Love Story Hindi: जूही के मंडवे तले

Love Story Hindi. मन में दुख के घनघोर बादल उमड़घुमड़ कर मेरे सारे वजूद को अपनी लपेट में ले लेते हैं. नींद मेरी आंखों से कोसों दूर है. हर रात मेरे साथ ऐसा ही होता है.

उफ, यह रात क्यों मेरे घावों को कुरेदती है? दिन के उजाले में जब घाव कुछ भरने लगते हैं, तो काली रात उसे हरा कर देती है.

मैं क्या करूं? कैसे आसिफ से कहूं कि रात आते ही मेरे घाव हरे हो जाते हैं. और… और उन घावों में इतनी सड़न होती है कि मेरा दम घुटने लगता है. मुझे खुद ही नफरत होने लगती है. मन करता है कि खुद को अभी, इसी समय खत्म कर डालूं.

मेरे दिलोदिमाग में एक हलचल सी मच जाती?है, पर मैं चाह कर भी खुद को नहीं मिटा पाती. वैसे, मैं मरने से नहीं डरती… लेकिन क्या करूं मुझे जीना पड़ रहा है. अपने लिए नहीं, अपने मासूम फारान और अपनी नन्ही सी बेटी के लिए. और… और अरसलान के लिए.

मैं चाह कर भी अरसलान से कुछ नहीं कह पाती? ‘क्या मैं बेवफा हूं?’ यह सवाल मेरा दिल मुझ से करता.

‘नहीं, हरगिज नहीं. मैं बेवफा नहीं हूं. फिर मैं…’ अरसलान को सबकुछ क्यों नहीं बता देती?

काश, मैं अपने अंदर इतना हौसला पैदा कर पाती कि अरसलान के सीने में सिर छिपा कर उन से सबकुछ बता दूं, ताकि मेरे सीने पर रखा बोझ कुछ हलका हो जाए. मैं चैन की सांस ले सकूं.

अरसलान मुझे बहुत प्यार करते हैं. मैं उन की बीवी हूं. वे जरूर मुझे माफ कर देंगे. और फिर इस में मेरा कुसूर ही क्या?है? मैं ने जानबूझ कर तो कोई गुनाह किया नहीं. तो क्या अरसलान मुझे माफ कर देंगे? क्या सबकुछ जानने के बाद भी वे मुझे पहले सा प्यार देंगे? क्या वे फारान को…

हां, फारान मेरा मंझला बेटा है, पर सिर्फ मेरा ही, अरसलान का नहीं. नहीं, मैं अरसलान से कुछ भी नहीं कहूंगी. वे मर्द हैं… और मर्द… कभी यह बरदाश्त नहीं कर सकता कि उस की पत्नी के साथ…

मैं क्या करूं?

बीते समय के जंगल से गुजरने लगो, तो काफी घनी झाडि़यां मिलती हैं. फिर भी रास्ता बनता चला जाता है. एक के बाद एक सिलसिलेवार कडि़यां मिलती चली जाती हैं. रास्ते खुले नजर आने लगते हैं.

सचमुच बीता समय कितना खूबसूरत होता है. यही समय तो इनसान की सब से बड़ी कमजोरी और सचाई है. ऐसे समय की खुशनुमा बातें जिंदगी की सब से खूबसूरत चीज होती हैं, जबकि बुरा समय सीने में दफन रह कर भी हर पल चुटकियां लेता रहता?है.

मैं हर रात को अपना बीता समय दोहराती हूं, याद रखने के लिए या भूल जाने के लिए. मुझे हर पल अपने बीते समय की एकएक बात याद आती रहती?है. अगर न याद करूं, तो शायद जिंदा ही न रह सकूं. इन का एकएक पल मेरी सांसों की तरह मेरे अंदर महफूज है, जो हर वक्त मुझे तड़पाता है, रुलाता है, जलाता है और पलपल मुझे एहसास दिलाता है कि मैं एक बेदाग औरत नहीं हूं. मेरे अंदर कुछ टूट कर बिखर जाता है. एक हूक सी उठती?है.

काश, मेरी जिंदगी में वे मनहूस पल आए ही नहीं होते. मेरी इज्जत दागदार नहीं हुई होती. आज सबकुछ होते हुए भी मेरे पास कुछ नहीं है, क्योंकि मैं अपनी इज्जत लुटा चुकी हूं.

