Story in Hindi. मंजू ने राजन की गहरी आंखों में झांका और लाज से अपनी आंखें बंद कर लीं. उस ने राजन के कंधे पर अपना सिर टिका दिया... इस नाजायज रिश्ते का क्या नतीजा रहा?
एक दिन अचानक मौसम ने ऐसी करवट ली कि लोग अपने घरों की ओर भागने लगे. सां झ होतेहोते आसमान से ऐसा झमा झम पानी गिरा कि चारों तरफ ऊधम मच गया. उसी तेज आंधीतूफान के बीच राजन भीगताकांपता हुआ किसी तरह मंजू के घर के सामने से गुजर ही रहा था, तभी अचानक ‘खट’ से दरवाजा खुला.
दरअसल, बनारस के पास एक छोटा सा कसबा है, वहीं राजन अपनी पत्नी सुनीता के साथ रहता था. राजन दिल का बहुत साफ और सीधा इनसान था. वह बरतनों का व्यापार करता था लेकिन माल लाने और पैसों की अदायगी के चक्कर में उसे अकसर हफ्तों शहर से बाहर गुजारने पड़ते थे.
ठीक उन के पड़ोस में मंजू का घर था. मंजू के पति भी दूर सूरत के कपड़ों की एक फैक्टरी में थे, जो सालभर में बस एक ही बार घर लौट पाते थे.
सुनीता की मां को लकवा मार गया था, जिस से वह भी अपने मायके लखनऊ आतीजाती रहती थी. अब दोनों ही अपनेअपने सूने घरों में अकेलेपन से घुट रहे थे. शुरुआत तो बस आतेजाते छोटीमोटी बातचीत से हुई थी. कभी छत पर कपड़े फैलाते हुए, तो कभी गली के मोड़ पर.
पर धीरेधीरे ये मुलाकातें गहरी होती चली गईं. दोनों के बीच एक ऐसा अनकहा सा रिश्ता जुड़ गया, जो इस दुनिया और समाज के नियमों के हिसाब से बिलकुल गलत था.
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