Workplace Harassment . ‘‘मैडम, आप को साहब बुला रहे हैं,’’ चपरासी गणेशी ने यह कहा, तो मीनाक्षी को लगा कि जरूर किसी काम में फिर गलती हो गई है.

मीनाक्षी जब साहब के केबिन में गई, तो वे उसे खा जाने वाली निगाहों से देख रहे थे. वे गुस्से से बोले, ‘‘मीनाक्षी...’’   ‘‘जी सर,’’ उस ने गरदन नीची रखते हुए कहा.

‘‘तुम्हें कितने महीने हो गए काम करते हुए?’’ ‘‘4 महीने,’’ उस ने कहा.

‘‘4 महीने में लोग बहुतकुछ सीख लेते हैं, मगर अभी तक तुम ने कुछ भी नहीं सीखा है,’’ साहब की आंखों में गुस्सा था.

मीनाक्षी ने कोई जवाब नहीं दिया. वह एक अपराधी की तरह खड़ी रही.

साहब झल्ला कर बोले, ‘‘तुम ने जवाब नहीं दिया मिस मीनाक्षी.’’ ‘‘सर, गलती हो गई. आगे से नहीं होगी,’’ वह बोली.

‘‘क्या खाक नहीं होगी. जिसे काम सीखना ही नहीं, वह क्या अच्छा काम करेगा. अरे, तुम्हें तो विरासत में नौकरी मिली है, इस का मतलब यह नहीं है कि काम ढंग से न करो.’’

‘‘सर, अब गलती नहीं होगी,’’ वह दयनीय लहजे में बोली. ‘‘लो, यह फाइल अभी सुधार कर लाओ,’’ कह कर साहब ने उस के सामने वह फाइल फेंक दी.

मीनाक्षी फाइल उठा कर अपनी सीट पर आ कर बैठ गई.

वह उस फाइल में गलतियां ढूंढ़ने लगी. उस का ध्यान फाइल पर जरूर था, मगर मन यादों में भटक रहा था.

मीनाक्षी 3 बहिनों में सब से बड़ी थी. उस के बाबूजी एकाउंटैंट के पद पर थे. परिवार खुशहाल था. जब मीनाक्षी ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा, तब बाबूजी ने उस के लिए लड़का देखना शुरू कर दिया था. मगर इसी बीच बाबूजी हार्टअटैक से मर गए और हंसताखिलखिलाता घर बरबाद हो गया.

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