Film: गुल आप अपनी शुरुआती जिंदगी के बारे में बताइए. मैं मूल रूप से दिल्ली का रहने वाला हूं. मेरी पढ़ाई लिखाई जैसे स्कूलकालेज सबकुछ दिल्ली से ही हुआ. मेरे मातापिता पंजाब से थे, लेकिन आज अगर पहचान की बात करूं, तो मैं खुद को पूरी तरह मुंबई का मानता हूं. यही शहर है जहां मैं ने अपने सपनों को जिया और उन्हें पूरा होते देखा.
आप की एक्टिंग और डांस की शुरुआत कैसे हुई?
बचपन से ही मुझे एक्टिंग और डांस का बेहद शौक था. पहले मैं ने प्रोफैशनल डांसिंग शुरू की और साथसाथ थिएटर वर्कशौप्स करने लगा. इसी दौरान नुक्कड़ नाटक किए, जिस से एक्टिंग की समझ और जमीन से जुड़ाव मिला.
आप को मुंबई आने का पहला बड़ा ब्रेक कैसे मिला?
मेरे कालेज के एक सीनियर दोस्त थे, जो डायरैक्टर गिरीश मलिक के साथ काम कर रहे थे. वे एक टीवी शो में लीड रोल कर रहे थे और उसी शो के लिए एक और किरदार कास्ट होना बाकी था. उन्होंने मेरा नाम डायरैक्टर साहब को दिया और मुझे मुंबई बुलाया गया. वह शो था ‘परवरिश’, जो जी टीवी पर आया और जिस में किरण कुमार मेरे पिता के रोल में थे.
आप का फिल्म की दुनिया में आगे का सफर कैसा रहा?
इस के बाद मैं केतन मेहता के असिस्टैंट प्रशांत नारायणन के साथ पृथ्वी थिएटर में एक्टिंग वर्कशौप्स करने लगा. उन्हीं के जरीए मुझे फिल्म ‘ओह डार्लिंग, ये है इंडिया’ में काम मिला. फिर मेरी जिंदगी का एक बेहद अहम मोड़ आया, जब मेरा दोस्त भूपिंदर, जो उस वक्त मेरा फ्लैटमेट भी था, ने मुझे गुलजार साहब की फिल्म ‘माचिस’ के बारे में बताया और उन से मुलाकात तय कराई. पहली ही मीटिंग में गुलजार साहब ने मुझे पसंद कर लिया. उन के साथ काम करना हर एक्टर का सपना होता है और मेरा सपना अचानक सच हो गया.
सीरियल ‘परवरिश’ के बाद टीवी में आप का सफर कैसे आगे बढ़ा?
फिल्म ‘माचिस’ के बाद जब मैं अलगअलग डायरैक्टर्स से मिलने लगा, तो संजीव भट्टाचार्य और रवि राय के पास अकसर जाता था. एक दिन मुझे संजीव भट्टाचार्य का फोन आया और उन्होंने कहा, ‘अब तो तुम्हारी फिल्म इतनी बड़ी हिट हो गई है, क्या अब भी मेरे साथ टीवी में काम करोगे?’ मैं ने बिना सोचे ‘हां’ कर दी.
मैं ‘अमानत’ सीरियल में ‘चंदर’ का रोल करना चाहता था, लेकिन संजीव भट्टाचार्य ने कहा, ‘वह रोल तो कोई भी कर सकता है, लेकिन ‘निगोड़े’ के लिए मुझे एक मंझा हुआ, पुख्ता एक्टर चाहिए. इस किरदार में बहुत शेड्स हैं, जैसे यह हंसाता भी है, रुलाता भी है.’उस एक लाइन ने मुझे क्लीन बोल्ड कर दिया और वही किरदार मेरे लिए यादगार बन गया.
फिल्म ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ आप के लिए क्यों खास थी?
‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ मेरी जिंदगी की बेहद अहम फिल्म है. भले ही मेरा एक बड़ा सीन छोटा हो गया था, लेकिन किरदार बहुत असरदार था. सब से बड़ी बात यह रही कि मुझे फिल्म के पोस्टर में जगह मिली. प्रीमियर शो के दौरान मेरा कटआउट अमिताभ बच्चन साहब के साथ लगा हुआ था. वह पल मेरे लिए यादगार था. और जब फिल्म सुपरहिट हो जाए, तो फायदा तो होता ही है.
आप की महेश भट्ट के साथ जुड़ने की कहानी काफी चर्चित है. क्या था वह किस्सा?
हां, यह बिलकुल सच है. महेश सर अकसर नए एक्टर्स को सीधे फोन कर लेते हैं. एक पंजाबी फिल्म ‘शेरा क्रैक’ के लिए गिरीश धमीजा के कहने पर उन्होंने मुझे चुना और खुद फोन किया. मैं उस समय सो रहा था. नींद में ही बोला, ‘कौन है यार, सो रहा हूं…’ उधर से आवाज आई, ‘मैं महेश भट्ट बोल रहा हूं. जब तुम सो रहे थे, तुम्हारी किस्मत जाग रही थी. उठ कर औफिस आ जाना.’ फोन रखते ही 5 मिनट बाद मुझे होश आया और मैं दौड़ पड़ा उन से मिलने… और मुझे ‘शेरा क्रैक’ मिल गई.
आप का ‘द गांधी मर्डर केस’ फिल्म में इंटरनैशनल एक्टर्स के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
उस फिल्म में मुझे हौलीवुड के शानदार कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला, जिन में स्टीफन लैंग भी शामिल थे. साथ ही, ओम पुरी के साथ तकरीबन एक महीना बिताने का मौका मिला.
फिलहाल आप किन प्रोजैक्ट्स पर काम कर रहे हैं?
हाल ही में ‘मेहंदी वाला घर’ और ‘मेघा बरसेंगे’ सीरियल खत्म हुए हैं. इस के बाद वर्टिकल शोज की
एक लाइन सी लग गई है… अब तक मैं 6 सीरीज कर चुका हूं.इस समय मैं सन टीवी के बेहद हिट शो ‘नंदिनी पार्ट 2 (राजनंदिनी)’ की शूटिंग कर रहा हूं, जो अप्रैल महीने तक वडोदरा में चलेगी. इस में मैं भास्कर का मेन नैगेटिव किरदार निभा रहा हूं. एक ऐसा इनसान, जो 2 अलगअलग रूपों में जी रहा है.
सोशल मीडिया को आप कैसे देखते हैं?
अगर सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल किया जाए, तो यह बहुत पौजिटिव टूल है, लेकिन इस की एक लिमिट तय होनी चाहिए वरना यह समय भी खराब कर सकता है. आज इस के अच्छे और बुरे दोनों तरह के असर देखने को मिलते हैं.




