Editorial. दिल्ली में प्रधानमंत्री के आजकल के घर से सटे एकड़ों में फैले जिमखाना क्लब पर फिलहाल सरकार ने एक टंटा छेड़ रखा है. जब देश महंगाई, बेरोजगारी, जरूरी सामान की किल्लत, गिरते न्याय, जाति और धर्म को ले कर विवादों में उलझा हुआ है, केंद्र सरकार के मंत्री अपने ही लोगों के क्लब के पीछे पड़े हैं.

देशभर में अंगरेजों के काल में जिमखाना क्लब बने थे जहां अंगरेज गोरे सरकारी साहब और थोड़े से गोरे बिजनैसमैन आ कर शामें बिताते थे. भारत की गरमी, धूल और कांग्रेस की नीतियों से परेशान साहब लोगों के ये अड्डे थे और हर शाम जम कर नाचगाना और बढि़या खाना होता था. ठाठों की बात ही अलग थी. बहुतों के आगे तो बोर्ड भी लगे थे कि कुत्तों और भारतीयों को अंदर घुसने की इजाजत नहीं है. हालांकि सारे बैरे, कुक, माली, सफाई वाले भारतीय ही होते थे.

अब दिल्ली में सरकार को सोते हुए जागते हुए देख कर थोड़ा आश्चर्य हो रहा है कि 2014 में जब अच्छी सरकार आ चुकी थी तो वह 2026 तक क्या कर रही थी कि अब बीसियों एकड़ में फैले साहबों के क्लब को अचानक देश की सुरक्षा के लिए खतरा मान लिया गया है जबकि वहां से न तो कोई बंदूकें चलीं और न ही इस जगह से कूदफांद कर किसी आतंकवादी के प्रधानमंत्री के घर में घुसने की खबर है. यह मामला इसलिए उछाला जा रहा है ताकि आम जनता को भरोसा दिलाया जा सके कि भारतीय जनता पार्टी अभी भी मंदिरों की पार्टी है क्लबों की नहीं. भाजपा को अब यह भरोसा हो चला है कि इन क्लबों के मैंबर रिटायर्ड साहब हों या काम कर रहे साहब असल में बिना रीढ़ की हड्डी वाले हैं. इन्हें तो उस हड्डी की आदत पड़ी है जो सरकार या नेता या लोग इन के सामने फेंकते हैं. ये क्लब इस तरह की हड्डियां हैं और जिस भी शहर में हैं वहां डरेसहमे लोगों के जमावड़े की जगह ही हैं.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
₹ 399₹ 299
 
सब्सक्राइब करें

सरस सलिल सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरस सलिल मैगजीन का सारा कंटेंट
  • 1000 से ज्यादा सेक्सुअल हेल्थ टिप्स
  • 5000 से ज्यादा अतरंगी कहानियां
  • चटपटी फिल्मी और भोजपुरी गॉसिप
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
₹ 480₹ 399
 
सब्सक्राइब करें

सरस सलिल सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरस सलिल मैगजीन का सारा कंटेंट
  • 1000 से ज्यादा सेक्सुअल हेल्थ टिप्स
  • 5000 से ज्यादा अतरंगी कहानियां
  • चटपटी फिल्मी और भोजपुरी गॉसिप
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...