Story. मेरी बीवी की बीमारी की वजह से हमें घर के रोज के कामों मसलन, झाड़ू, पोंछा, बरतन वगैरह के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था. छोटा शहर होने की वजह से काम करने वाली बाई भी आसानी से नहीं मिल पा रही थी. हम ने भी बाई ढूंढ़ने के लिए काफी लोगों को कह रखा था.
एक दिन अचानक मेरे घर 2 लड़कियां आईं, जिन में एक बदसूरत और दूसरी कदकाठी में लंबी, छरहरे बदन की 22-23 साल की एक लड़की थी.
मैं ने सोचा कि बदसूरत लड़की काम वाली बाई होगी, पर इस के उलट दूसरी लड़की, जो कपड़ों व जिस्मानी बनावट वगैरह से किसी भी तरह से बाई नहीं लग रही थी, वह बोली, ‘‘मेरा नाम कमला है. मैं झाड़ू, पोंछा, बरतन वगैरह का काम करना चाहती हूं.’’
अमूमन काम करने वाली बाइयां विधवा, पतियों द्वारा छोड़ी गईं या बहुत गरीब होती हैं, तो मैं ने सवाल किया, ‘‘बेटी, तुम यह काम क्यों करना चाहती हो? क्या तुम्हारा पति काम नहीं करता?’’
कमला ने जवाब में कहा, ‘‘मेरी शादी 15 साल की उम्र में ही कर दी थी. मेरे 3 बच्चे हैं. 2 बेटे और एक बेटी.
‘‘हमारे घर की गाड़ी ठीकठाक चल रही थी कि एक दिन हमारे पड़ोस की झोंपड़ी में आग लग गई. मेरे पति रामलाल आग बुझाने के लिए झोंपड़ी के अंदर चले गए. पीछे से आग बुझाने के लिए किसी ने पानी डाल दिया.
‘‘चूल्हे पर तेल चढ़ा हुआ था. तेल उछलने की वजह से उन के दोनों हाथ जल गए. इस वजह से अब वे काम नहीं कर सकते.
‘‘पहले वे सिलाई का काम कर के 100-200 रुपए कमा लेते थे, पर अब घर में बैठे हैं. मेरे 2 देवर हैं. सासससुर बूढ़े हैं. गांव में मंदिर की पूजा से थोड़ीबहुत कमाई हो जाती है, पर उस से गुजरबसर मुश्किल से हो पाती है.
‘‘5-6 महीने तक बिना काम के रहने से ऊपर कर्ज चढ़ना शुरू हो गया है. घर में छोटीछोटी चीजों के लिए भी पैसे नहीं हैं. सो, मैं ने सोचा कि क्यों न मैं घरों में झाड़ूपोंछा कर के परिवार को कुछ राहत दिलाऊं. कम से कम दूसरों से मांगना तो नहीं पड़ेगा.’’
कमला की बातें सुन कर उस के प्रति मेरी हमदर्दी बढ़ गई. मैं ने उसे 6 सौ रुपए महीने पर रख लिया और उस से कहा, ‘‘आज से तू मेरी बेटी जैसी है. बेखौफ हो कर यहां काम कर.’’
हम उस के काम से खुश थे और राहत महसूस करने लगे थे. तनख्वाह के अलावा उसे हम बची हुई सागसब्जी भी दे देते थे.
धीरेधीरे हम कमला की खूबियों से परिचित होने लगे थे. वह ईमानदार थी. कभी वह हमारी किसी चीज या रुपएपैसे को हाथ नहीं लगाती थी. गिरे हुए रुपयों या चिल्लर को उठा कर हमें संभलवा देती थी.
एक दिन कमला काम करने नहीं आई. अगले दिन उस ने बताया, ‘‘रात को पड़ोसिन के घर कोई रसिकमिजाज शख्स रुका हुआ था. सुबह मैं बाहर निकली, तो एक हट्टाकट्टा नौजवान उस पड़ोसिन के घर से निकला और उस ने मुझ पर फब्तियां कसीं.
‘‘जब मैं ने मना किया, तो उस ने मेरा हाथ पकड़ लिया. मुझे बहुत बुरा लगा और मैं ने दूसरा हाथ उलटा कर के उस के मुंह पर दे मारा, तो उस के नाक से खून बहने लगा.
‘‘उस ने थाने में रिपोर्ट लिखवाई कि इस ने मुझे मारा है. मैं ने भी उस के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई कि इस ने मेरी इज्जत लूटने की कोशिश की.’’
मैं ने यह सुन कर उसे शाबाशी दी और कहा, ‘‘अपने पास एक चाकू छिपा कर रखो. जब कभी कोई तुम्हारी इज्जत पर हाथ डाले, तो इस चाकू से अपनी हिफाजत करना.’’
कमला को मेरी बात जंच गई और उस दिन से वह अपने साथ हमेशा एक चाकू छिपा कर रखने लगी. फिर कुछ महीनों के बाद पता चला कि जिस शख्स ने उस के साथ बदसुलूकी की थी, वह मर गया है और अदालत से केस खारिज हो गया है.
कमला के यहां कोई न कोई पारिवारिक परेशानी बनी रहती है. कभी सास बीमार होती है, तो कभी ससुर की सेहत ठीक नहीं होती. माली तंगी के चलते कर्जा हो जाता है, फिर उसे चुकाने में मुश्किलें खड़ी होतीं.