अगर औरत के पास इज्जत नहीं तो कुछ भी नहीं. मैं ने उस कमजोर समय में औरत के बेदागपन को दागदार कर दिया. मेरे दागदार समय को कोई नहीं जानता, सिवा मेरे और उस के, जो अब दुनिया में नहीं है, इसलिए मेरा बीता समय मेरे पास अमानत के रूप में दिलोदिमाग में दफन है.

आज मैं इस बोझ को अपने दिलोदिमाग से उतार फेंकना चाहती हूं. आसिफ, जो कभी मेरी जिंदगी था, के बगैर मेरा जीना मुश्किल था. मैं और आसिफ इतने आगे बढ़ चुके थे कि पलटना बहुत मुश्किल था.

हमारे बीच न दौलत की दीवार खड़ी थी, न जातबिरादरी की और न ऊंचनीच की. हम मुहब्बत से बहुत खुश थे. जिंदगी बहुत मजे में कट रही थी. हम ने मिल कर ढेर सारे सपने संजोए थे.

उन दिनों जिंदगी काफी खूबसूरत लगती थी. मैं और आसिफ उस रैस्टोरैंट के बरामदे में लगे जूही के मंडवे तले घंटों बातें किया करते थे, वादे करते, कसमें खाते, साथसाथ जीने और मरने की बातें करते.

एक दिन अब्बू ने मेरी शादी अरसलान से तय कर दी. उन दिनों आसिफ फौज की ट्रेनिंग पर गया हुआ था. मैं बुजदिल लड़की तब कुछ बोल नहीं सकी. मैं ने उसे मोबाइल पर फोन करने की कोशिश भी की, पर पता चला कि वह उस इलाके में है, जहां नैटवर्क भी नहीं चलता और सिर्फ सैटेलाइट फोन से सेना वाले काम करते हैं.

मैं विरोध कैसे करती. जब तक आसिफ साथ न हो, मैं कैसे अब्बूअम्मां के सामने झोली फैला सकती थी. छिपछिप कर रोती रही. अपनी बरबादी का दुख मनाती रही. बस, एक उम्मीद थी कि शायद आसिफ ही आ कर कुछ करे. मैं ने आसिफ के पास चिट्ठी भी लिख दी.

आसिफ का जवाब 2-3 महीने बाद आया, ‘मुहब्बत की आखिरी मंजिल शादी नहीं होती. मुहब्बत का मजा तो एकदूसरे को खोने में है, पाने में नहीं. हम ने एकदूसरे को चाहा जरूर है, मगर जरूरी नहीं कि जिस चीज को इनसान चाहे, वह उसे मिल ही जाए.

‘तुम सबकुछ भूल जाओ. समझ लेना कि हम ने गुडि़यागुड्डे का खेल खेला था. तुम जानती हो कि तुम्हारे पिता कितने जिद्दी हैं. वह अपनी इज्जत पर आंच नहीं आने देंगे, बल्कि बेटी को इज्जत के लिए कुरबान कर देंगे.

‘यही समय की जरूरत है. कुछ भी सोचना या चिंता करना बेकार है. समय बहुत गुजर चुका है. तुम्हारे पिता अरसलान के बाप को जबान दे चुके हैं. मुझे भूल जाओ, इसी में तुम्हारी भलाई है.’

मैं रोती रही. मेरे आंसू पोंछने वाला कोई नहीं था. एक दिन मेरे सपनों का जनाजा डोली के रूप में निकला. मैं ने भी हालात से समझौता कर लिया. यहां तक कि मैं एक बच्चे की मां बन गई. मैं अपने बेटे शायान के प्यार में धीरेधीरे अपने बीते समय को भूल बैठी.

अरसलान ने मुझे इतना प्यार दिया कि कभीकभी मुझे अपने ऊपर गुस्सा आता कि मैं कैसी बीवी हूं. इतना अच्छा पति प्यार करने वाला मिला?है. उस पर भी मैं उसे याद करती हूं, जिस ने ‘गुडि़यागुड्डे का खेल’ कह कर मेरी भावनाओं को करारी चोट पहुंचाई?है.

