Editorial. जंतरमंतर पर हुए युवा धरनेप्रदर्शन और नए जवानों की अपनेआप जमा हुई भीड़ ने साबित कर दिया है कि वे बिना और्गेनाइजेशन के, बिना राजनीतिक पार्टी के, बिना धार्मिक रीतिरिवाज के देश के शासकों की चूलें हिला सकते हैं, सत्ता में खलबली मचा सकते हैं, निहत्थे हो कर भी 50 लाख की सरकार की बंदूकोंलाठियों की फौजों को अपना रास्ता बदलने को मजबूर कर सकते हैं.

अभिजीत दीपके ने जो मजाकभजाक में कौकरोच जनता पार्टी शुरू की थी, बोस्टन में बैठ कर इंस्टाग्राम पर, उस ने 3 महीने में कई हजार सालों की परंपराओं को थोपने वाले 100 साल पुराने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उस की पिट्ठू भारतीय जनता पार्टी की एरोगैंस और फोर्स से बुलडोजरी राज करने वाले दंभ की पोल खोल दी.

मैडिकल कालेजों में एडमिशन लेने के लिए होने वाले नीट के एग्जाम में पेपर लीक होने के  बड़े घोटाले की मार कोई 24 लाख लड़केलड़कियों को सहनी पड़ी जिन्होंने बस अभी होश संभाला है. 18-19 साल के लड़केलड़कियां न सिर्फ शहरों के स्कूलों से 12वीं के एग्जाम दे कर आए थे, वे गांवोंकसबों से भी आए थे. इन में अमीरों के बच्चे थे तो मजदूरों, किसानों, कुलियों, चरवाहों, सेल्समैन, छोटेछोटे दुकानदारों, चपरासियों, कलर्कों के भी.

रिजर्वेशन की वजह से इस में आधे से ज्यादा ओबीसी, शैड्यूल्ड कास्ट्स, शैड्यूल्ड ट्राइब्स और गरीब ऊंची जातियों के ईडब्लूएस कोटे के थे. इस के अलावा जनरल सीटों पर बैठने वाले एग्जामनियों में से आधी लड़कियां थीं. 2022 में जहां 7,50,871 ओबीसी स्टूडैंट थे, 2,52,054 एससी थे, 1,03,397 एसटी थे और ईडब्लूएस 1,28,320 थे. 2026 तक ओबीसी बढ़ कर 8,43,032, एससी बढ़ कर 3,04,115, एसटी बढ़ कर 1,29,957 और ईडब्लूएस बढ़ कर 1,53,693 को गए थे. यानी सिर्फ नीट की परीक्षा देने वाले इस एग्जाम में बैठने वाले गरीब, जाति के कहर से दबेकुचले वर्ग के 65 से 70 परसैंट थे. यह एग्जाम सब से मुश्किल एग्जामों में है. सीटें सिर्फ 1,10,000 के आसपास हैं जिन में गरीबों के बस के सिर्फ सरकारी मैडिकल कालेज हैं जहां फीस बहुत कम है. प्राइवेट कालेजों में एमबीबीएस करने के लिए ही 2-3 करोड़ रुपए खर्च हो जाते हैं.

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