Web Series. आज की हिंदी फिल्मों की हीरोइनों का जिक्र करें तो उन में आलिया भट्ट, तृप्ति डिमरी, करीना कपूर, दीपिका पादुकोण, कियारा आडवाणी, कंगना राणावत, अनन्या पांडे का चेहरा अकसर सामने आता है. पर जब हम वैब सीरीज पर बात करते हैं, तो वहां की हीरोइनों के नाम और चेहरे अलहदा हो जाते हैं, जैसे रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी, कीर्ति कुल्हारी, मानवी गगरू, आहना कुमरा, त्रिधा चौधरी, रिद्धि डोगरा... और भी कई नाम हैं जो वैब सीरीज में धमाल मचाए हुए हैं, फिर चाहे वह उन की एक्टिंग हो या फिर बोल्ड सीन.
बोल्ड सीन के तो कहने ही क्या. वैब सीरीज में कहानी को मजबूत और एकदम रियल दिखाने के चक्कर में किरदार खूब गालीगलौज करते हैं, सैक्स सीन का खुलापन और उस की लंबाई बढ़ जाती है और हिंसा के तो कहने ही क्या... पर इस सब की वजह क्या है?
सैंसर नहीं, तो वैब सीरीज में खुलापन उस का सब से बड़ा हथियार बन गया है. फिल्मों में सैंसर के हिसाब से उसे सर्टिफिकेट मिलता है, लेकिन ओटीटी पर शुरू में कोई सैंसर नहीं था, तो मेकर्स के लिए यह खुलापन दिखाने का सब से आसान तरीका था कि हम फिल्मों से अलग हैं, बोल्ड हैं. अब भी इस प्लेटफार्म पर नंगई मची हुई है.
ओटीटी पर दर्शकों के पास इतने सारे औप्शन हैं कि अगर पहले 10 मिनट में दर्शक बोर हुआ तो वह दूसरी वैब सीरीज पर चला जाएगा. बोल्ड सीन एक शौर्टकट है ध्यान खींचने का. कई बार लेखक के पास कैरेक्टर की कमजोरी, लालच, पावर दिखाने का वक्त नहीं होता, तो वो उस सीन से दिखा देता है.
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