Social Story in Hindi. कभीकभी जिंदगी का डर भी आदमी को मरने के लिए मजबूर कर देता है. कभी मरने के बाद अमर होने की चाह से भी आदमी मरने को तैयार हो जाता है. कभीकभी आदमी को जीने से बेहतर मरना अच्छा लगता है. जब जिंदगी मौत से बदतर हो जाए, तो आदमी मरना पसंद करता है. इसे खुदकुशी कह सकते हैं.

भविष्य का डर, समाज की परंपराएं, कुरीतियां या सोच, जो भी कह लो, हमारे गांव में अगर किसी विधवा बूढ़ी औरत जब यह सब करती है या उसे जब जबरदस्ती झुलसती आग में जिंदा झोंक दिया जाए, तो उसे कत्ल या खुदकुशी नहीं कहते, बल्कि उसे कहते हैं सती होना.

पति के रहते ही जब वह बहूबेटों को फूटी आंख नहीं सुहा रही थी, तो बाद में तो वे दानेदाने को तरस जाएंगे. कितना बेइज्जत होना पड़ेगा, जराजरा सी बात पर. कभी खाने के लिए, कभी बीमारी के लिए.

जो जायदाद थी, वह उस के पति और उस ने अपनी बढ़ती उम्र को देखते ही बच्चों के नाम बराबरबराबर बांट दी थी, ताकि बाद में बच्चों में बंटवारे को ले कर आपस में झगड़ा न हो, इसलिए आज रामवती की आंखों के सामने उस के पति की लाश धूधू कर जल रही थी और किसी की आंख से दो आंसू भी न टपके.

रामवती का सोचना था कि उस की उम्र 80 साल है और कितना जिएगी... 5-10 साल. क्या करेगी जी कर. सिर घुटा कर, सफेद साड़ी में, एक कमरे में पड़े रहो रूखीसूखी खा कर. बहुएं सुनती नहीं, लड़कों को फुरसत नहीं. नातीपोते अपने खेलने और पढ़ने में मसरूफ हैं. उस बुढि़या की किसी को जरूरत नहीं.

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