Power of Hard Work. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की 19 साल की भावना का भगवान में इतना ज्यादा विश्वास था कि वह अपना हर छोटाबड़ा काम मंदिर जा कर ईश्वर की सलाह से करती थी. कई बार तो वह परची निकालती थी कि यह काम करना चाहिए या नहीं. वैसे वह पिछड़ी जाति की है जिनके पुरखों ने मंदिरों में घुसने की भी हिम्मत नहीं की थी पर अब वह समझाती है कि ऊंची जातियों के लोग अमीर हैं क्योंकि भगवान उन की पूजा से प्रसन्न हैं. वह भी ऊंची जातियों से बढ़ कर पूजापाठ कर रही है.
एक बार भावना के छोटे भाई नीरज का 12वीं का रिजल्ट आना था तो उस ने मंदिर जा कर यह पूछा कि आज वह क्या कपड़े पहने कि उस के भाई के अच्छे नंबर आ जाएं? वहां एक पंडित बता दिया कि लाल रंग का सूट पहन ले काम बन जाएगा.
नीरज पढ़ाई में होशियार था, तो अच्छे नंबर आने थे, पर चूंकि भावना ने मंदिर में भगवान से पंडित के मार्फत किए वार्तालाप के मुताबिक लाल रंग का सूट पहना था तो उसे यह भरोसा हो गया कि ईश्वर से उस की डायरैक्ट बात होती है और वह कुछ भी कर सकती है. इंटरव्यू में सब जने सादे प्रैस किए शर्टपैंट पहन कर आए थे और नीरज लाल रंग के सूट में जोकर लग रहा था. वह रिजैक्ट हो गया.
https://youtube.com/shorts/oGTO-OuKlu8?si=hJmmlC7FxvcKd2ON
क्या पूजापाठ और मंदिर जाने से भावना का भाग्य इतना ज्यादा बदल जाता था कि वह हर काम में कामयाब हो रही थी? नहीं. इस के उलट भाग्य के पीछे भागने वाली लड़की ‘इंतजार’ करती है, जबकि मेहनत के पीछे भागने वाली लड़की ‘इतिहास’ बनाती है.
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