Hindi Vyangya Kahani. गांव में नए बाबाजी क्या आए, सब की नजरों में छा गए. वे जमीन के भीतर समाधि लगाने में माहिर थे. एक दिन विधायकी का चुनाव लड़ने का सपना देखने वाले गुड्डू भैया ने उन्हें अपने यहां बुलाया, पर बीच रास्ते में...
मई की तपती दोपहरी में बरगद के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर 4 लोग ताश खेल रहे थे और कुछ लोग घेरा बना इस खेल को देख रहे थे. 3 लोगों के पत्ते फेंकने के बाद आखिर में हुकुम का इक्का फेंक कर पत्तों को अपने कब्जे में लेते हुए गांव के किस्सू महाराज ने सामने बैठे गुड्डू भैया से पूछा, ‘‘गुड्डू भैया, कल कहां गायब हो गए थे... तुम्हारे बिना तो इस खेल में मजा ही नहीं आता.’’
‘‘बाजू के गांव के मंदिर में कोई बाबाजी आए हैं, उन से मिलने गया था महाराजजी,’’ गुड्डू भैया ने पत्ते परोसते हुए कहा.
‘‘होगा कहीं का भगोड़ा बाबा, नामपता नहीं पूछा उस से? अपने देश में बाबाओं की कमी थोड़े है,’’ किस्सू महाराज मुंह बनाते हुए बोले.
‘‘किस्सू महाराज, ये समाधि वाले बाबाजी हैं. हफ्तेभर जमीन के अंदर रह कर साधना करते हैं और जब बाहर आते हैं तो उन के दर्शन के लिए बड़ी भीड़ जुटती है. लोगों की हर तरह की समस्या का निदान चुटकियों में कर देते हैं,’’ गुड्डू भैया ने कहा.
‘‘मगर यह तो बताओ कि तुम क्या मांगने गए थे चमत्कारी बाबा से? कहीं चुनाव लड़ने का इरादा तो नहीं है?’’ किस्सू महाराज ने तंज कसते हुए कहा.
‘‘महाराज, हम तो उन के दर्शन करने गए थे. कहते हैं कि बाबाओं के चरणों की धूल से भी सबकुछ मिल जाता है,’’ कंछेदी ने पूरी श्रद्धा प्रकट करते हुए कहा.
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