एक बार कमला की बेटी ने अपनी नाक में इमली का बीज फंसा लिया. वह उसे ले कर एक डाक्टर के पास गई, पर जब उस से नहीं निकला, तो दूसरे डाक्टर के पास गई. वह भी बीज नहीं निकाल पाया, तो उसे जोधपुर ले जाना पड़ा.
आनेजाने का किराया व डाक्टर की फीस और दवाओं का खर्च मिला कर उसे 11 सौ रुपए का कर्जदार होना पड़ा.
जिस तरह चींटी के लिए पानी का थोड़ा सा रेला भी पार करना मुश्किल होता है, उसी तरह कमला के लिए यह कर्ज चुकाना भी मुश्किल लग रहा था.
मायके में भी कोई खास आमदनी नहीं थी, वरना वहां से भी मदद मिलती.
वैसे, कमला लेना भी नहीं चाहती थी, क्योंकि उस के मातापिता भाभी की वजह से पहले से दुखी थे. भाई की शादी के समय बतलाया नहीं गया और एक पागल लड़की से धोखे से उस की शादी करा दी गई. बाद में पता चला, तो बेचारा सिर पीट कर रह गया.
माली तंगी से परेशान हो कर कमला ने शादियों में पूरियां बेलने के लिए जाना शुरू कर दिया. दिन के 10-11 बजे से रात के 12 बजे तक पूरियां बेलने का काम चलता था. सौ रुपए रोज के हिसाब से मजदूरी मिलती थी.
महीने में 15-20 दिन काम पर जाने से माली हालत में सुधार होने लगा, पर झाड़ूपोंछा के अलावा पूरियां बेलने के काम से बेचारी कमला थक जाती थी, फिर भी मेहनत की कमाई थी, इसलिए उसे खुशी थी.
मेरे यहां झाड़ूपोंछा, बरतन का काम करने के बाद उस के पास दूसरे घरों में भी झाड़ूपोंछा करने के प्रस्ताव आने लगे, पर कोई पैसे कम देना चाहता था, तो किसी का टाइम सूट नहीं कर रहा था.
एक बार एक सरकारी अफसर के यहां झाड़ूपोंछा करने और उस के छोटे बच्चे को रखने का प्रस्ताव आया. वह एक हजार रुपया महीना और एक वक्त का खाना देने को तैयार था. सुबह केवल 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक काम करना था.
कमला ने मुझ से पूछा, ‘‘क्या मैं यह काम करूं?’’ मैं ने कहा, ‘‘बेटी, तुम्हारी इच्छा है, तो जरूर करो. अगर मेरा काम तुम से न हो सके, तो छोड़ सकती हो. तुम्हारी खुशी में ही मेरी खुशी है.’’
कमला ने कहा, ‘‘आप का काम तो मैं छोड़ूंगी नहीं. पर हां, जल्दी निबटा कर चली जाऊंगी.’’ कमला उस अफसर के यहां काम पर जाने लगी. अफसर की बीवी कमला का खयाल रखती थी. झाड़ूपोंछा लगा कर कमला बच्चे को खिलाती थी, तब तक अफसर की बीवी खाना बना लेती थी. कमला खाना खा कर दोपहर 12 बजे घर लौट आती थी.
एक दिन कमला हमेशा की तरह उस अफसर के घर गई, तो देखा कि उस की बीवी और बच्चा घर पर नहीं है. पूछने पर उस अफसर ने बताया, ‘‘मेरे ससुरजी की तबीयत ठीक नहीं थी, इसलिए रात को ही उन्हें ट्रेन से भेज दिया है.’’
कमला कमरे में पोंछा लगाने जा रही थी कि वह अफसर कमरे में आया और कमला से मीठीमीठी बातें करने लगा.
बात करतेकरते वह कमला का हाथ पकड़ने की कोशिश करने लगा. कमला ने जोर का धक्का दे कर उसे नीचे गिरा दिया और खुद उस से दूर चली गई.
कमला ने फौरन चाकू निकालते हुए कहा, ‘‘मेरे नजदीक आए, तो तुम्हारी आंतें निकाल दूंगी. मैं कोई ऐसीवैसी लड़की नहीं हूं. अभी थाने जा कर तुम्हारे खिलाफ रिपोर्ट लिखवाती हूं.’’
यह सुन कर वह अफसर कमला से दया की भीख मांगने लगा, ‘‘रिपोर्ट मत करना, नहीं तो मेरी नौकरी चली जाएगी. ‘‘मेरी बीवी भी मुझे छोड़ कर चली जाएगी. मैं दोबारा ऐसी गलती नहीं करूंगा.’’
कमला कठोर जरूर थी, पर दयालु भी थी. सो, उस ने उसे माफ कर दिया.
मैं ने कमला से सवाल किया, ‘‘तुम ने उसे माफ क्यों कर दिया?’’ उस ने कहा, ‘‘आप ही तो कहा करते हैं कि क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात.’’
कमला ने इतने कष्ट उठाए, फिर भी उस ने लक्ष्मण रेखा को पार नहीं किया. आज भी वह मेरे घर झाड़ूपोंछा करने आती है. मैं उस की खूबियों और मेहनत का कायल हूं. Story
-मांगीलाल सेवक




