Short Story in Hindi. आज दोपहर बाद से रविंद्र के पेट और सीने में तेज दर्द होने लगा. दर्द इतना तेज था कि उन्हें लग रहा था कि अब जान ही निकल जाएगी. घर वाले परेशान हो गए. रविंद्र की पत्नी ने रसोईं में से ला कर कोई चूर्ण फांकने को दिया. गरम पानी बोतल में भर कर सेंकने को दिया, पर कोई आराम नहीं मिला.
फिर घर के लोग घबरा कर आननफानन में रविंद्र को शहर के एक नामीगिरामी डाक्टर के यहां ले गए. डाक्टर के यहां मरीजों की भीड़ लगी थी. अभी 47 मरीजों को देखने के बाद उन का नंबर आने वाला था. वे दर्द से मछली की तरह तड़प रहे थे.
डाक्टर की फीस 1,000 रुपए थी. लेकिन उन के यहां यह सुविधा थी कि दोगुना फीस जमा करने पर सभी मरीजों को छोड़ कर देख लेते थे.
रविंद्र के घर वालों ने दोगुना फीस 2,000 रुपए जमा कर दिए, पर इस में भी 5 मरीज पहले से नंबर लगा चुके थे.
बहरहाल, 5 मरीजों के बाद डाक्टर ने रविंद्र को देखा. इंजैक्शन लगाने, खून जांच करने और एक्सरे कराने के लिए परचा लिख दिया. खून जांच व एक्सरे की सुविधा वहीं पर उसी डाक्टर के यहां उपलब्ध थी. तुरंत एक्सरे का रुपया जमा किया गया. एक्सरे हुआ. खून निकाल कर वहीं के लैब में जांच के लिए भेजा गया.
डाक्टर ने एक्सरे और ब्लड रिपोर्ट को देखा और मरीज को ढेर सारी दवाएं लिख दीं.
डाक्टर ने कहा, ‘‘तुम्हारी यह बीमारी बहुत पुरानी है. अभी तक इसे नजरअंदाज करते रहे, इसलिए अब यह बहुत गंभीर हो गई है. एक महीने की दवा दे रहे हैं. जब तक यह दवा खाते रहोगे तब तक जिंदा रहोगे. दवा बगैर नागा किए खाते रहो.’’
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