मैं सचमुच अपने घर, अपने शौहर और शायान में ऐसी खोई कि फिर पलट कर कभी उस रैस्टोरैंट को नहीं देखा, जहां जूही लगी थी.

वक्त अपनी रफ्तार से दौड़ता रहा. अरसलान दफ्तर के काम से दौरे पर जाने वाले थे. मैं भी बहुत दिनों से नैहर नहीं गई थी. अरसलान मुझे मेरे मायके छोड़ कर दौरे पर चले गए. मैं बहुत दिनों

बाद अपने अब्बू के घर आई थी. यहां मुझे आसिफ के साथ गुजारे गए समय की याद आने लगती, तो मैं परेशान हो उठती.

तभी आसिफ वापस भी आ गया. वह फौजी वरदी में बहुत शानदार लग रहा था. उसे देखते ही मेरे मन में कड़वाहट भर आई. मैं हर समय उस से दूर रहने की कोशिश करती. मगर, मैं उस से जितना दूर भागती, वह मेरे उतना ही करीब रहने की कोशिश करता. बारबार ह्वाट्सएप पर मैसेज भेजता, ‘एक बार तो मिल लो.’

एक दिन उसे मुझ से बातचीत करने का मौका मिल ही गया. मैं बाद में उसी जूही के मंडवे तले बैठी थी. शायान सो चुका था. अम्मी भी सोई हुई थीं. पिताजी मुकदमे की पेशी के सिलसिले में 2 दिनों के लिए बाहर गए हुए थे.

शाम के 7 बजने वाले थे. अंदर कमरे में उमस थी. मैं चुपके से रैस्टोरैंट में चली गई. वहां जूही के पेड़ के नीचे बैठ गई. उस पर बेशुमार सफेदसफेद फूल खिले हुए थे, जिन की खुशबू आसपास फैली हुई थी. अजीब सा माहौल था. कुछ पुरानी यादें, कुछ फूलों की भीनीभीनी खुशबू. इन सब ने मेरे अंदर एक हलचल सी मचा दी थी.

हवा ठहरठहर कर चल रही थी. जब हवा चलती, तो फूल जमीन पर बिखर जाते. जमीन जूही के फूलों से भरी पड़ी थी. मैं ने मुट्ठीभर फूलों की पंखुडि़यां उठा कर अपनी गोद में रख लीं, तभी अचानक आसिफ मेरे बिलकुल नजदीक आ कर खड़ा हो गया. उसे देखते ही मैं संभल कर बैठ गई.

‘‘मुझे मालूम था कि तुम यहीं होगी. नाराज हो क्या?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘तो फिर मुझ से कतराती क्यों हो? मेरे मैसेजों पर रिप्लाई क्यों नहीं करतीं?’’

‘‘आसिफ, अब मेरी शादी हो चुकी है. अब तुम से मेरा क्या वास्ता?’’

‘‘कहीं प्यार के पल भी भुलाए जा सकते हैं? उन्हें भुलाना इतना आसान नहीं होता.’’

‘‘नहीं आसिफ, मैं ने अपने बीते समय को बिलकुल भुला दिया है. मैं अपनी दुनिया में बहुत खुश हूं. मैं एक वफादार बीवी हूं. मेरे पति ने मुझे सबकुछ दिया है. मैं ने सच्चे दिल से अपने पति को स्वीकार कर लिया है. मैं ने सबकुछ पीछे छोड़ दिया है आसिफ.’’

‘‘राहेला, मैं तुम्हारा कुसूरवार हूं, पर मैं ने अपने दिल पर पत्थर रख कर तुम्हारे पिता की इज्जत के लिए कहा था, क्योंकि मैं उन्हें खूब जानता हूं. आखिर वे हैं मेरे चाचा ही न. उन से यह कहने की हिम्मत मुझ में नहीं थी कि मैं राहेला को अपनाना चाहता हूं.

‘‘मैं बुजदिल था राहेला. आज मुझे अपनी हार महसूस हो रही है. यह चुप्पी मेरा दम घोंटती है. मेरे अंदर कुछ टूट कर बिखर जाता है. अब मेरी हिम्मत जवाब दे गई है.

‘‘तुम ही बताओ, पानी नहीं मिल पाने के चलते सूख गईं जड़ों को उखड़ने में समय नहीं लगता है? मुझे माफ कर दो राहेला. मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ता हूं.

