Love Story in Hindi. कुलदीप की लाश को फटी आंखों से ताकती तनवीर बुत बनी बैठी थी. जानपहचान वाले घर पर इकट्ठे होते जा रहे थे. अमेरिका का वह इलाका भारत के पंजाबी और सिख तबके का गढ़ था.
तनवीर की हालत देख कर औरतों के आंसू नहीं थम रहे थे. अभी 4 महीने पहले ही तो लाल जोड़े में आई तनवीर की आरती उतार कर उन्होंने प्यार से घर में स्वागत किया था.
बचपन से अनाथ कुलदीप अपने प्यार भरे स्वभाव के चलते किसी का बेटा, किसी का भाई या किसी का देवर बन चुका था. परायों के बीच उसे अपना परिवार मिल गया था.
तनवीर को सतवंत ताई ने गले से लगा कर रोंआसी आवाज में तसल्ली देनी चाही, ‘‘तू चिंता मत कर तन्नी बेटी. हम सब तेरे अपने हैं. खुद को अकेली मत समझ.’’
कुलदीप के साथी टैक्सी ड्राइवर उदास खड़े थे. उन का सब से ज्यादा जिंदादिल साथी उन्हें छोड़ कर जो चला गया था.
हाईवे पर हादसा होना कोई नई बात नहीं थी, पर कुलदीप तो बहुत होशियार ड्राइवर था. पुलिस का कहना है कि हादसा होने के समय वह मोबाइल फोन पर बातें कर रहा था.
दरअसल, सवारी से अच्छे पैसे पा कर कुलदीप की खुशी दोगुनी हो गई थी. उस ने तनवीर को फोन लगाया था. शाम को लोहड़ी में पहनने के लिए उस ने अपनी तन्नी के लिए जामुनी रंग का सलवारसूट खरीदा था, तभी जोर के एक धमाके के साथ सब खत्म हो गया.
5-7 दिन तक बारीबारी से कोई न कोई पड़ोसन तनवीर के पास रही. सतवंत ताई और मनजीत भाभी का मन अपने घर में टिकता ही नहीं था. तन्नी का दुख उन का अपना दुख बन गया था.
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