Editorial.आमतौर पर गांवों और कसबों में मैं की कोई कीमत नहीं होती. मैं का मतलब नहीं होता, हम का होता है, समाज का होता है, धर्म का होता है, बिरादरी का होता है, जाति का होता है. मैं इन में खो जाता है. कोई अपने घर की चारदीवारी में अपने खुद के साथ या अपने से राजी किसी के साथ कुछ करे, यह लोगों की भीड़ को मंजूर नहीं होता.

मैं, मेरी मरजी, मेरा घर, मेरा समय सब समाज और धर्म में बुरी तरह दबा दिए जाते हैं. हर कोई दूसरे की हरकतों पर पूरी तरह नजर रखता है. कोई दरवाजा बंद कर के रखता है तो पासपड़ोस को शिकायत होने लगती है.

किसी के पास कोई अनजान जना बात करने आ जाए तो 24-40 आंखें घूरने लगती हैं.

मैं को खत्म करना धर्म की सब से बड़ी साजिश है. मैं सिर्फ ठाकुरों, पंडितों, बहुत पैसे वालों के लिए है पर उन पर हजार बंधन होते हैं. समाज क्या कहेगा, रिश्तेदार क्या सोचेंगे यही कहकह कर हर किसी को अपनी मरजी का काम अपनी तरह से करने से रोक दिया जाता है चाहे उस से कुछ भी असर किसी को न पड़े.

एक लड़की ने बाल रंग लिए तो पड़ोस की औरतों को फिक्र होने लगती है कि कहीं हमारी लड़की भी ऐसा न करने लगे इसलिए जिस ने बाल रंगे उसे रोको. वे समूह बना कर उसे  बुराभला कहने पहुंच जाएंगी.

भारत सरकार आजकल इसी मैं को मारने के लिए तुली हुई है. 1950 में जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने जब संविधान दिया तो मैं की थोड़ीबहुत चलने लगी पर यह संविधान केवल शहरों तक था. जल्दी ही मैं को कुचलने के लिए गौपूजा, संस्कृति, जाति, राममंदिर, हिंदूमुसलिम के दबे मुरदे खोदखोद कर सामने खड़े कर दिए ताकि यह मैं कहीं नहीं पचा पाए. जलूस निकलने लगे जिन में भीड़ की चलती थी, प्रवचन होने लगे जिन में भीड़ को घंटों बैठना होता है, पूजा उत्सव मनाए जाने लगे जिन में सब एक सा बरताव करने को मजबूर किए जाते.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
₹ 399₹ 299
 
सब्सक्राइब करें

सरस सलिल सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरस सलिल मैगजीन का सारा कंटेंट
  • 1000 से ज्यादा सेक्सुअल हेल्थ टिप्स
  • 5000 से ज्यादा अतरंगी कहानियां
  • चटपटी फिल्मी और भोजपुरी गॉसिप
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
₹ 756₹ 625
 
सब्सक्राइब करें

सरस सलिल सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरस सलिल मैगजीन का सारा कंटेंट
  • 1000 से ज्यादा सेक्सुअल हेल्थ टिप्स
  • 5000 से ज्यादा अतरंगी कहानियां
  • चटपटी फिल्मी और भोजपुरी गॉसिप
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...