‘‘राहेला, इतनी बेरुखी मैं बरदाश्त नहीं कर पाऊंगा. वैसे भी एक फौजी की जिंदगी का क्या भरोसा? अगली बार मोरचे पर से लौट पाऊंगा भी या शहीद हो जाऊंगा, कुछ मालूम नहीं. अगर तुम ने मुझे माफ नहीं किया, तो मैं बहुत शर्मिंदा होऊंगा.’’

आसिफ मेरे नजदीक बैठ कर जूही की टूटी पंखुडि़यों से खेल रहा था. उस के चेहरे पर अजीब सी उदासी छाई हुई थी. वह मेरे इतने करीब बैठा था कि मेरा दिल धकधक करने लगा.

‘‘राहेला, मुझे माफ नहीं करोगी?’’ उस की आवाज में दुनिया का दर्द समाया हुआ था.

उस ने मेरा हाथ थाम लिया. मैं अरसलान को भूल गई. बेटे शायान को भी भूल बैठी. आसिफ मेरे बालों में धीरेधीरे अपनी उंगलियां फेर रहा था. उस की गरम सांसें मुझे पिघलाए दे रही थीं. जूही के मंडवे तले हम दुनिया से बेखबर बैठे थे.

‘‘राहेला,’’ उस ने मुझे धीरे से पुकारा. उस की आवाज मुझे बहुत दूर से आती महसूस हुई.

‘‘हां,’’ मैं ने भी धीरे से कहा.

‘‘मैं अगर मर गया तो…?’’ उस ने बात अधूरी छोड़ दी.

मैं खामोश रही. हम दोनों पर शैतान हावी हो चुका था.

आसिफ ने मुझे अपनी बांहों के घेरे में कैद कर लिया. मैं छटपटाई, क्योंकि हम ने पहले कभी ऐसी हरकत नहीं की थी. हमारी मुहब्बत बेदाग थी.

रात हो गई थी. रैस्टोरैंट का मालिक भी जा चुका था. उस ने हमें देखा ही नहीं.

उसी जूही के मंडवे तले हम कहां से कहां निकल गए… हकीकत से दूर भावनाओं की दुनिया में हम बहते चले गए. जूही के फूलों की चादर हमारी बिछावन बनी थी. जब भावनाओं का बुखार उतरा, तो मैं घबरा गई. मुझे उन बिखरे फूलों की पंखुडि़यों की चादर औरत की इज्जत का कफन लगने लगी. मैं अपनी नजरों में गिर गई. मुझे खुद से नफरत हो गई. फिर मैं ने आसिफ का सामना नहीं किया. अरसलान के आने से पहले ही मैं पिता के साथ लखनऊ चली गई.

उस नाजुक समय में मुझ से अनजाने में जो गलती हुई थी, उसे मैं अपने दिल में तो छिपाए रही, पर मेरा मन घुटता रहता. हर समय मैं अपनी उस गलती की आग में जलती रहती.

अरसलान करीब 15 रोज बाद लौटे. कुछ दिनों के बाद मुझे अपने अंदर एक पौधे के पनपने का एहसास हुआ. मैं घबरा उठी. ओह, यह कैसी सजा मुझे मिली है. मैं 2 महीने तक अरसलान से यह बात छिपाए रही, फिर जब मेरा जी मिचलाने लगा, तो घर में मेरी बूढ़ी सास की आंखों में चमक आ गई. मुझे ले कर ननद डाक्टर के पास गई.

डाक्टर ने नए मेहमान के आने की सूचना दे दी. सभी खुश थे. मेरी सास को बच्चों से बेहद प्यार था. वे चाहती थीं कि उन के बहुत सारे पोते हों. वक्त आने पर मैं ने अपने दूसरे बेटे फारान को जन्म दिया.

फारान अरसलान की आंखों का तारा है. आसिफ एक आतंकवादी मुठभेड़ में शहीद हो चुका है. वह जातेजाते अपनी निशानी दे गया और साथ में मुझे शर्मिंदा भी कर गया.

मैं सोचती हूं कि अरसलान को अपना गुनाह बता कर कुछ बोझ हलका कर लूं… पर, क्या फिर अरसलान मुझे पहले जैसा प्यार देंगे? क्या वह मुझ से नफरत नहीं करने लगेंगे?

