Story. जैसे ही उन दोनों की नजरें मिलीं, सुचित्रा ने आगे बढ़ कर नमस्ते करते हुए सौरभ से पूछा, ‘‘पहचाना मुझे?’’ सौरभ ने भी दोनों हाथ जोड़ कर नमस्ते करते हुए जवाब दिया, ‘‘न पहचानने का कोई सवाल ही नहीं उठता.’’
‘‘2 महीने पहले सिर्फ 2-3 घंटे के लिए ही मुलाकात हुई थी, इसलिए सोचा कि शायद आप मुझे न पहचान पाए हों,’’ सुचित्रा बोली. सौरभ जोर से हंसा और बोला, ‘‘आप जैसी खूबसूरत लड़की को कोई एक बार देख लेगा, तो आसानी से भूल नहीं पाएगा.’’
सुचित्रा का चेहरा शर्म से लाल हो उठा. उस की बड़ीबड़ी आंखें झुक गईं. वह थोड़ा सा मुसकराते हुए बोली, ‘‘क्यों मेरी झूठी तारीफ कर रहे हैं. तारीफ तो मुझे आप की करनी चाहिए कि आप कितने स्मार्ट हैं.’’
‘‘मैं लोगों की बाहरी खूबसूरती से ज्यादा उन के मन की खूबसूरती को अहमियत देता हूं. मन के काले लोगों को मैं कतई सहन नहीं कर पाता.’’
‘‘आप को देख कर और बातें कर के पता नहीं क्यों मुझे भी आप के स्वभाव और चालचलन के बारे में ठीक यही एहसास हुआ था, इसलिए उन लोगों द्वारा आप के साथ की गई इतनी बड़ी साजिश को मैं बरदाश्त न कर पाई.’’
‘‘साजिश... यह क्या कह रही हैं आप?’’ सौरभ की नजरें सुचित्रा पर टिकी हुई थीं.
थोड़ी देर के लिए सुचित्रा घबरा गई, फिर जल्दी ही वह खुद को संभाल कर बोली, ‘‘वही बात बताने के लिए तो आप को इस पार्क में चिट्ठी लिख कर बुलाया है. चलिए, उस पेड़ के नीचे बैठ कर आप को सारी बातें बताती हूं.’’
झील के किनारे फूलों से लदे गुलमोहर के पेड़ की छाया में दोनों आमनेसामने बैठ गए.
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