Story in Hindi. काश, यह भी सोचा जाता कि बहारों की ठंडी छांव तले रंगीन सपनों के आशियाने में गुजरने वाली जिंदगी का दूसरा पहलू किसी शाम सा उदास और बोझिल होगा, तो वक्त के किसी मोड़ पर किसी को दुख का एहसास ही क्यों सताता? प्रेम के रंगीन सपनों के महल के टूटते ही प्रेमियों की जिंदगी वीरान खंडहर सी हो जाती है. एक ऐसा खंडहर, जिस के पास बीते दिनों की यादों के सिवाय और कुछ नहीं होता.
लगातार 2 दिनों तक तेज बारिश के बाद सूरज निकला था. बच्चे तो जैसे बाहर खेलने के लिए तरस गए थे. धूप निकलते ही वे मैदान में जा पहुंचे.
घर का काम निबटा कर वह भी छत पर चली गई. कालोनी की कई औरतें पहले ही अपनीअपनी छतों पर बैठी धूप सेंक रही थीं.
उस की नजरें आसमान से हट कर उन किशोरकिशोरियों पर जा टिकीं, जो दुनियाजहान से बेफिक्र एकदूसरे की निगाहों में खोए थे. जाने क्यों एक किशोर में उसे एक धुंधला सा चेहरा नजर आ रहा था, जिसे वह 15 साल पहले छोड़ आई थी.
वह सोचने लगी कि कुछ ऐसा ही तो मौसम था. कुछ ऐसे ही तो दिन थे, जब उस से अचानक मुलाकात हुई थी. वह तभी पुरानी यादों के सागर में कूद गई. दिलोदिमाग पर कई खूबसूरत तसवीरें रेंगती चली गईं.
सावन के आने में अभी कुछ दिन बाकी थे. आसमान में रहरह कर बादल घिर आते, जराजरा सी देर में बारिश होने लगती, फिर घंटों रुकने का नाम न लेती.
बारिश रुकते ही वह जेवी कालेज जा पहुंची. दफ्तर के बाहर लड़कों की लंबी कतार देख कर वह घबरा उठी. चेहरे पर चिंता की हलकीहलकी लकीरें उभर आईं. लड़कियों की लाइन और भी लंबी थी. दाखिले का फार्म भरने का वह आखिरी दिन था.
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