Crime: नैटफ्लिक्स परटौप बौयनाम की एक ब्रिटिश वैब सीरीज है, जिस की मूल कहानी यह है कि 2 ड्रग डीलर उत्तरी लंदन में गरीबों के लिए बने सरकारी रिहायशी इलाके से अपना धंधा चलाते हैं और मोटा मुनाफा बनाते हैं. इस वैब सीरीज को आईएमडीबी पर 10 में से 8.4 रेटिंग मिली है.


इस वैब सीरीज में ड्रग की दुनिया का ऐसा काला सच दिखाया गया है, जहां जुर्म की बस्ती का सरताज बनने के लिए खूनखराबा करना जरूरी है. यहां महासागर की बड़ी मछली ही छोटी मछली को नहीं खाती है, बल्कि तालाब का नन्हा सा टैडपोल भी कब आप के सिर पर गन तान कर आप का गेम बजा दे, पता ही नहीं चलता है.


ड्रग्स के धंधे में तो तमाम तरह के खतरे होते हैं, पर आजकल रंगदारी (एक्सटौर्शन) का धंधा भी काफी फलफूल रहा है, जिस में किसी को धमकी दी जाती है कि अगर जान की सलामती चाहिए, तो इतने पैसे दो वरना राम नाम सत्य सम?. टौप बौयके ड्रग माफिया और जबरन वसूली के रंगदार में एक समानता है कि इस धंधे में बौस भले ही अधेड़ उम्र का हो, पर गुरगे कम उम्र के नौजवान होते हैं. भारत में ड्रग्स और रंगदारी दोनों गैरकानूनी धंधे फलफूल रहे हैं.


रंगदारी से जुड़ा एक मामला देखते हैं. दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में रोहित खत्री नाम का एक शख्सआरके फिटनैसनाम का अपना जिम चलाता है. 12 और 13 जनवरी, 2026 की दरमियानी रात को इस जिम पर अज्ञात लोगों द्वारा ताबड़तोड़ फायरिंग की गई. रोहित खत्री एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी है. इस के जिम पर हुई गोलीबारी की जिम्मेदारी लारैंस बिश्नोई गिरोह ने ली है.

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