शायद करेंगे… मैं औरत हूं न, इसी लिए. मेरा गुनाह माफ नहीं किया जाएगा. समय कितना आगे निकल गया और मैं कितनी पीछे रह गई. अपनी गलतियों से मेरे बीते समय के साथ.

मैं हकीकत हूं या सपना? मैं सिर्फ औरत हूं, सिर्फ औरत. जिस की जिंदगी सिर्फ प्याज के समान है, जो कुतरतेकुतरते खत्म हो जाती है. जिन की आंखें गीली लकडि़यां सुलगाने के बहाने गीली होती रहती हैं.

मैं सोचती हूं, क्या बता दूं? नहीं, क्योंकि मैं एक औरत हूं.

हम जिंदगी के किसी भी मैदान में चाहे कितनी ही बड़ी जीत हासिल कर लें, फिर भी कभी कोई बदलाव नहीं ला सकते.

शायद मेरी जिंदगी में घुटन ही घुटन है, जो मेरी जिंदगी के साथ ही खत्म होगी. हर मोड़ पर, हर दोराहे पर औरतपन की दीवार हमारे आगे सीना तान कर खड़ी है. तो क्या मैं मौत को अपने गले लगा लूं? नहीं.

मैं ने एक नजर अपने तीनों बच्चों पर डाली, जो बेखबर सोए हुए हैं.

मेरी नजरें अरसलान पर जा टिकी हैं. वे सोते में भी मुसकरा रहे हैं. यह मेरा घर है. खुशियों, मुहब्बतों, उमंगों, चाहतों से भरपूर. इस नगरी में मासूम मुहब्बतें बिखरी पड़ी हैं. मुझे खुद ही सब सहना होगा, मुसकरा कर, हंस कर, खुशीखुशी. यह बात मेरा दिल खुशियों से भरे इस घर को देख कर कह रहा है.

लेखक : सबीहा

Hindi Story: कलम का जादूगर

Hindi Story. ‘‘को आदमी अपनी गाड़ी के सामने गया है,’’ अपने पति मोहन की यह बात सुन कर किसी अनहोनी के डर से गीता का कलेजा कांप उठा.


अभी नीचे उतरने के लिए गाड़ी का दरवाजा खोला ही था कि उस आदमी का चेहरा देख कर गीता चौंक गई. उस ने ?ाट से हथेलियों से अपना चेहरा ढक लिया. वह कोई और नहीं, बल्कि गीता का सालों का खोया हुआ प्यार अजय था, लेकिन गाड़ी की टक्कर से उसे चोट नहीं आई आई थी.
‘‘सर, आप ठीक तो हैं ?’’ मोहन ने ?ाट गाड़ी से नीचे उतर कर अजय को संभालते हुए पूछा.
गीता और मोहन अपने एकलौते बेटे को लेने के लिए दिल्ली के रेलवे स्टेशन जा रहे थे, तभी यह हादसा हुआ था.


‘‘हां, मैं बिलकुल ठीक हूं,’’ अजय ने कहा. ‘‘लेकिन सर, आप यहां कैसे? मोहन ने पूछा.‘‘सर, आज ही मेरी बेटी लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी कर के घर वापस आई थी. उस के यहां घूमने की जिद के चलते मैं यहां था,’’ अजय ने बताया. ‘‘लेकिन आप की बेटी इस समय आप के साथ नहीं है?’’ मोहन ने पूछा. ‘‘वह कुछ खरीदारी करने गई थी, आती ही होगी,’’ जवाब में अजय ठहाका मार कर हंस पड़ा, तो गीता भी उस के साथ मुसकरा उठी. काफी अरसे बाद वे दोनों साथ हंस रहे थे, लेकिन अजय को इस बात की जानकारी नहीं थी.


देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा होने लगी. सब की आंखें अजय पर टिकी हुई थीं. लेकिन गीता की समझ में कुछ नहीं रहा था. तभी उस भीड़ को चीरती हुई एक बेहद खूबसूरत गाड़ी कर रुकी. उस गाड़ी के सामने गीता की गाड़ी फीकी लग रही थी. उस गाड़ी की ड्राइविंग सीट से एक लड़की उतरी और अजय को देखते हुए बोली, ‘‘पापा, आप यहां क्या कर रहे हैं? सब ठीक तो है ? यहां इतनी भीड़ क्यों जमा है?’’ ‘‘कुछ नहीं बेटाबस ऐसे ही’’ अजय ने कहा. ‘‘तो फिर घर चलें हम?’’ वह लड़की बोली.


‘‘चलता हूं,’’ अजय ने वहां जमा भीड़ की तरफ हाथ जोड़ते हुए कहा और अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया. उस के बैठते ही गाड़ी सड़क पर दौड़ने लगी. जब अजय की गाड़ी दूर निकल गई और गीता को यह यकीन हो गया कि अब वह भीड़ की तरफ मुड़ कर देखेगा, तो भी उसे नहीं पहचान पाएगा, लिहाजा वह गाड़ी से नीचे उतर गई. ‘‘कौन था यह आदमी?’’ गीता ने अनजान बनते हुए मोहन से पूछा. ‘‘जादूगर,’’ मोहन ने कहा.


‘‘जादूगर?’’ गीता ने मोहन का यह शब्द बड़े ही जबरदस्त अंदाज में दोहराया. ‘‘हां, कलम का जादूगर. दुनियाभर में इस के लिखे उपन्यास खूब बिकते हैं. फुरसत के पलों में मैं भी इस के उपन्यास बड़े ही चाव से पढ़ता हूं,’’ मोहन ने गीता को बताया. उस समय रात के 2 बज रहे थे, लेकिन गीता की आंखों से नींद कोसों दूर गायब थी. आज उसे रहरह कर पुरानी यादें ताजा हो रही थीं.


गीता अजय की सादगी पर मरमिटी थी. वे दोनों एक ही कालेज में पढ़ते थे और प्यार भी करते थे. लेकिन उन दोनों के प्यार को गीता के भैया की नजर लग गई थी.गीता के भैया नहीं चाहते थे कि वह एक गरीब लड़के से प्यार करे, क्योंकि गीता एक अमीर परिवार से थी, इसलिए उस के भैया की नजर में अजय गरीब होने के साथसाथ एक गंवार और जाहिल लड़का भी था. लेकिन प्यार तो प्यार होता है. एक दिन गीता के भैया ने उन दोनों को एकसाथ देख लिया.

उसी दिन भैया ने गीता की शादी अपने दोस्त के बेटे के साथ तय कर दी. भैया, मैं यह शादी नहीं कर सकती,’ गीता ने कहा. क्यों? क्या बुराई है इस रिश्ते में?’ भैया ने पूछा. कुछ नहीं भैया. बुराई तो आप की बहन में है जो किसी से बेपनाह मुहब्बत कर बैठी है.’ किस से? उस अनपढ़, जाहिल, गंवार लड़के से, जिस के पास कोई ठिकाना नहीं है?’ हां भैया.

आप की यह बहन उस के बगैर जिंदा नहीं रह सकती, इसलिए आप मेरा प्यार मेरी झोली  में अपनी तरफ से भीख समझ कर डाल दीजिए,’ यह कहते हुए गीता ने अपना आंचल भाई के आगे फैलाया ही था कि भाई ने गीता के गाल पर एक थप्पड़ रसीद कर दिया. थप्पड़ इतना जोरदार था कि गीताधड़ामसे फर्श पर गिर गई. गीता को इस बात की कतई उम्मीद नहीं थी. आज अपने मांबाप की बहुत कमी खल रही थी कि तभी अजय की आवाज उस के कानों में गूंजी.


देख लीजिए भैया. अजय आज अपने प्यार को छिनते देख कर आप के पास चला आया है.’ मैं इस की हिम्मत का कद्र करता हूं, लेकिन आज यह मेरे हाथों से जिंदा बच कर नहीं जाएगा,’ कहते हुए भैया दीवार पर टंगी हुई म्यान से तलवार खींच कर दरवाजे की तरफ बढ़ गए. नहीं भैया, आप ऐसा नहीं करेंगे. आप जहां चाहेंगे, मैं वहीं शादी करने के लिए तैयार हूं,’ जब गीता ने यह कहा, तो भैया के बढ़ते कदम रुक गए.


