Heart Touching Story in Hindi. एक भूलाबिसरा गांव था, जिस के किनारे एक पुराना पुल बना हुआ था. हर शाम, ठीक सूरज छिपने से पहले, डैनियल नाम का एक बुजुर्ग उस पुल पर आता, रेलिंग पर एक सफेद फूल रखता, एक मिनट तक चपुचाप खड़ा रहता और फिर घर लौट जाता.
40 साल तक डैनियल ने एक भी दिन नहीं छोड़ा. गांव वाले समझते थे कि वह किसी अपने का शोक मना रहा है, लेकिन किसी ने कभी पूछा नहीं.
एक बरसाती शाम को एक मुसाफिर डैनियल से मिला. उस ने पूछा, ‘‘आप यह फूल किस के लिए रखते हैं?’’
डैनियल मुसकराया और धीरे से बोला, ‘‘एक अजनबी के लिए.’’
यह सुन कर वह मुसाफिर चौंक गया, ‘‘अजनबी?’’
डैनियल ने सिर हिलाया और कहा, ‘‘जब मैं 23 साल का था, तब मैं ने अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया था. मैं इसी पुल पर आया था. यहीं खड़ा था. बस, नदी में कूदने की हिम्मत जुटा रहा था. तभी एक आदमी आया, जिसे मैं ने पहले कभी नहीं देखा था.’’
‘‘आगे क्या हुआ?’’ उस मुसाफिर ने पूछा.
‘‘उस अजबनी ने मु झ से यह नहीं पूछा कि क्या हुआ है. उस ने कोई सलाह भी नहीं दी. वह बस मेरे पास आ कर खड़ा हो गया. कुछ देर की खामोशी के बाद उस ने केवल एक वाक्य कहा, ‘अगर तुम कल भी जिंदा रहे, तो शायद कल तुम्हारे लिए कुछ अच्छा ले कर आए.’
‘‘इतना कह कर वह अजनबी चला गया,’’ डैनियल ने अपनी बात पूरी की.
मुसाफिर ने पूछा, ‘‘बस इतनी सी बात?’’
डैनियल की आंखें नम हो गईं, ‘‘मेरे लिए वही सबकुछ था. मैं अगले दिन फिर लौटा. फिर उस के अगले दिन. धीरेधीरे मैं इस पुल पर मरने नहीं, जीने के लिए आने लगा.’’
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