Hindi Social Story. सदियों से लकीर के फकीर बने समाज के दकियानूसी लोगों को जब सूरज ने जातपांत की अंधेरी गुफा से निकाल कर रोशनी की ओर ले जाने की कोशिश की, तो उस के अपने ही राह में रोड़े अटकाने आ खड़े हुए. क्यों?
दरवाजा बंद होने की आवाज पर सूरज चौंक कर पलटा. सामने वही लोग खड़े थे, जिन के आने की उसे उम्मीद थी. वे 4 थे और चारों ही ऊंची जाति के हट्टेकट्टे नौजवान थे.
उन लोगों के हाथों में तरहतरह के हथियार थे. उन की आंखों में उस के लिए नफरत भरी थी.
वैसे सूरज खुद भी एक ऊंची जाति से ताल्लुक रखता था, लेकिन उस का गरीबों, दलितों और पिछड़ी जाति के लोगों से संबंध रखना ऊंची जाति के लोगों को पसंद नहीं था. यही वजह थी कि वे लोग उस के कट्टर दुश्मन हो गए थे.
छेदीलाल का परिवार पुश्तों से दीनदयाल के यहां बेगारी करता आया था. जानवरों को दानापानी देना, खेत जोतना, फसल उगाना, काटना और इसी तरह के और भी कई काम वे लोग बरसों से करते आए थे, लेकिन बदले में उन्हें भरपेट खाना भी नहीं मिलता था. इतना ही नहीं, उन की बहूबेटियों की इज्जत भी लूटी जाती थी.
दीनदयाल और उस का बेटा सुरेश वहशी थे. सुरेश ने जोरजबरदस्ती से छेदीलाल की बेटी मालती की जिंदगी बरबाद कर दी थी.
जब मालती फरियाद ले कर दीनदयाल के पास गई, तो उस ने छेदीलाल को पीटपीट कर अधमरा कर दिया और मालती को सरेआम नंगा घुमाया.
उस वक्त दीनदयाल को सूरज ने ही रोका था. उसी ने उन दरिंदों को ललकारा था, ‘चाचा दीनदयाल, इस तरह किसी औरत को बेइज्जत करने का हक आप को किस ने दिया है?’
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