Hindi Story: गांव की झाडि़यों में मिली एक बच्ची को बांझ कहे जाने वाली मुनिया ने पालने और कुछ बनाने का फैसला किया. गांव वालों ने मुनिया से किनारा सा कर लिया. जब मुनिया की वह गुडि़या 8वीं जमात में थी, तब मुनिया नहीं रही. क्या गुडि़या अपनी मां के सपनों को पूरा कर पाई?
सुबह सुबह महल्ले में एक सनसनी खबर फैल गई कि ?ाडि़यों में एक नवजात बच्ची मिली है. शायद रात में इसे किसी ने फेंका दिया था. बीचबीच में लड़की के रोने की आवाज भी सुनाई दे रही थी. पूरे महल्ले में चर्चा का आज का मुद्दा यह लड़की ही थी.
पहली औरत दूसरी से बोली, ‘‘यह जरूर किसी न किसी का पाप है. पता नहीं कौन जात है. बड़ा खराब जमाना आ गया है. लोग बच्चे कर के यहांवहां फेंक देते हैं.’’
दूसरी ने पहली की हां में हां मिलाई, ‘‘जात छोड़ो, पता नहीं यह किस धरम की है.’’
शादी के 10 साल बाद भी मुनिया के कोई औलाद नहीं थी. पति ने छोड़ दिया था. किसी तरह लोगों के घर का चौकाबरतन कर के वह अपना पेट पालती थी. उसे इस बच्ची पर रहम आ गया. उस ने ?ाटपट बच्ची को उठा कर गोद में ले लिया.
मुनिया के एक तो औलाद नहीं थी, पति ने भी बां?ा होने का आरोप लगा कर उसे छोड़ दिया था. इस बात से वह डिप्रैशन में चली गई थी. तलाक होने से पहले मुनिया डाक्टर के पास भी गई थी. तब डाक्टर बोली थी, ‘तेरे अंदर कोई कमी नहीं है, बल्कि कमी तो तेरे मर्द में है. तू उसे ले कर किसी माहिर डाक्टर के पास जा. डाक्टर बताएगा इस का इलाज.’’
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