Hindi Love Story. बारिश न होने के चलते बजरंगी के खेत सूख गए. एक दिन भारी मन से उस ने भी गांव छोड़ दिया.

बजरंगी पढ़ालिखा था, इसलिए उसे अच्छे काम की तलाश थी. पर शहर में किसी अजनबी आदमी को काम देने के लिए कोई राजी नहीं हुआ. हां, ठेला चलाने वाले लोगों ने बजरंगी को भी भाड़े पर ठेला दिला दिया.

एक रात बजरंगी अपनी खोली में खाना बना रहा था. उसी समय लालधर वहां आ धमका. वह नशे में था.

लालधर बजरंगी से बोला, ‘‘कभी मेरी खोली में आना. मेरी जोरू को अपनी आंखों से देख लेना. एक बच्ची की मां हो कर भी वह रूप की रानी है. वह कहती है कि अपनी बच्ची को अंगरेजी स्कूल में पढ़ाएगी.’’

‘‘नेहा ठीक कहती है लालधर. सरकारी स्कूल में मास्टर बच्चों को ठीक से नहीं पढ़ाते. तुम्हारे पास तो नेहा के जेवर और पैसे भी हैं…’’

बजरंगी की इस सलाह पर लालधर भड़कते हुए बोला, ‘‘वह पैसा तो कब का दारूपानी मेें उड़ गया. पर तू चिंता मत कर. मैं इतना तो कमा ही लेता हूं कि यारों के काम आऊं. कभी मौजमस्ती की इच्छा हो, तो मुझे  इशारा कर देना. सस्ते रेट में अच्छी लड़की दिलवा दूंगा…’’ यह कह कर लालधर खोली से बाहर निकल गया.

अगली सुबह बजरंगी दातौन कर रहा था, तभी उसे हल्लागुल्ला सुनाई दिया. वह लालधर की खोली के पास पहुंच गया. लालधर नेहा को गालियां बक रहा था. वह सुबक रही थी. उस की 4 साल की बेटी सहमी नजरों से यह सब देख रही थी.

नेहा सुबकती हुई लालधर से बोली, ‘‘नाराज क्यों होते हो? मैं ने चिंकी की पढ़ाई के खर्च के लिए सोच लिया है. मैं सामने चौराहे पर चायपकौड़े की एक दुकान लगा लेती हूं.’’

दुकान लगाने की बात पर लालधर चिल्लाने लगा, ‘‘तू दुकान लगाएगी… दुकान ही लगानी है, तो तू अपनी जवानी की दुकान लगा ले, बहुत पैसे मिलेंगे…’’

अब बजरंगी से रहा नहीं गया. वह बोला, ‘‘लालधर, नेहा ठीक कह रही है. अगर चिंकी की पढ़ाई का खर्च तुम नहीं उठा सकते, तो वह अपने बलबूते उसे पढ़ाएगी. बहुत सी औरतें दुकान चला रही हैं. इस में कौन सी बुराई है?’’

बजरंगी की डपट पर लालधर चुप हो गया, लेकिन वह गुस्से में बहुत देर तक उसे घूरता रहा.

अगले दिन नेहा बजरंगी के साथ स्कूल गई. कुछ दिनों बाद चायपकौड़े की दुकान भी खुल गई. धीरेधीरे दुकान खूब चलने लगी.

बजरंगी रोज चिंकी के स्कूल हो कर काम पर जाता था, इसलिए चिंकी को स्कूल ले जाने और वापस लाने की जिम्मेदारी भी उस ने अपने सिर ले ली.

एक दिन नेहा लालधर से बोली, ‘‘चिंकी तुम्हारी बेटी है. भला बजरंगी उस को कब तक स्कूल पहुंचाएगा? तुम अपने रिकशे से चिंकी को स्कूल क्यों नहीं ले जाते?’’

लालधर भड़कते हुए बोला, ‘‘मैं सब समझता हूं. सिर्फ तुम्हारी वजह से बजरंगी चिंकी का बाप बना फिर रहा है. देखता हूं कि तू कब तक उस के साथ गुलछर्रे उड़ाती है…’’

इस लांछन से नेहा की आंखें भर आईं और वह चुप हो गई.

नेहा खूबसूरत थी. सो, उस की दुकान पर आवारा किस्म के ग्राहक भी पहुंचने लगे. ऐसे ग्राहकों पर बजरंगी की कड़ी नजर रहती थी. काम से फुरसत पाते ही वह ठेला लिए वहां आ धमकता.

