैं ने फिल्म ‘विजेता’ के लिए अपने वजन को 14 किलो तक कम किया था, ताकि मैं धावक लगूं. फिल्म ‘छलिया’ के लिए थोड़े मसल्स बढ़ाए, ताकि कड़क दारोगा दिखूं.

आज की नई पीढ़ी सोशल मीडिया पर वीडियो बना कर ऐक्टर बनने का सपना देखती है. इस को ले कर आप का क्या नजरिया है?

सोशल मीडिया से संघर्ष कर के ऐक्टर नहीं बना जा सकता है. अगर ऐसा हो तो घरघर में ऐक्टर ही पैदा होने लगेंगे. ऐक्टर बनने के लिए कड़ी मेहनत और ऐक्टिंग की बारीकियों को सीखने की जरूरत होती है.

सुना है, आप अपनी फिटनैस को ले कर बहुत संजीदा रहते हैं?

आप ने बिलकुल सही सुना है. मैं अपने शरीर पर बहुत ध्यान देता हूं. हर दिन मैं जिम जाता हूं. अगर शूटिंग के लिए किसी छोटे शहर में भी रहता हूं तब वहां भी जिम ढूंढ़ लेता हूं. जहां मुझे जिम नहीं मिल पाता है, उस दिन मैं 4 से 5 किलोमीटर की दौड़ लगाता हूं.

आप अपने चाहने वालों से क्या कहना चाहेंगे?

मेरा यही मानना है कि कभी  झूठ न बोलें, कर्जदार न बनें, किसी की शिकायत या चुगली न करें. इन चीजों से दूर रहना आप की कामयाबी में मील का पत्थर साबित हो सकता है.

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अरविन्द अकेला कल्लू की ‘प्रतिबन्ध’ के ट्रेलर को मिला अच्छा रिस्पांस, जानें फिल्म में क्या है खास

भोजपुरी के दो बड़े स्टार अरविन्द अकेला कल्लू और देव सिंह की जोड़ी फिल्म प्रतिबन्ध में धमाल करती हुई दिखाई पड़ रही है. हाल ही में लांच हुए फिल्म के ट्रेलर को मिले दर्शकों के रिस्पांस से यह तो जाहिर है की फिल्म दर्शकों को काफी पसंद आयेगी. फिल्म में अरविन्द अकेला कल्लू के अपोजिट खुबसूरत हिरोईन काजल राघवानी हैं.

देव सिंह एक दमदार और कड़क पुलिस अधिकारी के रूप में आएंगे नजर…

फिल्म का ट्रेलर देख कर साफ अंदाज लगाया जा सकता है की यह फिल्म रोमांटिक लव स्टोरी के साथ ही एक्शन और कामेडी से भरपूर होगी. फिल्म की हिरोईन काजल राघवानी अरविन्द अकेला के साथ की लव स्टोरी दर्शकों पर अच्छी छाप छोड़ेगी. फिल्म की कहानी सोशल ड्रामा पर आधारित है. इस फिल्म में भोजपुरी के जाने माने अभिनेता देव सिंह एक दमदार और कड़क पुलिस अधिकारी के रूप में नजर आ रहें है. जिसने फिल्म में अरविदं अकेला के बड़े भाई का रोल निभाया है. फिल्म में इन दोनों अभिनेताओं के भाई के रूप में होने वाली नोकझोंक देख कर दर्शक झूम उठेंगे.

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खलनायक के रूप में अवधेश मिश्रा…

फिल्म प्रतिबन्ध का ट्रेलर देख कर लगता है की फिल्म के खलनायक के रूप में अवधेश मिश्रा अपनी छाप छोड़ने में पूरी तरह से सफल रहेंगे. इस फिल्म के सभी गाने कर्णप्रिय है. साथ ही गानों की शूटिंग भी खूबसूरत लोकेशन पर की गई है जो दर्शकों को काफी पसंद आयेगा.

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प्रियंका पंडित करेंगी आइटम डांस…

फिल्म में कलाकारों की संवाद अदायगी में खास कर देवसिंह, अरविन्द अकेला कल्लू, अवधेश मिश्रा व काजल राघवानी काफी दमदार नजर आ रहे हैं. फिल्म में आइटम डांस भी है जिसमें प्रियंका पंडित ने अपनी प्रस्तुति दी है. फिल्म के स्टारकास्ट में अरविन्द अकेला कल्लू, देव सिंह ,काजल राघवानी, अवधेश मिश्रा , के अलावा लीजा, दीपक सिन्हा , सुबोध, नीलम पाण्डेय ,अनीता रावत , विजय दास ,भोला, अमन, रवी प्रमुख रोल में हैं.

