Hindi Story. मंगल दास डेयरी फार्म चलाता था. पिछले कुछ दिनों से वह भैंसों में लगने वाली चिचडि़यों से परेशान था. डाक्टर की दवा भी इस समस्या का हल नहीं कर पा रही थी. आगे क्या हुआ?
रात का 1 बज रहा था. चारों तरफ सन्नाटा पसरा था. मंगल दास अचानक हुई खड़खड़ाहट की तेज आवाज सुन कर हड़बड़ा कर उठ बैठा. उस की नींद हवा हो गई थी. वह टौर्च ले कर अपने भैंसों के डेयरी फार्म में दाखिल हुआ.
मंगल दास ने देखा कि एक भैंस ने आधी रात को अपनी जंजीर तुड़ा ली थी और अब वह दूसरी भैंसों के साथ भिड़ रही थी. भैंसों के आपस में टकराने के दौरान पानी वाली चरनी पर रखा एक खाली कनस्तर जोरदार आवाज के साथ नीचे गिर गया था.
कनस्तर की इसी आवाज ने मंगल दास की नींद तोड़ी थी. उस ने पुचकार कर खुली हुई भैंस को पीछे हटाया, उसे उस के खूंटे के पास ले गया और दीवार पर टंगी रस्सी से भैंस को मजबूती से बांध दिया.
फिर मंगल दास ने जल रहे बिजली के बल्ब की पीली रोशनी में अपनी भैंसों पर एक सरसरी नजर डाली. रोशनी में भैंसों के काले शरीरों पर चिपकी हजारों चिचडि़यां साफ चमक रही थीं. कई भैंसें बेबस हो कर अपनी पूंछ पटक रही थीं. कुछ बेबस भैंसें दीवारों से अपना बदन रगड़ कर खुजली मिटाने की नाकाम कोशिश कर रही थीं.
पशुओं की इस तकलीफ को सोचता हुआ मंगल दास बाहर नल के पास आया. उस ने हौज से पानी ले कर गोबर से सने हाथ धोए और फिर आ कर चारपाई पर लेट गया. उस की नींद पूरी तरह उड़ चुकी थी.
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