Online Friendship. आज लाइफ भी फास्ट फूड जैसी बनती जा रही है. इंतजार, मेहनत और सब्र जैसे कहीं गायब होते चले जा रहे हैं. प्रेम भी फास्ट फूड जैसा होता जा रहा है. कहीं किसी किताब में रखा बरसों पुराना सूखा गुलाब, किसी उपन्यास के पन्ने पर सूख चुके आंसुओं के निशान कहीं उस पल को, उस लमहे को न तो पुराना होने देते हैं न ही भूलने देते हैं. कितने खुशनुमा पल होते होंगे वे जब अलसाई दोपहर में किसी की यादों में खोए समय को जीना, किसी घने वृक्ष की छाया में लेटेलेटे बादलों की मदहोशी में अपने को मदहोश कर लेना कितना अच्छा लगता है. नजदीक से ही चिडि़या का फुर्र से उड़ जाना कितना प्यारा एहसास होता है.

फिल्म ‘परदेश’ की नायिका नायक शाहरुख खान से कहती है कि मुझे ऐसा प्यार चाहिए जैसा तुम करते हो. शाहरुख कहता है कि मुझे भी ऐसा ही प्यार चाहिए जिस में शरारत हो, भोलापन हो, मस्ती हो, लेकिन उस में लालच और बनावट न हो. दिखावा, महंगे कपड़े, लिपेपुते चेहरे वाली युवतियां जो कपड़ों की तरह प्रेमी बदलती हैं, जिन के लिए प्रेम एक अराधना हो, एक तड़प हो, एक प्यास हो, एक मीठी कसक हो, एक नाजुक सा समर्पण हो. लेकिन कब तक इंतजार करूं, कहां हो तुम जिस की तलाश है मुझे. मेरे वे सब सपने अधूरे हैं. मैं उन सब सपनों में रंग भरना चाहता हूं.

यात्रा तो मैं ने फिरोजपुर जनता ऐक्सप्रैस से शुरू की थी, बोरीवली और बांद्रा तक, पर फिर तो लोकल ट्रेन से ही मेरा सफर पूरा हुआ.

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