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बता दें, कैप्टन वीडियो प्रा. लि. बैनर तले बनी फिल्म प्रतिबन्ध के निर्देशक अशोक त्रिपाठी अत्री हैं. निर्माता राकेश कुमार गुप्ता व अमित कुमार गुप्ता हैं. वहीं सह निर्माता अजय गुप्ता, अलोक गुप्ता व पंकज गुप्ता हैं. फिल्म के लेखक इन्द्रजीत हैं. फिल्म का संगीत मधुकर आनंद का हैं बोल प्यारेलाल यादव,आजाद सिंह ,संदीप साजन ,श्याम देहाती,  संतोष पुरी, का है. फिल्म में एक्शन दिलीप यादव का है. फिल्म का सिनेमेटोग्राफी संजय व्यास का है. कोरियोग्राफर कानू मुखर्जी, अनुज मिश्रा और राम देवन की है.

प्रतिबन्ध फिल्म टेलर लिंक-

इस तारीख को रिलीज होगी बिहार क्रिकेट टीम में हावी राजनीति पर बेस्ड फिल्म ‘किरकेट’

येन मूवीज ए स्‍क्‍वायर प्रोडक्‍शंस, धर्मराज फिल्‍म्स और जे के एम फिल्‍म्स बैनर के तले बनी इस फिल्म में 1983 में पहली बार की क्रिकेट विश्वकप विजेता टीम का हिस्सा रहें पूर्व क्रिकेटर और पूर्व सांसद कीर्ति आजाद प्रमुख भूमिका में हैं. फिल्‍म के निर्देशक  योगेंद्र सिंह हैं, जबकि इसके निर्माता आर के जलान, सोनू झा और विशाल तिवारी  हैं.

फिल्म के सह निर्माता यूसुफ शेख है. भोजपुरी फिल्मों के मसहूर विलेन देव सिंह भी फिल्म में दमदार अभिनय करते हुए नजर आ रहें है. वह अपनी पहली बौलीवुड फिल्म को लेकर खासा खुश नजर आ रहें हैं. उन्होंने बताया की फिल्म का नाम किरकेट है न की क्रिकेट. जो बिहार क्रिकेट टीम में हावी राजनीति को लेकर बनाई गई है.

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देव सिंह ने बताया की इस फिल्म का एक डायलौग ’11 बिहारी इकट्ठा होते हैं वहां क्रिकेट टीम नहीं, राजनीतिक टीम बन जाती है’ बिहार क्रिकेट के हालात को दर्शाता है. फिल्म में कीर्ति आजाद और देव सिंह के आलावा सोनम छाबड़ा, विशाल और प्रीतम नें इस फिल्म में भी निगेटिव किरदार निभाया है. उन्हें इस फिल्म में अपने किरदार को लेकर काफी मेहनत करनी पड़ी है. देव सिंह फिल्म में विकेट कीपर बल्लेबाज के रूप में नजर आ रहें हैं. जब की देव सिंह रियल लाइफ में बौलर रहें हैं, और क्रिकेट उनका पसंदीदा खेल भी है.

लेकिन इस फिल्म में अपने किरदार से इतर उन्होंने कभी भी  विकेट कीपिंग नहीं की है. लेकिन फिल्म में अपने किरदार को लेकर उन्होंने विकेट कीपिंग के लिए खूब पसीना बहाया है. देव सिंह का मानना है की यह फिल्म बिहार क्रिकेट के साथ दूसरे राज्यों के खिलाडियों के उनके खोये सम्मान को वापस दिलाने में मददगार साबित होगी. अभिनेत्री सोनम छाबडा इस फिल्म में एक पत्रकार के रूप में नजर आ रहीं है.
फिल्म में कीर्ति आज़ाद खिलाडियों के हक़ के लिए लड़ते हुए दिखाई देंगी. पहले क्रिकेट और बाद में राजनीति के बाद अब वह फिल्म अभिनेता के रूप में दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ने जा रहीं हैं.

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फिलहाल किरकेट फिल्म के रिलीजिंग की डेट फ़ाइनल हो चुकी है जो कि 18 अक्टूबर है. जिसमें दर्शक खेल के राजनीतिकरण को बहुत नजदीक से महसूस कर पाएंगे की किस तरह से बिहार क्रिकेट संघ का बंटवारा और उसके रणजी टीम की मान्‍यता रद्द करने की कहानी रची गई थी. इस फिल्म में बिहार के होनहार खिलाडियों को कई दशक बाद भी राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में मौका न दिए जाने जैसे गंभीर मुद्दे को भी उठाया गया है.

फिल्म का ट्रेलर लिंक-

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