Romantic Story in Hindi. निम्मी ओपन जेल की लाइब्रेरी संभालती थी. वहीं उस की मुलाकात मलय से हुई, जिसे पढ़ने का शौक था. पर वे दोनों ओपन जेल में कर क्या रहे थे? क्या वे गुनाहगार थे?
निम्मी सुबह लाइब्रेरी की ओर जा रही थी. रास्ते में रामेश नाम का 20 साल का लड़का एक बोनसाई के पास झुका हुआ था. उस की उंगलियां मिट्टी में इस सावधानी से चल रही थीं जैसे किसी घायल चीज की मरहमपट्टी कर रहा हों.
‘‘देखो दीदी पूरे 2 साल हो गए हैं अब बस इस की प्रूनिंग बाकी है. जड़ें और फैल जाएं तो प्रदर्शनी में रखूंगा.’’
निम्मी वहीं रुक गई. बोनसाई छोटा था, पर उस में अजीबसी गरिमा थी. तमाम उम्र का तजुर्बा समेट रखा था उस बोनसाई ने. निम्मी को लगा जैसे कोई कह रहा हो हर बड़ी चीज को बड़ा दिखना जरूरी नहीं होता.
‘‘शुभकामनाएं,’’ कह कर निम्मी आगे बढ़ गई, पर बोनसाई का चित्र देर तक उस के मन में टिका रहा.
निम्मी लाइब्रेरी में पहुंच गई थी और किताबों पर जमी धूल साफ करने लगी थी. चिडि़यों की चहचहाहट यहां की शांति में अलग सा संगीत घोल रही थी.
यह लाइब्रेरी थी जो जेल की सब से शांत जगह थी. यहां सन्नाटा भी बोलता था.
निम्मी अभी भी किताबों की अलमारियों से धूल साफ कर रही थी कि पीछे से धीमी, संभली हुई आवाज आई, ‘‘मैम, क्या ‘सत्य के मेरे प्रयोग’ किताब मिल जाएगी?’’
निम्मी चौंकी. यह नाम यहां बहुत कम सुना जाता था. जब उस ने पलट कर देखा, तो सामने लगभग 28 साल का एक नौजवान खड़ा था. सांवला रंग, साधारण कपड़े और आंखों में एक अजीब सा ठहराव, जैसे वह हर शब्द बोलने से पहले तौलता हो कि उस की कीमत क्या होगी.
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