News Story: शनिवार का दिन था. शाम के 6 बज रहे थे. विजय घर पर अकेला था. इतने में दरवाजे की घंटी बजी. विजय ने दरवाजा खोला. बाहर अनामिका खड़ी थी. वह दनदनाती हुई भीतर आई. उस का मुंह गुस्से से तमतमा रहा था.‘‘क्या हुआ? घायल शेरनी क्यों बनी हुई हो? सब ठीक है ? तुम तो अपनी सहेली के घर गई थी,’’ विजय ने पूछा. ‘‘सत्यानाश हो गया. और तुम तो अपना मुंह खोलो ही मत. सब तुम्हारा ही कियाधरा है,’’ अनामिका ने कहा. ‘‘मैं ने क्या किया? सुबह तो तुम्हारा मूड एकदम ठीक था,’’ विजय बोला.
इतने में अनामिका ने अपने बैग से एक प्रैग्नेंसी टैस्ट स्ट्रिप निकाली और विजय के सामने रख दी. ‘‘यह क्या है?’’ विजय ने पूछा.


‘‘तुम्हारी करतूत...’’ अनामिका बोली, ‘‘मैं प्रैग्नेंट हूं. कहा था कि प्रोटैक्शन लगा लेना, पर तुम्हें तो अपने मजे से मतलब है.’’ वह स्ट्रिप देख कर विजय के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं. उस ने कांपते हाथ से वह स्ट्रिप उठाई और अपना माथा पकड़ लिया. ‘‘अब मुंह से कुछ बोलोगे या ऐसेही माथा पकड़े इसे घूरते रहोगे?’’ अनामिका बोली तुम  ही क्यों कोस रही हो? सारी गलती क्या मेरी है? तुम्हें भी तो ध्यान रखना चाहिए था. सब तुम्हारी लापरवाही का नतीजा है,’’ विजय बोला. तुम सही कह रहे हो. यहां मैं तुम्हारी जीहुजूरी करती रहूं और वहां केंद्र सरकार चाहती है कि दुनियाजय राम जीबोलती रहे,’’ अनामिका बोली. ‘‘अब यहां केंद्र सरकार कहां से गई?’’ विजय ने पूछा.


‘‘तुम और केंद्र सरकार एकजैसे हो. सारी गलती सामने वाले की. अब बताओ कि मनरेगा का नाम बदल करजी राम जीकरने की क्या तुक थी?’’ ‘‘तुम किस बारे में कह रही हो?’’ विजय ने कहा. अनामिका ने कहा, ‘‘मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के बारे में, जो भारत की गांवदेहात से जुड़ी सब से बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना रही है. यह साल 2005 में कांग्रेस सरकार के समय में लागू हुई थी. यह योजना गांवदेहात में 100 दिनों का गारंटेड रोजगार देती थी, जिस से गरीबों, किसानों और मजदूरों को पैसे के तौर पर ताकत मिलती थी. ‘‘पर अब केंद्र की मोदी सरकार ने चूंकि इस योजना से जुड़ा नया बिल पास किया है और इस काविकसित भारत गारंटी फौर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानीवीबी-जी राम जीनाम दिया है, तो इस पर विपक्ष ने बवाल मचाया है.’’

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