तो जा कर उस से कह दो कि तुम इस शादी से खुश हो. साथ ही यह भी बोल देना कि आज के बाद वह
यहां आसपास भी दिखाई दे,’ भैया ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा. अजय गली में खड़ा था. गीता के बाहर आते ही उस ने गीता का हाथ कस कर पकड़ कर कहा, ‘यह मैं क्या सुन रहा हूं…’ तुम ने ठीक सुना है…’ गीता की आवाज कड़क थी, ‘आखिर जिस से मेरी शादी हो रही है, उस के पास सबकुछ है. तुम्हारे पास क्या है?’


क्या तुम ने इसलिए मुझसे से प्यार किया था कि आज मेरी हैसियत का मजाक उड़ा सको?’ गीता ने कुछ नहीं सुना और घर के भीतर चली गई. देखते ही देखते जाने कैसे 25 साल गुजर गए, पता ही नहीं चला और अजय की याद दिल के कोने में ही दब गई. लेकिन उस की याद गीता में एक टीस पैदा कर देती थी. ‘‘गीता सुबह हो गई, तुम कहां खोई हो?’’ मोहन के कहने पर वह वर्तमान में आई.


‘‘अभी थोड़ी देर में उठती हूं,’’ कह कर गीता ने मोहन से पीछा छुड़ाया. थोड़ी देर में मोहन नहाने के लिए बाथरूम में चले गए. अब मोहन से क्या कहती गीता कि वह कभी अजय से दिलोजान से मुहब्बत करती थी. उस दिन के बाद जब भी वह उस के लिखे गए उपन्यास को पढ़ती है, तो उसे अजय से हुई आखिरी मुलाकात याद जाती है.


गीता रोते हुए अजय से बोल रही थी, ‘अजय, आज मुझे इस बात की उतनी तकलीफ नहीं है कि कल सवेरे हम दोनों एकदूसरे से हमेशा के लिए अलग हो जाएंगे, जितना मुझे इस बात की तकलीफ है कि मेरे भैया तुम्हें एक अनपढ़, जाहिल, गंवार से ज्यादा कुछ नहीं समझाते हैं, क्योंकि तुम गरीब हो. इसे हमदर्दी मत समझना पर तुम्हें तुम्हारी गरीबी से नजात दिलाने के लिए मैं तुम्हारे लिए एक कलम लाई हूं.

जिस तरह तुम ने मेरे बगैर जीना नहीं सीखा है, उसी तरह तुम इस कलम से सीख लेना और अच्छा लिखना.तुम अपना चेहरा तभी  मुझे दिखाना जब तुम एक कलम का जादूगर बन चुके होगे,’ इतना कह कर अजय की जेब में कलम रख दी और गीता अपने घर की तरफ बढ़ गई. पुलिस से उगाही करने वालों पर लगा मकोका

दिल्ली में पुलिस वालों कोब्लैकमेलकर वसूली करने वाले गैंग को दबोच कर उस पर महाराष्ट्र कंट्रोल औफ और्गैनाइज्ड क्राइम एक्ट लगा दिया गया. क्राइम ब्रांच की एंटी रौबरी एंड स्नैचिंग सैल ने इस मामले में केस दर्ज किया और गिरोह के सरगना राजकुमार उर्फ राजू मीणा को गिरफ्तार कर लिया. उसे दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश किया, जहां से 7 दिन की रिमांड मिली.

पुलिस अफसरों ने बताया कि यह उगाही गैंग दिल्ली नौर्थईस्ट जिले में साल 2018 से सक्रिय था, जो ज्यादातर ट्रैफिक पुलिस वालों को टारगेट करता था. ट्रैफिक स्टाफ से कथिततौर पररिश्वतलेते हुए का वीडियो होने का दावा किया जाता था. इस के बाद वे एक लाख से ले कर 5 लाख रुपए तक मांगते थे. पैसा नहीं देने पर गैंग मैंबर आला अफसरों के साथसाथ सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर कैरियर बरबाद करने की धमकी देते थे. कई पुलिस वाले इस गिरोह के जाल में फंसे, जिन्होंने मोटी रकम दे कर अपना पीछा छुड़ाया.  Hindi Story

लेखक – आनंद कुमार नायक

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