Bihar Politics. पटना के बांसघाट में बाबा जग्गी वासुदेव का वीआईपी श्मशान गृह बन गया है. इस के लिए 15 एकड़ जमीन 99 साल के लिए एक रुपए की दर से दे दी गई है. हालांकि, इस के व्यवस्थापक भाई विवेक बताते हैं कि सारा कुछ बिहार सरकार का ही है. बस ‘ईशा फाउंडेशन’ को यह 5 साल के लिए व्यवस्था देने के लिए दिया गया है.
हमारे साथी वरिष्ठ पत्रकार कमला पांडे भी इस की तसदीक करते हैं कि यह सारा कुछ निर्माण बिहार सरकार के बुडको यानी बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमैंट कौर्पोरेशन लिमिटेड का है.
हम भारत की हर चीज को, हर सेवा को निजी हाथों में जाते हुए देख रहे हैं. अब इनसान की अंतिम यात्रा की व्यवस्था को निजी हाथों में जाते देख रहे हैं. बिहार की राजधानी पटना में इस की शुरुआत हो गई है.
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यह पटना के बांसघाट में बना है. स्मार्ट सिटी के नाम पर बुडको ने 89.40 करोड़ में गंगा के किनारे प्रसिद्ध गोलघर के सामने बांसघाट पर एक वीआईपी श्मशान घाट तैयार किया है. इसे बाबा जग्गी वासुदेव की संस्था ‘ईशा फाउंडेशन’ को चलाने के लिए दे दिया गया है.
अगर आप वहां अपने किसी मित्र या परिजन के अंतिम संस्कार के लिए जाते हैं, तो आप को न्यूनतम 3,500 रुपए खर्च करने पड़ेंगे. इस के अलावा आप अगर लकड़ी या गैस का इस्तेमाल करते हैं, तो उस का खर्च अलग है. डोम राजा को 500, पंडित को 250 और नाई को 150 रुपए देने पड़ेंगे, जबकि इस के ठीक बगल में सरकारी विद्युत शवदाह गृह का चार्ज सिर्फ 300 रुपए है.
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