Hindi Social Story. फूलवती सुहाग की सेज पर बैठी पति के आने का इंतजार कर रही थी. उस की सांसों में रूपजवानी की महक थी, आंखों में सतरंगी सपने थे और दिल मदहोशी भरे एहसास से धड़क रहा था. उस का तनबदन खुमारी में डूबा जा रहा था.
घर में शादी की चहलपहल खत्म हो चुकी थी. सभी रिश्तेदार अपनेअपने घर जा चुके थे. घर में एक बूढ़ा ससुर था, जो शराब के नशे में किसी पड़ोसी से ऊंची आवाज में बोल रहा था. सास कई साल पहले मर चुकी थी.
फूलवती ने सुना था कि उस का पति दिलीप गांव में परचून की दुकान करता है. घर रुपएपैसों से खुशहाल है. मगर यहां आ कर देखा कि कच्चा, मिट्टी का बना छोटा सा घर है.
फूलवती को लगा कि ससुराल में तो मायके से भी ज्यादा गरीबी है, फिर भी उस ने अपने मन को सम?ा लिया. इनसान अगर मेहनत करे, तो ठीक उसी तरह घर की तंगहाली व भुखमरी को मिटाया जा सकता है, जिस तरह उन दोनों मांबेटी ने अपने घर को संभाल लिया था.
फूलवती के पिता उस के जन्म के 5 साल बाद मर गए थे. उस की मां जवान थी, फिर भी उस ने दूसरी शादी नहीं की. उस ने कहीं से कागज के फूलों के गुलदस्ते बनाने का काम सीख लिया था.
बस, दोनों मांबेटी इसी काम में जुट गईं. उन्होंने कागज के फूलों से बने गुलदस्ते बना कर बेचने का काम शुरू कर दिया. इसी कमाई से फूलवती की मां ने उसे 10वीं जमात तक पढ़ाया.
फूलवती ने सपना देखा था कि उस का पति दुकानदारी करेगा और वह फूलों के गुलदस्ते बना कर जो कमाई करेगी, उस पैसे से पति की मदद करेगी, अपने घर को खुशहाल बनाएगी.
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