Social Media Influence: जो इन्फ्लुएंसर्स सोशल मीडिया पर सिर्फ कचरा फैलाते हैं उन के करोड़ों फौलोअर्स कैसे हो जाते हैं? लोग घंटों रील्स देखने में लगा देते हैं लेकिन उन्हें कुछ हासिल नहीं होता फिर भी वे क्यों जोंक की तरह फोन से चिपके रहते हैं?

आजकल कई बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के पास मिलियंस व्यूज और फौलोअर्स हैं लेकिन उन का कंटैंट इतना घटिया, टौक्सिक और बेकार है कि उन के व्यूअर्स पर तरस आता है. लोगों के पास कितना फालतू समय है जो ऐसे कंटैंट देखते हैं. ऐसे इन्फ्लुएंसर्स दर्शकों का कीमती समय तो बरबाद करते ही हैं, उन की मानसिकता भी खराब करते हैं.

एल्विश यादव को यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर करोड़ों व्यूज मिलते हैं और फौलोअर्स भी मिलियंस में हैं. बिग बौस जीतने के बाद यह बंदा और ज्यादा उद्दंड हो गया. औरतों के बारे में कुछ भी बोलता है. एल्विश का ज्यादातर गालीगलौज, बेवकूफीभरा चैलेंज और सनसनी फैलाने वाला कंटैंट बनाता है. यह सब देख कर युवा घंटों स्क्रौल करते हैं, हंसते हैं, लेकिन बाद में उन्हें कुछ हासिल नहीं होता. न कोई स्किल, न ज्ञान, न प्रेरणा. एलविश को फौलो करना, बस, समय की बरबादी है.

सवाल यह है कि इस तरह के इन्फ्लुएंसर्स, जो सोशल मीडिया पर सिर्फ कचरा फैलाते हैं, के करोड़ों फौलोअर्स कैसे हो गए? इस का कारण है डोपामीन. शौर्ट वीडियो, ड्रामा और सनसनी तुरंत खुशी देती है. ब्रेन इसे ‘फास्ट फूड’ की तरह एडिक्टिव मान लेता है. कई लोग तो बिना सोचे फौलो करते हैं कि ‘सब देख रहे हैं तो ठीक होगा.’ वे नहीं पाते कि इस से उन की लाइफ में क्या वैल्यू ऐड हो रही है.

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