Hindi Story. पिछले 2 साल से अपने पति से दूर याशिका सिंह गांव की हवेली संभाल रही थी. साथ था उन का नौकर अंशु. एक रात याशिका ने अंशु को अपने कमरे में बुलाया और...

पूर्वांचल के ईश्वरपुर गांव में फैली 100 बरस पुरानी हवेली दूर से ही अपनी पहचान दर्ज कराती थी. ऊंची मेहराबें, चौड़े बरामदे, पार्क में खिले रंगबिरंगे फूल सब मिल कर हवेली की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे.

इस हवेली के मालिक थे जमींदार शिवकांत सिंह, जो अब बूढ़े हो चले थे और उन का एकलौता बेटा डाक्टर आर्यवर्त सिंह पिछले 2 साल से इंगलैंड में था.

गांव में इस विशाल हवेली को जिंदा रखने वाले केवल 2 लोग थे, डाक्टर आर्यवर्त सिंह की पत्नी याशिका सिंह और हवेली की देखभाल में लगा 25 साल का बांका जवान अंशु.

याशिका सिंह पढ़ीलिखी और खूबसूरत औरत थी. शादी के बाद कुछ ही दिनों में उस का पति विदेश चला गया था. धीरेधीरे 2 साल बीत गए... संदेश आते, वीडियो काल कभीकभार होती, पर दूरी का सन्नाटा कहीं ज्यादा अखरता था.

https://youtube.com/shorts/RROHofWLTPI?si=l4OwYbuK9o8ef3VQ

हवेली जितनी विशाल थी, उतनी ही अकेली. लंबे बरामदे, खाली कमरे, भोर का धीमा उजाला और रात का गहरा अंधेरा, सब मिल कर याशिका सिंह के भीतर एक गहरी चुप्पी उतारते जा रहे थे.

याशिका सिंह अकसर सोचती, ‘क्या सचमुच शादी केवल एक रिश्ता है या एक ऐसा साथ जिसे दूरी खा जाती है?’

इधर अंशु अपना काम ईमानदारी से करता था. उस की हर हरकत में एक सादगी थी. वह बोलता कम, काम ज्यादा करता. जब वह आंगन में झाड़ू लगाता, तो जैसे हवेली भी किसी पुराने दिन को याद कर के मुसकराने लगती.

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