Hindi Story. सत्यवती जब शाम ढले घर लौटी, तो पूरी थक चुकी थी. यह थकान तन से ज्यादा मन की थी. उस ने तकरीबन चौथाई गांव का चक्कर लगाया था. वह हर उस घर में गई थी, जिन के लिए उस का पति काम करता था, पर उसे किसी घर से काम नहीं मिला था. हां, मजाक, बेइज्जती और नफरत जरूर मिली थी.
सत्यवती माधोपुर गांव में रहती थी. गांव वालों के लिए यह बात अनोखी थी कि कोई औरत बाल काटने का काम करे. पर सत्यवती की मजबूरी थी कि वह इस काम के अलावा और कोई काम नहीं जानती थी.
सच तो यह था कि खुद सत्यवती ने भी कभी यह नहीं सोचा था कि उसे यह काम करना पड़ेगा. पर वक्त ने यों करवट बदली थी कि उसे ऐसा करने पर मजबूर होना पड़ा था. पल में भी दुनिया बदल जाती है, यह बात सत्यवती पर पूरी तरह सच साबित हुई थी.
सत्यवती का पति हरदेव बाल काटने का काम करता था. अपने इस काम से वह इतना कमा लेता था कि उस के छोटे से परिवार का गुजारा हो सके. परिवार में खूबसूरत बीवी और 3 बच्चे थे. सत्यवती खूबसूरत और सुशील थी. बच्चे प्यारे और आज्ञाकारी थे. इस से ज्यादा किसी को और क्या चाहिए था.
हरदेव अपनी बीवी और बच्चों के साथ खुश था. पर उस दिन अचानक उन की खुशियों पर जैसे कहर टूट पड़ा. सुबह हरदेव खुशीखुशी अपने गांव के साहूकार की बेटी की शादी का न्योता ले कर दूसरे गांव से उस के एक रिश्तेदार के घर चला, लेकिन जब वह गांव से थोड़ी दूर रेलवे लाइन को पार करने लगा, तो एक ट्रेन की चपेट में आ गया. घटना वाली जगह पर ही उस की मौत हो गई.
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