Hindi Story. ‘‘अरे ओ राधा, जानेमन, पानी तो यहीं से ले जाया कर. क्यों अपने खूबसूरत जिस्म को इतनी तकलीफ देती है,’’ हवेली के बाहर खड़े विक्रम ने राधा को ऊपर से नीचे तक घूरते हुए कहा. राधा जबड़े भींच कर सिर झुकाए वहां से चल दी.
‘‘अरे छोड़ यार विक्रम, यह बुलबुल तो तेरे पिंजरे में आने वाली नहीं है,’’ साथ खड़े विक्रम के दोस्त राजवीर ने कहा, ‘‘मैं तो कहता हूं यार, इस का भी वैसे ही शिकार करते हैं, जैसा कि पिछले साल गांव की कमली का किया था.
‘‘बड़ा मजा आया था कसम से. बेचारी कमली ने शर्म के मारे अगले दिन नदी में कूद कर जान दे दी,’’ इस बार महेश ने विक्रम के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, तो तीनों के ठहाके गूंज उठे.
कुछ देर बाद जब राधा कुएं से पानी भर कर वापस लौटी, तो विक्रम झट से उस के सामने आ गया. पानी के छींटों से राधा के कपड़े उस के जिस्म से चिपक गए थे. विक्रम ने अपनी नजरें उस के सीने पर गड़ा दीं.
‘‘देखो ठाकुर, तुम इस तरह मुझे परेशान न किया करो, वरना ठीक नहीं होगा,’’ राधा ने घबराहट के मारे थूक निगलते हुए कहा.
‘‘अरे ओ बावली, तू मेरी बात क्यों नहीं मान लेती? कितने समय से कह रहा हूं कि एक बार मेरी भी प्यास मिटा दे. आखिर तेरा जाएगा भी क्या? और वैसे भी तू ठहरी बांझ. एक बार विक्रम की बांहों में आ कर तो देख, पहली बार में ही तेरी गोद हरी न हो जाए तो कहना,’’ विक्रम के इन जहर बुझे शब्दों ने राधा पर मानो तेजाब छिड़क डाला.
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