बजरंगी को देख कर नेहा खिल उठी. वह मजाक करने लगा, ‘‘नेहा, आज पहली बार ग्राहकों का पटरा खाली देख रहा हूं. लगता है कि चाय अच्छी नहीं बन रही…’’

‘‘जाओ, मैं तुम से नहीं बोलती. तुम मेरी दुकान की चाय तक नहीं पीते. तुम्हें डर लगता होगा कि नेहा कहीं चाय में जहर न घोल दे…’’

यह सुन बजरंगी हंस पड़ा और ग्राहकों के लिए बने पटरे पर बैठ गया. वह हंसते हुए बोला, ‘‘सच पूछो तो आज मैं चाय पीने ही आया हूं.’’

नेहा ने बजरंगी के हाथ में चाय का कप थमा दिया. वह नजरें नीची किए चुपचाप चाय पीने लगा.

बजरंगी को गुमसुम देख कर नेहा पूछने लगी, ‘‘बजरंगी, एक दिन लालधर कह रहा था कि तुम अब तक कुंआरे हो. तुम शादी क्यों नहीं कर लेते?’’

बजरंगी फीकी हंसी हंसते हुए बोला, ‘‘मैं शादी तो कर लेता, पर तुम्हारे जैसी औरत मुझे  कहां मिलेगी?’’

नेहा के दिल के तार झनझना उठे. वह बोली, ‘‘क्या मैं तुम्हें इतनी अच्छी लगती हूं…’’

‘‘हां नेहा, सचमुच तुम बहुत खूबसूरत हो.’’

नेहा का चेहरा शर्म से लाल हो उठा. उस रात वह ठीक से सो नहीं पाई.

अगले दिन बजरंगी ठेला लिए चिंकी को लेने पहुंचा, तो बहुत खटखटाने के बाद किवाड़ खुला.

अधखुले किवाड़ के पीछे नेहा खड़ी थी. उस के खुले बालों से पानी चू रहा था. वह बोली, ‘‘माफ करना बजरंगी, मैं नहा रही थी.’’

‘‘चिंकी कहां है? उस के स्कूल का समय हो चुका है…’’ बजरंगी बोला.

‘‘अरे, आज तो रविवार है. वह अभीअभी बाहर खेलने गई है.’’

बजरंगी हंसता हुआ बोला, ‘‘मैं भी अजीब हूं. मुझे  छुट्टी का ध्यान भी नहीं रहता. अच्छा, मैं चलता हूं…’’

‘‘कहां चले? अंदर आओ न,’’ नेहा मुसकराते हुए बोली.

‘‘नहीं, अभी काम का समय है,’’ यह कह कर बजरंगी जाने लगा, तभी नेहा ने झपट कर बजरंगी की बांह थाम ली.

नेहा बजरंगी को खाट पर बैठाते हुए उलाहना देने लगी, ‘‘जब देखो तब काम… काम के सामने तुम अपनी नेहा की थोड़ी भी फिक्र नहीं करते…’’

बजरंगी सिर्फ मुसकरा कर रह गया.

किवाड़ खोलने की हड़बड़ी में नेहा ब्लाउज नहीं पहन पाई थी. जैसे ही उसे सुध आई, उस ने तिरछी निगाहों से बजरंगी को देखा.

नेहा खिलखिलाते हुए बोली, ‘‘क्या देख रहे हो बजरंगी?’’

‘‘कुछ नहीं,’’ यह कहते समय बजरंगी झेप गया.

नेहा मुसकराते हुए बड़ी अदा से बोली, ‘‘बजरंगी, अपनों से कैसा शरमाना. बोलो, तुम्हें क्या चाहिए?’’

बजरंगी थूक गटकते हुए बोला, ‘‘बस, एक गिलास पानी.’’

नेहा बजरंगी के सिर पर प्यार से चपत लगाते हुए बोली, ‘‘तुम भी अजीब आदमी हो. नदी में तैरने से पहले ही तुम्हें प्यास लगने लगी. ठहरो, मैं अभी पानी लाई…’’

नेहा अपने कपड़ों को संभालते हुए पानी लेने अंदर चली गई.

जब नेहा पानी ले कर लौटी, तो हैरान रह गई. दरवाजा खुला हुआ था और बजरंगी वहां नहीं था.

