Reader Problems: सच्ची सलाह
सवाल : मेरी उम्र 19 साल है और मैं बिहार के सिवान शहर में रहती हूं. कालेज में मेरा एक दोस्त है जो हमेशा लड़कियों की निजी बातों पर बहस करना ही पसंद करता है और बड़े फूहड़ ढंग से अपने विचार रखता है. उसे लड़की की माहवारी का आना भी मजाक लगता है और कहते है तुम्हारे तो मजे हैं, क्योंकि उन खास दिनों में तुम घर में कोई काम नहीं करती हो और मजे से बैठ कर खाती हो. इस बात से हमारे ग्रुप में ऐसे ही मुद्दों को ले कर बहस छिड़ी रहती है और लड़कियां उस के बिगड़े बोल से परेशान हो जाती हैं. मु झे कुछ सम झ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं. मैं कैसे इन हालात को हैंडल करूं?
जवाब : आप लोगों यानी जेनरेशन जी के पास और तुक के टौपिक्स नहीं हैं, जिन पर बहस कर किसी नतीजे पर पहुंचा जाए. आप ने जंतरमंतर के प्रोटैस्ट में इस मसले पर पढ़ा होगा कि कैसे युवाओं की कौकरोच जनता पार्टी ने नीट के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा करवा दिया, एक अडि़यल और जिद्दी सरकार को घुटने के बल ला दिया. वजह, उन्हें देशभर के नौजवानों के भविष्य की चिंता है. ऐसे मसलों में दिलचस्पी लें तो बहस सैक्स से हटेगी. हालांकि सैक्स पर चर्चा या बहस करना कोई गुनाह नहीं. रही बात आप के दोस्त की तो उस मे कुंठा है. उसे सीरियसली न लें और बहस का रुख राजनीति, समाज और महंगाई सहित बेरोजगारों की तरफ मोड़ दिया करें.
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