Hindi Story: संदीप को पुलिस महकमे में सबइंस्पैक्टर बने अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ था. नए जोश, नए सपने और एक सच्चा पुलिस वाला बनने के वादे के साथ वह काम में जुटा हुआ था.
एक सुबह पुलिस हैडक्वार्टर से एक कांस्टेबल संदीप के दफ्तर में आया. वह सलाम ठोंकते हुए जोर से बोला, ‘‘जय हिंद सर,’’ और फिर जेब से एक सफेद लिफाफा निकाल कर संदीप की ओर बढ़ाते हुए बोला, ‘‘बड़े साहब ने आप के लिए भेजा है.’’

संदीप ने कौतूहल से लिफाफा खोला. भीतर ?ांक कर देखा कि 500 रुपए के 20 नोट सलीके से रखे थे. एक पल को वह कुछ सम? ही नहीं पाया. उस ने कांस्टेबल से पूछा, ‘‘यह क्या है?’’ कांस्टेबल ने कंधे उचकाए, जैसे उसे खुद कुछ पता हो और चुपचाप जाने की इजाजत मांगने लगा. शक बढ़ चुका था. संदीप ने उसे रोकते हुए बड़े साहब को फोन लगाया.

‘‘जय हिंद सर,’’  कहते हुए ने संदीप सारी बात बताई और पूछा, ‘‘सर, ये पैसे?’’
साहब की आवाज आई, ‘‘हां...
हां... रख लो. यह तुम्हारा शेयर है इस महीने का.’’
अब सारी तसवीर साफ हो चुकी थी. यहशेयरदरअसलघूसके जमा होने वाले पैसे का हिस्सा था, जो महकमे में बड़ी नियमितता से बंटा करता था.
संदीप स्वाभिमानी नौजवान था. उसे रिश्वत, घूस, दहेज... सब से चिढ़ थी. उस ने पुलिस की नौकरी इसीलिए चुनी थी, ताकि समाज और देश के लिए कुछ कर सके. फोन पर उस ने कहा, ‘‘सर, मु? इस की जरूरत नहीं है. मैं इसे वापस भेज रहा हूं.’’
उधर से जवाब आया, ‘‘अरे, क्यों ड्रामा कर रहे हो? सब लेते हैं. तुम्हारा हक है यह.’’
संदीप ने हिम्मत जुटा कर कहा, ‘‘सर, मेरे आत्मसम्मान के खिलाफ
है यह.’’

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