Hindi Short Story. उमर अहमद गांव के प्राइमरी स्कूल के 10 साल पुराने टीचर थे. वे अपने छात्रों को बड़े प्यार से पढ़ाते आ रहे थे. उन का अपना एक रुतबा था.

स्कूल की छुट्टी के बाद उन्होंने अपने कमरे की खिड़की से बाहर झांका, तो देखा कि 10-12 साल के मासूम बच्चे हवा के झोंकों से दौड़े चले जा रहे थे. उन्हें लगा, जैसे 40 साल पहले का समय और उन का बचपन लौट आया हो. उन की भूरी आंखें भर आईं, तो उन्होंने कुरते की जेब से रूमाल निकाल कर आंसू पोंछ लिए.

वे भी ऐसे ही अपने छोटे भाई प्यारे अहमद के साथ स्कूल आयाजाया करते थे. अगले दिन वे स्कूल जाने की तैयारी कर रहे थे कि अचानक उन का एक छात्र इस्माइल आ गया.

‘‘सब खैरियत तो है न?’’ उमर अहमद को चिंता हुई. ‘‘जी सर,’’ इस्माइल ने मुसकरा कर जवाब दिया.

‘‘फिर यहां क्यों आए? तुम्हें तो इस समय स्कूल में होना चाहिए था,’’ उन की हैरानी बढ़ती जा रही थी.

‘‘सर, अम्मी ने कहा था कि यह कार्ड आप को दे दूं,’’ इस्माइल ने गुलाबी कार्ड आगे बढ़ाया.

उमर अहमद की चिंता मिटी, फिर वे कार्ड लेते हुए बोले, ‘‘कैसा कार्ड है? किस सिलसिले में है?’’

‘‘सर, मेरी बहिन लाज की अगले हफ्ते शादी है. आप अपने पूरे परिवार के साथ जरूर आना. अच्छा, मैं चलता हूं,’’ वह मुसकराता हुआ चला गया. उमर अहमद कुछ कहना चाहते थे, मगर शायद इस्माइल जल्दी में था.

प्यारे अहमद अपने बडे़ भाई की इज्जतनवाजी पर खुश हो रहे थे. चूंकि वे ज्यादा पढ़ेलिखे नहीं थे, इसलिए ऐसी इज्जत उन्हें नहीं मिलती थी. प्यारे अहमद के अब्बा उन के अनपढ़ होने पर हमेशा ताने देते रहते थे. उन्हें डांटते भी बहुत थे. अब्बा की डांटफटकार सुन कर वे घंटों खेत में बैठ कर सोचते, ‘मैं पढ़ा क्यों नहीं?’

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