नेहा गुस्से से भर उठी. उस ने गिलास जमीन पर फेंक दिया और मुंह फुलाए खटिया पर बैठ गई.

जब दूसरे दिन बजरंगी चिंकी को लेने पहुंचा, तो नेहा जानबूझ  कर बाहर नहीं निकली.

बजरंगी ने हंसते हुए चिंकी से ऊंची आवाज में पूछा, ‘‘बेटी, क्या तुम्हारी मम्मी मुझ से नाराज हैं?’’

नेहा ने बजरंगी का सवाल सुना और जलभुन कर खाक हो गई.

इस घटना के बाद नेहा और बजरंगी एकदूसरे से कतराने लगे. इस के बावजूद बजरंगी अपना फर्ज नहीं भूला था.

समय पंख लगाए उड़ता रहा. एक दिन कलुआ घबराया हुआ नेहा की दुकान पर पहुंचा और बताया कि लालधर की शिकायत पर पुलिस बजरंगी को मारतेपीटते थाने ले गई है.

यह सुन कर नेहा को लालधर पर गुस्सा आने लगा.

काफी रात गए बजरंगी कराहता हुआ अपनी खोली में लौटा. नेहा ने अपने किवाड़ में सांकल लगाई और बजरंगी की खोली में जा पहुंची.

पुलिस वालों ने बजरंगी को बुरी तरह मारा था. वह दर्द से कराह रहा था.

लालधर अपनी खोली में लौटा. वह किवाड़ में सांकल लगी देख कर सारा माजरा समझ  गया. आज नेहा को रंगे हाथों पकड़ने के खयाल से वह भी बजरंगी की खोली के बाहर पहुंच गया.

अंदर से नेहा की आवाज आई, ‘‘आखिर, तुम्हें पिटवाने से लालधर को क्या मिला?’’

‘‘नेहा, यह दुनिया बड़ी अजीब है. यहां लोग हर संबंध को शक की निगाहों से देखते हैं. थानेदार मुझ  से बारबार पूछ रहा था कि चिंकी को तुम अपने ठेले से स्कूल क्यों ले जाते हो? तुम लालधर की बीवी के आसपास क्यों मंडराते रहते हो? तुम्हीं बताओ, मैं इस सवाल का क्या जवाब देता?’’

‘‘तुम ने क्यों नहीं कहा कि चिंकी मेरी बेटी है… नेहा मेरी बीवी है…’’ नेहा अपने मन में कुछ ठानते हुए बोली.

‘‘नेहा…’’ बजरंगी चौंक कर बोला.

नेहा सुबकते हुए बोली, ‘‘आज मैं ने फैसला कर लिया है कि मैं अब लालधर के साथ एक पल भी नहीं रह सकती. चलो, हम दोनों इस जगह से कहीं दूर चलते हैं…’’

बजरंगी बोला, ‘‘नेहा, सचमुच तुम्हें पा कर मैं निहाल हो जाता. लेकिन एक मजबूरी है. अगर मैं तुम्हारे साथ भाग गया, तो लालधर और थानेदार की बातें सच साबित हो जाएंगी. पिटाई के जो जख्म लगे हैं, वे तो समय के साथ भर जाएंगे, लेकिन दिल जख्मी हो गया, तो उस की टीस मैं नहीं झेल पाऊंगा.’’

बजरंगी आगे बोला, ‘‘नेहा, अब तू अपनी खोली में लौट जा. अगर लालधर ने तुझे  यहां देख लिया, तो वह तुम्हारी जिंदगी बरबाद कर देगा.’’

जुदाई के गम से नेहा का दिल फटा जा रहा था. वह खुद को संभालते हुए खोली से बाहर निकल गई.

खोली के बाहर लालधर सिर झुकाए खड़ा था. उसे वहां देख कर नेहा बोली, ‘‘अच्छा हुआ कि तुम ने सारी बातें सुन लीं. भले ही बजरंगी ने मुझे अपनी बीवी नहीं माना हो, लेकिन मैं बजरंगी को अपना सबकुछ मान चुकी हूं. आज से तेरा और मेरा रिश्ता खत्म.

‘‘मैं चिंकी को ले कर तुम्हारी खोली छोड़ रही हूं. अब तुम मेरी ओर से आजाद हो…’’

हरदम तैश दिखाने वाला लालधर आज नेहा के सामने भीगी बिल्ली बना खड़ा था. Hindi Love Story

-चंद्रभूषण ध्रुव

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