Story. दिव्या जैसे ही रात के 3 बजे घर लौटी, तो वह मां को दरवाजे पर खड़ी देख कर चौंक गई और बोली, ‘‘क्या मम्मी, आप अभी तक जाग रही हैं? घर में नौकर तो है, वह दरवाजा खोल देता.’’
‘‘जवान बेटी रातभर घर से बाहर रहे और मां सुकून की चादर ओढ़ कर सोए, यह कैसे हो सकता है? कभी कुछ उलटासीधा हो गया, तो लोगों को मुंह दिखाना मुश्किल हो जाएगा,’’ चेतना गुस्सा होते हुए बोलीं.
यह सुन कर दिव्या का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया. वह बोली, ‘‘मम्मी, आप ऐसी बातें कर रही हैं? आप खुद इतनी एडवांस हैं. आप हम भाईबहिन से छिपछिप कर अपनी लाइफ को भरपूर एंजौय करती हैं, अपनी सारी हदें लांघ कर प्रदीप अंकल की बांहों में पड़ी मजा लूटती हैं और हमें ऊंचनीच सिखा रही हैं.’’
यह सुन कर चेतना हैरान खड़ी रह गईं. वे अजीब निगाहों से दिव्या का चेहरा देखने लगीं. जिस राज को वे सालों से छिपाए हुए थीं, आखिरकार उन की बेटी जान ही गई.
‘‘इस तरह हैरान होने की जरूरत नहीं है. हमें सब पता है. जब आप अपनी जिंदगी अपने तरीके से जी रही हैं, तो हमारे किसी मामले में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है,’’ विवेक भी अपने कमरे से बाहर निकला और अपनी मां चेतना पर बरस पड़ा.
‘‘क्या जरूरत थी आप को प्रदीप अंकल से छिपछिप कर नाजायज संबंध रखने की? शादी भी तो कर सकती थीं आप? तलाक के बाद पापा ने भी तो दूसरी शादी कर ली थी न.
‘‘आप की इस ओछी हरकत की वजह से हमें अपने दोस्तों के सामने कितनी शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है, पता भी है आप को? अपनी ही कालोनी में हम शर्म के मारे बाहर नहीं निकल सकते हैं,’’ कह कर विवेक ने अपने कमरे में जा कर दरवाजा तेजी से बंद कर लिया.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरस सलिल सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरस सलिल मैगजीन का सारा कंटेंट
- 1000 से ज्यादा सेक्सुअल हेल्थ टिप्स
- 5000 से ज्यादा अतरंगी कहानियां
- चटपटी फिल्मी और भोजपुरी गॉसिप
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरस सलिल सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरस सलिल मैगजीन का सारा कंटेंट
- 1000 से ज्यादा सेक्सुअल हेल्थ टिप्स
- 5000 से ज्यादा अतरंगी कहानियां
- चटपटी फिल्मी और भोजपुरी गॉसिप
- 24 प्रिंट मैगजीन




